धनबाद(DHANBAD): पश्चिम बंगाल में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद झारखंड के भाजपाइयों में भी उत्साह है. वैसे, शनिवार को बंगाल के शपथ ग्रहण समारोह में झारखंड बीजेपी की भारी भरकम टीम शिरकत करेगी। जानकारी के अनुसार झारखंड के चार पूर्व मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगें। इसके अलावे प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू भी शामिल रहेंगे। यह पूर्व सीएम होंगें बाबूलाल मरांडी ,अर्जुन मुंडा ,रघुवर दास और चंपाई सोरेन। बंगाल विधानसभा के चुनाव प्रचार में झारखंड के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी बड़ी भूमिका निभाई थी. गृह मंत्री अमित शाह ने भी बंगाल में मिली जीत के लिए झारखंड बीजेपी के नेताओं की सराहना की है.
झारखंड के चारो तरफ भाजपा का शासन हो गया
दरअसल, झारखंड को चारों तरफ से घेरे बिहार, ओडिशा , बंगाल और छत्तीसगढ़ में अब भाजपा की सरकार हो जाएगी. झारखंड विधानसभा चुनाव में भी बंगाल के भाजपा नेताओं ने प्रचार किया था. दरअसल, बंगाल जीत के बाद भाजपा का जोश चरम पर है. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की धरती पर पहली बार भगवा फहराया है. यह जीत बड़ी जीत कहीं जा रही है. उत्तराखंड की गंगोत्री से गंगासागर तक भाजपा के विजय रथ में झारखंड ही एक ऐसा राज्य है, जहां भाजपा का शासन नहीं है. बता दें कि पूर्वी भारत के महत्वपूर्ण राज्य पश्चिम बंगाल में भाजपा की लालसा पूरी हो गई है. भाजपा पूरी तरह से गदगद है.
बंगाल जीत के बाद झारखंड भाजपा का भी जोश हाई
बंगाल जीत के बाद भाजपा कह रही है कि गंगोत्री से गंगासागर तक पार्टी की सियासी यात्रा अब पूरी हो गई है. वैसे लोगों का कहना है कि झारखंड अभी इसमें पेंच फंसा कर रखे हुए है. सभी जानते हैं कि उत्तराखंड की गंगोत्री से निकलकर जो गंगा बंगाल में गंगासागर में मिलती है, वह झारखंड होकर जाती है. इसलिए अभी झारखंड को जीते बिना भाजपा की यह यात्रा पूरी नहीं कही जा सकती है. झारखंड के साहिबगंज से गंगा बहती है और वह गंगासागर में जाकर मिल जाती है.झारखंड के संथालपरगना में भाजपा की पकड़ मजबूत नहीं कहीं जा सकती है.
झारखंड के संथाल परगना में भाजपा मजबूत नहीं
विधानसभा चुनाव में भाजपा संथालपरगना की सीटों पर जोर तो लगाई , लेकिन जीत नहीं सकी। यह अलग बात है कि बंगाल के आदिवासी बहुल सीट पर भाजपा की जीत हुई है. लेकिन संथालपरगना में आदिवासी सीट पर भाजपा कब्जा नहीं कर पाई है. यह अलग बात है कि ममता बनर्जी ने 2011 में 34 वर्षों के कम्युनिस्ट शासन को उखाड़ फेंका था. उस समय ममता बनर्जी ने मां, माटी और मानुष का नारा देकर सत्ता में आई थी. जानकार बताते हैं कि झारखंड का संथाल परगना जनजाति बहुत क्षेत्र है. बंगाल और संथाल परगना की जनजातियों में काफी समानताएं भी हैं. सामाजिक ,आर्थिक और सांस्कृतिक जुड़ाव भी है. इसके बाद भी फिलहाल राजनीतिक भिन्नता है.

