Israel Iran War: सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत पर भारत ने तोड़ी चुप्पी!

    Israel Iran War: सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत पर भारत ने तोड़ी चुप्पी!
    अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच भारत ने पहली बार ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर आधिकारिक शोक व्यक्त किया है. भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी गुरुवार को नई दिल्ली स्थित ईरान के दूतावास पहुंचे, जहां उन्होंने शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर कर खामेनेई के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की. इस दौरान उन्होंने ईरान की सरकार और वहां के लोगों के प्रति भारत की ओर से श्रद्धांजलि भी अर्पित की.

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK): अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच भारत ने पहली बार ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर आधिकारिक शोक व्यक्त किया है. भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी गुरुवार को नई दिल्ली स्थित ईरान के दूतावास पहुंचे, जहां उन्होंने शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर कर खामेनेई के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की. इस दौरान उन्होंने ईरान की सरकार और वहां के लोगों के प्रति भारत की ओर से श्रद्धांजलि भी अर्पित की.

    दरअसल, अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में 28 फरवरी को खामेनेई की मौत हो गई थी. ईरान ने अगले दिन यानी 1 मार्च को  उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि की थी. साथ ही बताया जा रहा है कि खामेनेई के कंपाउंड पर हुए मिसाइल हमले में उनकी पत्नी, बेटी-दामाद, बहू और पोती सहित करीब 40 सैन्य कमांडर भी मारे गए थे और उनके निधन के बाद दुनिया के कई देशों ने शोक संदेश भेजे हैं और ईरान के प्रति संवेदना व्यक्त की है.

    इसी कड़ी में अब भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी का ईरान दूतावास जाकर शोक जताना कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अब तक भारत ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी. ऐसे में विदेश सचिव का दूतावास जाकर शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर करना भारत की आधिकारिक संवेदना का संकेत माना जा रहा है.

    इधर, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर बड़ी घटना सामने आई. अमेरिका ने भारत से लौट रहे ईरानी युद्धपोत IRIS देना पर श्रीलंका के पास हमला कर उसे समुद्र में डुबो दिया. यह घटना दक्षिणी श्रीलंका के गाले शहर से लगभग 40 समुद्री मील यानी करीब 75 किलोमीटर दूर हुई. 

    श्रीलंका की नौसेना के मुताबिक जहाज के डूबने के बाद अब तक 87 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 32 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है. वहीं करीब 60 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है. अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार यह ईरानी युद्धपोत भारत में आयोजित एक बड़े नौसैनिक कार्यक्रम में हिस्सा लेकर लौट रहा था.

    यह जहाज 18 फरवरी को आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में आयोजित 2026 इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) और MILAN-2026 मल्टीलेटरल नेवल एक्सरसाइज में भाग लेने के लिए भारत आया था. कार्यक्रम समाप्त होने के बाद 25 फरवरी को यह वापस ईरान के लिए रवाना हुआ था. उसी दौरान श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र के पास इस पर हमला हुआ. रिपोर्ट्स के मुताबिक द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब अमेरिकी नौसेना की पनडुब्बी से दागे गए टॉरपीडो से किसी जहाज को युद्ध के दौरान निशाना बनाया गया है. बताया जा रहा है कि अब तक इस संघर्ष में अमेरिका ईरान के करीब 20 युद्धपोतों को समुद्र में डुबो चुका है.


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