क्या आपका भी बीमा क्लेम अटका हुआ है? जानें शिकायत का सही तरीका और अपने अधिकार


टीएनपी डेस्क (TNP DESK): कई बार लोगों के पास बीमा पॉलिसी होने के बावजूद क्लेम मिलने में काफी देर हो जाती है. कुछ मामलों में बीमा कंपनियां बार-बार दस्तावेज मांगती हैं या फिर साफ जवाब नहीं देतीं. ऐसे में ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उनके पास शिकायत करने और कानूनी मदद लेने के कई रास्ते मौजूद हैं. सही जानकारी होने पर आप अपना क्लेम हासिल कर सकते हैं और नुकसान से भी बच सकते हैं.
क्लेम में देरी हो तो कहां करें शिकायत
अगर आपका बीमा क्लेम लंबित है, तो सबसे पहले अपनी बीमा कंपनी के शिकायत निवारण अधिकारी को लिखित शिकायत दें. शिकायत में पॉलिसी नंबर, क्लेम नंबर और पूरी जानकारी साफ-साफ लिखें. अगर यहां से भी समाधान नहीं मिलता है, तो आप बीमा नियामक संस्था इरडाई (IRDAI) में शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इसके बाद जरूरत पड़ने पर कानूनी विकल्प भी अपनाए जा सकते हैं.
बीमा लोकपाल कैसे करता है मदद
बीमा लोकपाल व्यक्तिगत बीमा, समूह बीमा और छोटे उद्यमों से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई करता है. लोकपाल के पास वही मामले जाते हैं, जिनमें क्लेम की राशि 50 लाख रुपये तक हो. अगर क्लेम की रकम इससे ज्यादा है, तो ग्राहक को सीधे कोर्ट का सहारा लेना होता है.
मल्टी-ईयर रिन्यूअल से होगा फायदा
हेल्थ इंश्योरेंस को एक से ज्यादा सालों के लिए एक साथ रिन्यू कराना फायदेमंद होता है. इससे प्रीमियम पर छूट मिलती है और भविष्य में प्रीमियम बढ़ने का असर भी नहीं पड़ता. बढ़ती मेडिकल लागत को देखते हुए तीन साल की पॉलिसी लेना एक अच्छा विकल्प माना जाता है.
क्रिटिकल इलनेस बीमा में जरूरी नियम
गंभीर बीमारी वाले बीमा में क्लेम पाने के लिए सर्वाइवल पीरियड का नियम होता है. यानी बीमारी की पहचान के बाद तय समय तक जीवित रहना जरूरी होता है. अगर इस अवधि से पहले पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाती है, तो क्लेम नहीं मिलता. इसलिए पॉलिसी लेते समय कम सर्वाइवल पीरियड वाली योजना चुनना बेहतर होता है.
4+