असम में झामुमो का मिशन: आदिवासी सीट पर हेमंत-कल्पना सोरेन की परीक्षा

    झारखंड के बाद अब हेमंत की टीम असम में धमाल मचाने को मैदान में उतर गई. विधानसभा चुनाव में 19 सीट पर झामुमो ने धमाकेदार इंट्री की है. खुद इस पूरे कैम्पेन की कमान हेमंत और कल्पना ने अपने हाथ में रखा है. ऐसे में अब चर्चा है कि झारखंड के बाद असम में भी हेमंत कल्पना का जादू देखने को मिलेगा. असम के आदिवासी हेमंत पर भरोसा जता सकते है. साथ ही एक नई तस्वीर इस चुनाव से निकल कर सामने आएगी.

    असम में झामुमो का मिशन: आदिवासी सीट पर हेमंत-कल्पना सोरेन की परीक्षा

    रांची(RANCHI): झारखंड के बाद अब हेमंत की टीम असम में धमाल मचाने को मैदान में उतर गई. विधानसभा चुनाव में 19 सीट पर झामुमो ने धमाकेदार इंट्री की है. खुद इस पूरे कैम्पेन की कमान हेमंत और कल्पना ने अपने हाथ में रखा है. ऐसे में अब चर्चा है कि झारखंड के बाद असम में भी हेमंत कल्पना का जादू देखने को मिलेगा. असम के आदिवासी हेमंत पर भरोसा जता सकते है. साथ ही एक नई तस्वीर इस चुनाव से निकल कर सामने आएगी.

    दरअसल असम चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा अकेले चुनाव लड़ रही है. 19 आदिवासी बाहुल्य सीट पर अपने प्रत्याशी उतार कर चुनावी माहौल में कूद गए. चुनाव प्रचार का मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शंखनाद भी कर दिया है. इस बीच अब कल्पना भी चुनावी समर में जनता के बीच पहुंचेंगी. ऐसे में अब हेमंत कल्पना की जोड़ी असम में कितना कमाल करती है यह तो चुनाव परिणाम तय करेगा. लेकिन आदिवासी समाज में एक उत्साह देखा जा रहा है. जिससे इस चुनाव में नई तस्वीर दिख सकती है.

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चुनावी जन सभा को संबोधित किया तो यहां के कई इलाके के लोगों की भीड़ उनके सभा में पहुंची. घंटों धूप में खड़े हो कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बातों को लोगों ने सुना है. यानि संकेत साफ है कि आदिवासियों को लग रहा है इस चुनाव में कोई उनके बीच का उनके पास पहुंचा है. इसके पीछे की वजह साफ है. हेमंत स्थानीय भाषा को जानते है. और अपने भाषण भी लोकल भाषा में दे रहे है. जिससे एक कनेक्शन भी बन रहा है. हलाकी यह कितना फायदा होगा यह समय तय करेगा.

    लेकिन चुनाव के शुरुआत में ही झामुमो ने अपनी मजबूत उपसतिथि दर्ज करा दी है. सबसे बड़ी बात है कि असम में बड़ी संख्या में झारखंड के आदिवासी रहते है. ऐसे में हेमंत को इसका भी फायदा पहुंच सकता है. साथ ही अगर कुल मतदाता में देखे तो 12 प्रतिशत से अधिक आदिवासी वोटर है. यानि कई सीट पर आदिवासी निर्णायक भूमिका में रहते है. अगर हेमंत के साथ आदिवासी गए तो चुनाव परिणाम के बाद असम में हेमंत गेम चेंजर बन सकते है.

    साथ ही राजनीतिक जानकार के मुताबिक हेमंत के साथ आदिवासी वोट का जाता है तो इसका सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है. अब तक माना जाता है कि असम में आदिवासी का एक मुस्त वोट कांग्रेस को जाता है लेकिन जब झामुमो ने इसमें सेंधमारी कर ली तो फिर कांग्रेस के लिए यह मुश्किल भरा चुनाव हो सकता है.                                     


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