अलविदा टाइगर! पंचतत्व में विलीन हुआ जगरनाथ महतो का पार्थिव शरीर, किसी ने खोया बेटा, तो किसी ने अपना हौसला, देखिये यह रिपोर्ट

    अलविदा टाइगर!  पंचतत्व में विलीन हुआ जगरनाथ महतो का पार्थिव शरीर,  किसी ने खोया बेटा, तो किसी ने अपना हौसला, देखिये यह रिपोर्ट

    रांची- पूरे राजकीय सम्मान के साथ पूर्व शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो के पार्थिव शरीर का आज अंतिम संस्कार कर दिया गया, इधर घड़ी की सुइयां शाम के छह बजकर चालीस मिनट की ओर इशारा कर रही थी, उधर उनका पार्थिव शरीर पंच तत्व में विलीन हो रहा था, आग की उठती लपटों के साथ लोगों की उम्मीदें भी टूट रही है, शायद ही कोई ऐसा चेहरा हो, जिसकी आंखों में आज आंसू नहीं हो.

    अजीब सा मंजर, उदार चेहरे

    एक अजीब का मंजर था, जगरनाथ महतो अमर रहे के नारे के बीच भी एक अजीब सा सन्नाटा पसरा था. आंखों में आंसू, चेहरे पर उदासी और जुबान पर एक ही चर्चा अब कौन लड़ेगा उनकी  लड़ाई, कौन होगा अब आम लोगों का पैरोकार. उलझती राजनीति के इस बेसुरे दौर में अब कौन उठायेगा आदिवासी-मूलवासियों की आवाज? कहीं 1932 की यह लड़ाई अधूरी तो नहीं रह जायेगी, कहीं झारखंडी युवाओं का सपना अधूरा तो नहीं रह जायेगा, और सबसे बड़ा सवाल अब वह कौन होगा, जो इन युवाओं को यह विश्वास दिलायेगा कि इधर उधऱ मत देखो, हम तुम्हारे साथ है, हम तुम्हारा ही सपना जीते हैं, हम तुम्हारी ही आवाज है, भाषा भले ही बदली है, रणनीतियां अलग हो सकती है, लेकिन मकसद एक है, हम आदिवासी-मूलवासियों के सवाल पर, इस राज्य की अस्मिता के सवाल पर, आम झारखंडियों के हक और हुकूक के सवाल पर कभी कोई समझौता नहीं करने वाले.  

    भंडारडीह से लेकर फूसरों तक की सभी दूकानें बंद

    शायद यही कारण है कि स्वत: स्फूर्त ढंग से आज भंडारडीह से लेकर फूसरों तक की सभी दूकानें बंद रही. उधर उनके गांव अलारगो में पूरा झारखंड ही उतर गया, सीएम हेमंत से लेकर विधान सभा अध्यक्ष रविन्द्रनाथ महतो, अनुप सिंह, निर्दलीय विधायक अमित यादव, बिरंची नारायण, बादल पत्रलेख सभी अलारगो पहुंचे. सीएम हेमंत ने उनके परिजनों को इस विपदा की घड़ी में हौसला बढ़ाया, इस बात का विश्वास दिलाया कि सरकार उनके साथ है.

    जिंदगी बड़ी छोटी है और लड़ाई उतनी ही लम्बी 

    इस बीच जगरनाथ महतो के ट्विटर अकाउंट से उनका अंतिम ट्विट आया, मेरा झारखंड आबाद रहे, यह एक शब्द हर झारखंडी को झकझोर गया. निसदेंह, टाइगर जगरनाथ महतो का जीवन संदेश यही था. पूरी जिंदगी उन्होंने झारखंड पे कुर्बान कर दिया, लम्बी बीमारी के बाद भी जब उनके शुभचिंतक आराम करने की सलाह देते, तब वह बडे ही प्यार से मुस्करा कर शांत हो जाते, जैसे कह रहे हो कि जिंदगी बड़ी छोटी है, और यह लड़ाई उतनी ही लम्बी. फिर आराम की बात कहां से आती है, हर पल हर क्षण झारखंड को संवारने की कोशिश, लेकिन आज वह मुस्कराता चेहरा अलविदा कह गया, अलविदा टाइगर!



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