कमर्शियल गैस की बढ़ी कीमत का बाजार पर असर, होटल,ठेले खोमचे में बढ़ा खाने पीने का रेट

    कमर्शियल गैस की बढ़ी कीमत का बाजार पर असर, होटल,ठेले खोमचे में बढ़ा खाने पीने का रेट

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर अब देश के छोटे-बड़े कारोबारियों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है. एक मई से कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर की कीमत में भारी इजाफा हुआ है, जिसने खासतौर पर होटल, रेस्टोरेंट और ठेला संचालकों की कमर तोड़ दी है. जो सिलिंडर पहले 2200 से 2300 रुपये के बीच मिल जाता था, उसकी कीमत अब 3000 रुपये के पार पहुंच गई है. वहीं छोटे यानी 5 किलो वाले सिलिंडर के दाम में भी करीब 250 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

    इस अचानक आई महंगाई ने छोटे व्यापारियों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है. जिन कारोबारों का पूरा संचालन गैस पर निर्भर है, उनके लिए यह बढ़ोतरी किसी झटके से कम नहीं है. होटल में काम करने वाले बताते हैं कि अब गैस की नियमित उपलब्धता भी एक बड़ी समस्या बन गई है. पहले जहां समय पर सिलिंडर मिल जाता था, अब इसके लिए इंतजार करना पड़ता है. कई बार मजबूरी में कोयले या दूसरे विकल्पों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे काम की गति धीमी हो जाती है और मेहनत भी बढ़ जाती है.

    फास्ट फूड और छोटे ढाबों का कारोबार पूरी तरह गैस पर टिका होता है. ऐसे में कीमत बढ़ने और आपूर्ति बाधित होने का सीधा असर खाने-पीने की चीजों की लागत पर पड़ रहा है. लेकिन दुकानदारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे ग्राहकों पर इसका बोझ डालें या खुद घाटा सहें. अगर कीमतें बढ़ाई जाती हैं तो ग्राहक नाराज होकर दूसरी जगह चले जाते हैं, और अगर कीमतें वही रखी जाती हैं तो मुनाफा खत्म हो जाता है.

    कई रेस्टोरेंट संचालकों को कहना है कि बढ़ती लागत के चलते उन्हें अपने मेन्यू में बदलाव करना पड़ रहा है. कुछ महंगे व्यंजन हटाने पड़े हैं, तो कुछ की मात्रा कम करनी पड़ रही है. इसका असर न सिर्फ कारोबार पर पड़ रहा है, बल्कि ग्राहकों के अनुभव पर भी साफ दिख रहा है. पहले जहां अलग-अलग स्वाद का विकल्प मिलता था, अब सीमित विकल्प ही उपलब्ध हो रहे हैं.

    छोटे दुकानदारों की स्थिति और भी ज्यादा नाजुक है. उनके लिए हर दिन की कमाई ही जीवनयापन का आधार होती है. ऐसे में अचानक खर्च बढ़ने से उनका बजट पूरी तरह बिगड़ गया है. कई लोग अब वैकल्पिक ईंधन जैसे कोयला या लकड़ी की ओर लौटने लगे हैं, जो न सिर्फ पर्यावरण के लिए हानिकारक है बल्कि काम को भी कठिन बना देता है.

    व्यापारियों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो छोटे कारोबार बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं. उन्होंने सरकार से मांग की है कि कमर्शियल गैस की कीमतों को नियंत्रित किया जाए और इसकी नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि उनका व्यवसाय सुचारू रूप से चल सके. गैस की कीमतों में हुई इस भारी बढ़ोतरी ने छोटे कारोबारियों के लिए संकट खड़ा कर दिया है. आने वाले समय में यदि इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका असर न सिर्फ व्यापार बल्कि आम लोगों की जेब पर भी पड़ना तय है.

     



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