अरे मोरी मईयां ! इस जगह फल-सब्जी की तरह बाजारों में बिकते है दुल्हे, पैसे दो और दुल्हा तुम्हारा, पढ़ें इस मंडी की खासियत

    अरे मोरी मईयां ! इस जगह फल-सब्जी की तरह बाजारों में बिकते है दुल्हे, पैसे दो और दुल्हा तुम्हारा, पढ़ें इस मंडी की खासियत

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): दुनिया भर में कई तरह के बाजार लगते है, यानि आप जरूरत की सामान जैसे सब्जी, फल आदि खरीदने के लिए बाजार जाते है, इन बाजारों में आपको दुकानदार से जांच-परखकर समान खरीदते है, लेकिन आज हम आपको दुनिया के एक अनोखी मंडी या बाजार के बारे में बताने वाले हैं जहां फल-सब्जी नहीं बल्कि दूल्हे कौड़ी के भाव बिकते है.यह सुनकर आपको थोड़ा अटपटा लगेगा लेकिन यह सच है. अब यह मंडी कहां लगती है और क्यों लगती है चलिए जान लेते है.

    पढ़ें इस मंडी की खासियत

    हमारे देश में शादी-विवाह को जीवन का अहम हिस्सा माना जाता है, जहां कई तरह की परंपरा निभाई जाती है, जहां इससे पहले दो लोग दूल्हा और दुल्हन एक दूसरे का हाथ पकड़कर  सात जन्मों तक साथ देने का वादा करते है.शादी तय करने से पहले लड़की और लड़के घरवाले मिलते है, बात करते है, और शादी की बात तय होती है.जिसमे पैसे की कोई बात नहीं होती वहां बस रिश्ते तय किए जाते है, लेकिन दुनिया में एक ऐसी मंडी लगती है, जहां दूल्हन बाजार में अपने मनपसंद दूल्हे को पैसे देकर खरीदती है. चलिए जान लेते हैं ग्रुम मार्केट की पूरी सच्चाई क्या है.

    योग्यता के आधार पर दूल्हे खरीदे और बेचे जाते है

    आपको बताये कि इस बाजार की खास बात है कि यहां योग्यता के आधार पर दूल्हे खरीदे और बेचे जाते है. अब बतायें कि इस ग्रुम मार्केट में योग्यता, नौकरी, खानदानी विरासत के आधार पर लड़कों की बोली लगायी जाती है, यदि आप ग्रुम मार्केट देखना चाहते हैं तो आपको विदेश जाने की जरूरत नहीं है बल्की आप भारत में इस मार्केट को देख सकते है.चलिए बता देते है कि दुल्हे की बिक्री करनेवाली मंडी कहां लगती है.

    700 साल पुराना है मार्केट

    आपको बताये कि बिहार के मधुबनी जिले में 700 साल से यह मार्केट लगता है. स्थानीय बाजार क्षेत्र में कई लड़के अपनी बोली लगवाते है. इस मेले की खास बात यह है कि यह 9 दिनों तक लगता है. जिसमें कुंवारे लड़के इस उम्मीद में बैठे रहते हैं कि किसी लड़की को वह पसंद आ जाए और उसकी शादी हो जाए. बाजार में दूल्हे धोती और कुर्ता पहन कर आते है, तो कुछ लोग जींस टीशर्ट भी पहन कर आते है.

    पढ़ें क्यों की गई थी इसकी शुरुआत

    भले ही दूल्हे की मंडी आपको अजीबो-गरीब लगती हो लेकिन इसके पीछे की जो नियत है वह काफी साफ और अच्छी है. दरअसल दहेज से मुक्ति के लिए इस बाजार की शुरुआत की गई थी वहीं कुछ लोग बताते हैं कि बाजार में आनेवाले कुछ लड़के दहेज की मांग करते है,यहां लड़कों को उनकी योग्यता के आधार पर कीमत मिलती है.अगर किसी की उम्र 35 साल से ज्यादा हो तो उसकी कीमत 50 हजार है वहीं अगर उम्र कम है तो उसकी कीमत 2 से 3 लाख रुपये तक हो जाती है. वहीं लड़कों के साथ इस मंडी में पंडित जी भी होते हैं जो इन रिश्तों को फिक्स करने में आपकी मदद करते हैं


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