लोगों को भड़काना रामगढ़ विधायक ममता को पड़ा भारी, 11 साल के राजनीतिक वनवास में गई, जानिए मामला

    लोगों को भड़काना रामगढ़ विधायक ममता को पड़ा भारी, 11 साल के राजनीतिक वनवास में गई, जानिए मामला

    रांची(RANCHI): रामगढ़ से कांग्रेस विधायक ममता देवी की विधानसभा की सदस्यता खत्म हो गई है. स्पीकर रवींद्रनाथ महतो के आदेश के बाद सोमवार को इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई. बता दें कि ममता  देवी को कोर्ट ने दोषी मानते हुए पांच साल की सजा सुनाई है. वहीं, उनके चुनाव लड़ने पर भी जानकारी आ गई है. जारी अधिसूचना के अनुसार ममता देवी 11 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकती हैं. यानी पांच साल की सजा खत्म होने के छह साल बाद तक ममता देवी चुनाव नहीं लड़ सकती हैं. ऐसे में विधायक के खिलाफ यह बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है.

    13 दिसंबर को कोर्ट ने सुनाया था फैसला

    बता दें कि हजारीबाग जिला जज ने 13 दिसंबर को ममता देवी को पांच साल की सजा सुनाई थी. उसी दिन से उनकी विधायकी खत्म हो गई. कोर्ट ने कहा था कि जनप्रतिनिधि कानून के तहत यह कार्रवाई की गई है. हजारीबाग कोर्ट ने ममता देवी को गोला में इनलैंड पावर लिमिटेड के मजदूरों के शोषण के खिलाफ आंदोलन में हुई हिंसा में दोषी करार दिया है. इस मामले में ममता सहित 13 दोषियों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई गई थी. इसके अलावा दस-दस हजार जुर्माना भी लगाया गया है.

    11 साल तक नहीं लड़ सकेगी चुनाव

    बता दें कि ममता देवी के 11 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दिया गया है. यह रोक पांच साल सजा के दौरान और छह साल उसके बाद तक जारी रहेगा. ऐसे में अब यह फैसला राजनेताओं को सोचने में एक बार जरूर मजबूर कर सकता है कि क्या वो जनममता को विरोध-लड़ाई के लिए उकसाये या नहीं.   

    IPL गोलीकांड में हुई है सजा

    बता दें कि इनलैंड पावर गोलीकांड मामला 29 अगस्त, 2016 का है. आइपीएल कंपनी में गोलीकांड के बाद दो लोगों की मौत हुई थी, कई लोगों को जेल भेजा गया था, तत्कालीन जिला परिषद सदस्य के रूप में ममता देवी इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही थी. सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग आइपीएल कंपनी के मुख्य गेट के पास धरना प्रदर्शन कर रहे थे. आंदोलनकारी धीरे-धीरे काफी उग्र हो गए, पत्थराव भी हुआ था. मजबूरी में पुलिस को गोली चलाना पड़ा, 47 राउंड गोली चलने के बाद विधि व्यवस्था सामान्य हुई थी. इस दौरान दो आंदोनकारियों की मौत भी हुई. वहीं, प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राजीव जायसवाल और ममता देवी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था. कई राजनीतिक दल इस मुद्दे पर राज्यव्यापी आंदोलन किया था. यहां आपको बता दें जिस वक्त की ये घटना है, उस समय विधायक ममता देवी जिला परिषद सदस्य हुआ करती थीं. उनपर भीड़ को उकसाने का आरोप लगा. जिसके बाद रजरप्पा थाना में मामला दर्ज हुआ. बाद में यह मामला कोर्ट पहुंचा. पुलिस कार्रवाई के बाद विधिवत रूप से कोर्ट में इस मामले की सुनवाई शुरू हुई. अभी तक 47 लोगों की गवाही और साक्ष्य पेश करने को लेकर कोर्ट में कार्य हुआ. इस मामले में विधायक समेत 13 लोगों पर न्यायालय दोषी मानते हुए सजा सुनायेगी. बता दें कि साल 2019 में ममता देवी को कांग्रेस ने टिकट दिया, इससे पहले भी हजारीबाग के एमपी/एमएलए कोर्ट ने एक मामले में ममता देवी को 3 महीने की सजा सुनाई थी. हालांकि, उन्हें तुरंत जमानत भी मिल गई थी. जिसके बाद अब उन्हें दोषी मानते हुए पांच साल की सजा सुनाई गई है.

    झारखंड में विधायकी गंवाने वाली छठी राजनेता

    बता दें कि झारखंड में विधायकी गंवानी वाली ममता देवी पहली विधायक नहीं हैं इससे पहले भी पांच लोगों की विधायकी जा चुकी है. उनमें मांडर विधायक बंधु तिर्की, सिल्ली के अमित महतो, लोहरदगा के कमल किशोर भगत, कोलेबिरा के एनोस एक्का और गोमिया के विधायक योगेंद्र प्रसाद शामिल हैं.     

     

         

           


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