जमशेदपुर(JAMSHEDPUR): ‘जब तक तोड़ेंगे नहीं तब तक छोड़ेंगे नहीं’ यह डायलॉग है फिल्म ‘मांझी द माउंटेन मैन’ का. झारखंड-बिहार का लगभग हर व्यक्ति इस फिल्म और डायलॉग से वाकिफ होगा. बिहार के दशरथ मांझी ने अकेले के दम पर पहाड़ को काटकर रास्ता बनाया था. अब ऐसा ही कारनामा झारखंड के पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया प्रखंड के द्वरीशोल गांव के रहने वाले दशरथ मार्डी ने कर दिखाया है. उन्होंने पश्चिम बंगाल और झारखंड सीमावर्ती के पहाड़ को काट कर सड़क बनायी है.
पश्चिम बंगाल और झारखंड दोनों गांव के ग्रामीण संयुक्त रूप से श्रमदान कर सड़क बना रहे हैं. आपको बता दें कि इस सड़क के बनने से सात किलोमीटर लंबी दूरी कम होगी. इसके बनने से बंगाल के काकड़ी झरना, ढकाई और झारखंड के जयनगर, द्वारीशोल समेत दर्जनों गांव के ग्रामीणों को इसका लाभ मिलेगा.
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क्या है पूरा मामला
दरअसल, झारखंड और बंगाल सीमा के जयनगर गांव में रहने वाले लोगों को घाटशिला जाने के लिए चाकुलिया होते हुए जाना पड़ता है. जिसकी कुल दूरी 45 किलोमीटर हो जाती है और करीब 2 घंटे का समय लग जाता था. ऐसे में जयनगर में रहने वाले लोग और बंगाल के लोगों ने पहाड़ काटने की तैयारी ली. फिलहाल पहाड़ काट लिया गया है और कच्ची सड़क बना ली गई है.
वहीं, ग्रामीणों ने बताया कि जब बिहार के दशरथ मांझी अकेले के दम पर पहाड़ काटकर सड़क बना सकते हैं तो हम क्यों नहीं. इसी जज्बे के साथ हमने काम शुरू किया और आज कच्ची सड़क लगभग बनकर तैयार हो गई है. दशरथ मार्डी ने बताया कि हमलोग 5 साल से इस पर लगे हुए थे. इसके बनने से लोगों को खेती में आसानी होगी. झारखंड-बंगाल में आना जाना और व्यापार करना आसान हो जाएगा.
रिपोर्ट: रंजीत ओझा, जमशेदपुर
Thenewspost - Jharkhand
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