कोचिंग सेंटर की मनमानी पर लगाम लगाने की तैयारी में हेमंत सरकार विधानसभा में पेश हुआ बिल, शिक्षा माफियाओं में मची खलबली

    कोचिंग सेंटर की मनमानी पर लगाम लगाने की तैयारी में हेमंत सरकार  विधानसभा में पेश हुआ बिल, शिक्षा माफियाओं में मची खलबली

    रांची (RANCHI) : झारखंड में पहली बार कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने के लिए राज्य सरकार ने झारखंड कोचिंग सेंटर विधेयक 2025 को विधानसभा में पेश किया है. यह विधेयक छात्रों की सुरक्षा, फीस संरचना की पारदर्शिता, शिक्षण की गुणवत्ता और संस्थानों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है. राज्य में तेजी से बढ़ते कोचिंग उद्योग को देखते हुए सरकार ने माना कि अब समय आ गया है कि इस क्षेत्र को एक व्यवस्थित ढांचे में लाया जाए.

    विधेयक की प्रमुख बातें

    विधेयक के अनुसार झारखंड में संचालित होने वाले सभी कोचिंग सेंटरों को पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा. बिना पंजीकरण के कोई भी संस्थान काम नहीं कर सकेगा. इसके लिए सरकार ने स्पष्ट प्रावधान किया है कि संबंधित विभाग से मान्यता प्राप्त करने के बाद ही संस्थान छात्रों का नामांकन कर सकेंगे. फीस निर्धारण में पारदर्शिता पर भी जोर दिया गया है. संस्थान अब छात्रों और अभिभावकों को फीस की पूरी जानकारी पहले से देंगे और बीच में अचानक शुल्क बढ़ाने पर रोक रहेगी. किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या ग़लत जानकारी देने पर संस्थान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है.

    सुरक्षा के मद्देनज़र यह विधेयक कोचिंग सेंटरों को अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे, अग्निशमन यंत्र और उचित अधोसंरचना रखने का आदेश देता है. साथ ही छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी गोपनीय रखने और उनके साथ किसी भी तरह का मानसिक या शारीरिक शोषण न हो, इसके लिए भी सख्त नियम बनाए गए हैं.

    कोचिंग संस्थानों पर निगरानी

    विधेयक के प्रावधानों के तहत सरकार एक निगरानी समिति गठित करेगी, जो नियमित रूप से कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण करेगी. समिति छात्रों और अभिभावकों से मिलने वाली शिकायतों पर संज्ञान लेगी और दोषी पाए जाने पर संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई करेगी. इसके तहत पंजीकरण रद्द करने तक का अधिकार होगा. इस विधेयक में यह भी कहा गया है कि संस्थान अपनी विज्ञापन सामग्री में भ्रामक दावे नहीं कर सकेंगे. छात्रों की सफलता दर या चयनित उम्मीदवारों की संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने पर प्रतिबंध लगाया गया है.

    छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत

    कोचिंग सेंटर विधेयक छात्रों और अभिभावकों के हितों की रक्षा करने वाला माना जा रहा है. फीस की पारदर्शिता और सुरक्षा उपायों के कारण छात्रों को पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी। साथ ही, अब कोचिंग संस्थान अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट पाएंगे. सरकार ने साफ किया है कि इस कदम का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है, न कि संस्थानों पर अतिरिक्त बोझ डालना. विधेयक पारित होने के बाद राज्य में शिक्षा के इस क्षेत्र को एक नया आयाम मिलने की उम्मीद है.

    विपक्ष और शिक्षा जगत की प्रतिक्रिया

    विधानसभा में विपक्ष ने विधेयक पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. कुछ सदस्यों का कहना है कि सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि पंजीकरण प्रक्रिया सरल और पारदर्शी हो, ताकि छोटे और मध्यम स्तर के कोचिंग संस्थानों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े.

    वहीं शिक्षा विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने इस कदम का स्वागत किया है उनका कहना है कि लंबे समय से कोचिंग संस्थानों पर नियंत्रण की जरूरत महसूस की जा रही थी. खासकर झारखंड जैसे राज्य में, जहां बड़ी संख्या में छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग पर निर्भर रहते हैं, ऐसे कानून से सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे.  झारखंड कोचिंग सेंटर विधेयक 2025 को अगर विधानसभा से मंजूरी मिलती है तो यह राज्य में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुरक्षित बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगा. सरकार का दावा है कि इससे छात्र न केवल बेहतर माहौल में पढ़ाई कर पाएंगे, बल्कि अभिभावकों का भी संस्थानों पर भरोसा बढ़ेगा.

     


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