महाकुम्भ में वायरल हुए IITian साधु अभय, जानिए इनके साधारण जीवन से वैराग्य तक पहुंचने की असल कहानी

    महाकुम्भ में वायरल हुए IITian साधु अभय, जानिए इनके साधारण जीवन से वैराग्य तक पहुंचने की असल कहानी

    टीएनपी डेस्क : महाकुंभ मेले में इस वक्त IIT बाबा काफी चर्चा में है. यह कोई साधारण बाबा नहीं है बल्कि यह आईआईटी मुंबई से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल कर करोड़ों के पैकेज ठुकराने वाले अभय सिंह है. इन्होंने आईआईटी मुंबई से   एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की. इसके बाद इन्हें करोड़ का पैकेज भी मिला लेकिन अभय को यह सब नहीं भाया और उसने सन्यास और वैराग्य के जीवन को अपनाने का फैसला कर लिया. इस वक्त अभय महाकुंभ में काफी चर्चा में है. हर कोई इस आईआईटी बाबा की ही बातें कर रहा है. सोशल मीडिया पर इनके नाम से मिम्स की बाढ़ आ गई है. आईए जानते हैं कौन है यह सन्यासी और क्या है उनके जीवन की पूरी कहानी. 

    इंजीनियर से संन्यासी बनने का सफर

    अभय सिंह हरियाणा के झज्जर जिले के रहने वाले हैं. उनके पिता झज्जर कोर्ट में बतौर वकील प्रैक्टिस करते हैं. झज्जर के एक छोटे से शहर से निकलकर आईआईटी मुंबई तक पहुंचने वाले अभय की कहानी काफी दिलचस्प है. अभय खुद भी कई चैनल को दिए इंटरव्यू में बताया कि 731वीं ऑल इंडिया रैंक के साथ उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया. साइंस और इंजीनियरिंग में बचपन से ही उनकी रुचि थी. इसके बाद जब वह कॉलेज पास आउट हुए तो उन्होंने टिचिंग का काम शुरू किया. फिर फैशन पत्रिकाओं और एड फिल्मों में भी काम किया. लेकिन धीरे-धीरे उनकी रुचि इन सबसे खत्म होने लगी और उन्होंने फैसला किया कि अबे भी संन्यासी की राह पर ही चलेंगे.

    आईआईटी बॉम्बे में उन्होंने 2008 से 2012 के बैच में इंजीनियरिंग किया. इसके बाद उन्होंने मास्टर्स में डिजाइन का कोर्स किया. फिर उन्होंने दर्शनशास्र और आत्मज्ञान के क्षेत्र में काम शुरू किया. अभय ने ndtv को दिए इंटरव्यू में बताया कि जीवन के सभी क्षेत्रों में अनुभव किया. इसके बाद वहां लगा कि जो दिख रहा है वह सच नहीं है. जो इंसान के भीतर है वही असली ज्ञान है. उन्होंने कहा की मेरे जीवन का लक्ष्य बहुत अलग है. उन्होंने कहा कि मैं जिंदा हूं ये भी लोगों को पता नहीं चले. कुछ पता ही नहीं चले कौन है क्या है कहाँ से आया और कहाँ चला गया.  कहा मुझे कई नाम मिले जिसको मैं जैसा दिखता हूँ वो मुझे वैसा नाम दे देता है. 

    मेडिसिन कर के मेंटल ट्रामा से बाहर निकले

    उन्होंने बताया कि बचपन में बच्चों पर अगर डोमेस्टिक वायलेंस हो तो उसका उसके दिमाग पर क्या असर पड़ता है. इस पर उन्होंने रिसर्च किया. इसके बाद उन्होंने उस पर एक फिल्म भी बनाई है. 2017 में उन्हें कुछ मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम हुआ. उसके बाद उन्होंने मेडिटेशन करनी शुरू की और उसके बाद फिर वह इस मेंटल ट्रामा से बाहर निकले. उन्होंने बताया कि उनकी गर्लफ्रेंड भी थी. 4 साल की रिलेशनशिप भी थी. लेकिन उन्हें पता नहीं था कि जीवन में वह आगे कैसे बढ़ेंगे तो फिर उन्हें लगा कि नहीं यह सब उनके लिए नहीं है. उन्होंने कहा कि मेरे अंदर कोई फीलिंग ही नहीं थी तो फिर मैने इन सब को छोड़ दिया. 

    अभी महादेव के दिखाए रास्ते पर चल रहे हैं आईआईटी बाबा 

    अभय ने अपने इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने सभी धर्म की किताब पढ़ी और हर चीज में उन्हें बस सत्य दिखा. वह था आत्मा की शांति. उन्होंने अपनी किताब ए ब्यूटीफुल प्लेस टू गेट लॉस्ट में जीवन के सारे अनुभवों को साझा किया है. बताया कि उनके जीवन का हर रुख महादेव तय करते हैं. महादेव ही मेरे हर कदम का मार्गदर्शन कर रहे थे और महादेव ही उन्हें बताते हैं कि आगे क्या करना है और जब तक उनके जीवन की जो खोज है वह समाप्त नहीं हो जाती तब तक वह महादेव के रास्ते दिखाएं रास्ते पर ही चलते रहेंगे


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