अगर आपको भी ऑफिस में ओवरटाइम की नहीं मिलती एक्स्ट्रा सैलरी, तो जान लें ये जरूरी बात

    अगर आपको भी ऑफिस में ओवरटाइम की नहीं मिलती एक्स्ट्रा सैलरी, तो जान लें ये जरूरी बात

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK): 1 अप्रैल 2026 को भारत में Code on Wages लागू हो चुका है. इसका सरल और साफ मतलब ये है की ये कोड कर्मचारियों के हित में निकाल गया था.इस नियम के लागू होने से इसका पूरा असर कर्मचारियों की कमाई और सेविंग्स पर पड़ेगा.

    इसमें सबसे बड़ा बदलाव ओवरटाइम को लेकर है. अब अगर कोई कर्मचारी तय समय से अधिक काम करता है, तो उसे हर अतिरिक्त घंटे के लिए दोगुना भुगतान मिलेगा. यहां तक कि अगर कोई व्यक्ति शिफ्ट खत्म होने के बाद 15 से 30 मिनट भी अतिरिक्त काम करता है, तो उसे आधे घंटे के ओवरटाइम के रूप में गिना जाएगा. सप्ताह में कुल काम की सीमा 48 घंटे रखी गई है, हालांकि कंपनियां ब्रेक के साथ एक दिन की शिफ्ट को 12 घंटे तक बढ़ा सकती हैं, बशर्ते साप्ताहिक सीमा का पालन हो.

    वेतन संरचना में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है. अब किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी उसकी कुल लागत (CTC) का कम से कम 50 प्रतिशत होना जरूरी है. इसका मतलब है कि भत्तों की हिस्सेदारी सीमित हो जाएगी. इस बदलाव का असर दो तरह से दिखेगा. एक तरफ, बेसिक सैलरी बढ़ने से पीएफ और ग्रेच्युटी में ज्यादा योगदान होगा, जिससे रिटायरमेंट के समय बेहतर फंड तैयार होगा. दूसरी ओर, हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी कुछ कम हो सकती है, क्योंकि पीएफ में ज्यादा कटौती होगी.

    इन नए नियमों का सबसे ज्यादा लाभ उन कर्मचारियों को मिलने की उम्मीद है जो फैक्ट्री, मैन्युफैक्चरिंग या अन्य श्रम-प्रधान क्षेत्रों में काम करते हैं. ऐसे क्षेत्रों में अक्सर अतिरिक्त काम लिया जाता है, और अब उन्हें इसका उचित भुगतान मिलेगा. वहीं, दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए स्थिति अलग हो सकती है, क्योंकि कई कंपनियों में ओवरटाइम की व्यवस्था सीमित होती है. हालांकि, उनकी लंबी अवधि की बचत जरूर बढ़ेगी.

    सरकार ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कंपनियों पर सख्ती भी बढ़ाई है. अब नियोक्ताओं को कर्मचारियों के काम के घंटों का सटीक रिकॉर्ड रखना होगा. साथ ही, नौकरी छोड़ने या समाप्त होने की स्थिति में कर्मचारी का पूरा भुगतान, जिसमें ओवरटाइम भी शामिल है, समय पर करना अनिवार्य होगा. 



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