Explainer: बजट पेश होते ही धड़ाम से गिरा सेंसेक्स, जानिए बाजार की उम्मीदें क्यों टूटीं और निवेशक क्यों हुए सतर्क

    Explainer: बजट पेश होते ही धड़ाम से गिरा सेंसेक्स, जानिए बाजार की उम्मीदें क्यों टूटीं और निवेशक क्यों हुए सतर्क

    TNP DESK- केंद्रीय बजट को शेयर बाजार के लिए दिशा तय करने वाला सबसे अहम आर्थिक दस्तावेज माना जाता है. निवेशक और कारोबारी बजट से नीतिगत संकेत, टैक्स राहत और विकास से जुड़ी ठोस घोषणाओं की उम्मीद करते हैं. लेकिन कई बार ऐसा देखा जाता है कि बजट पेश होते ही बाजार में तेजी की जगह गिरावट देखने को मिलती है. इस बार भी बजट भाषण के तुरंत बाद सेंसेक्स लाल निशान में चला गया. सवाल यह है कि आखिर बजट के बाद बाजार क्यों फिसल गया.

    इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण उम्मीदों और वास्तविक घोषणाओं के बीच का अंतर रहा. बजट से पहले बाजार में यह धारणा बन चुकी थी कि सरकार व्यक्तिगत आयकर में बड़ी राहत दे सकती है और कैपिटल गेन टैक्स को लेकर कुछ नरमी दिखाएगी. साथ ही कॉरपोरेट सेक्टर को अतिरिक्त टैक्स इंसेंटिव मिलने की भी उम्मीद थी. जब बजट में ऐसी बड़ी राहत नहीं दिखी, तो निवेशकों ने निराश होकर मुनाफावसूली शुरू कर दी.

    दूसरा महत्वपूर्ण कारण राजकोषीय अनुशासन पर सरकार का जोर रहा. सरकार ने स्पष्ट किया कि वह फिस्कल डेफिसिट को नियंत्रण में रखने की नीति पर कायम रहेगी. इसका मतलब यह है कि खर्च और राहत के बीच संतुलन बनाए रखा जाएगा. बाजार का एक वर्ग चाहता था कि सरकार विकास को तेज करने के लिए ज्यादा आक्रामक खर्च करे. सतर्क रुख ने शॉर्ट टर्म निवेशकों को निराश किया.

    तीसरा कारण सेक्टर आधारित प्रतिक्रिया रही. इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर और बायो-फार्मा जैसे क्षेत्रों के लिए बजट में दीर्घकालिक योजनाओं की घोषणा जरूर हुई, लेकिन इनका फायदा तुरंत दिखाई देने वाला नहीं है. इसके उलट बैंकिंग, आईटी और एफएमसीजी जैसे बड़े वेटेज वाले सेक्टरों को बजट से कोई तात्कालिक बड़ा ट्रिगर नहीं मिला. नतीजतन, इन शेयरों में बिकवाली का दबाव बना.

    चौथा पहलू वैश्विक बाजारों की अनिश्चितता से जुड़ा है. बजट के दिन अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अस्थिरता का माहौल था. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की कीमतें और जियोपॉलिटिकल तनाव जैसे कारकों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को सीमित कर दिया. ऐसे में घरेलू बजट का सकारात्मक संदेश भी बाजार को सहारा नहीं दे सका.

    इसके अलावा, बजट से पहले आई प्री-बजट रैली भी गिरावट की एक बड़ी वजह बनी. अच्छे बजट की उम्मीद में कई शेयर पहले ही चढ़ चुके थे. बजट आते ही निवेशकों ने ‘खरीदो अफवाह पर, बेचो खबर पर’ की रणनीति अपनाई और मुनाफा बुक करना शुरू कर दिया.

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बजट के तुरंत बाद की गिरावट को नकारात्मक संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, एमएसएमई, मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों पर दिया गया जोर अर्थव्यवस्था को मध्यम और दीर्घकाल में मजबूती देगा. ऐसे में सेंसेक्स की मौजूदा गिरावट अल्पकालिक है, जबकि बजट का वास्तविक असर आने वाले महीनों में धीरे-धीरे सामने आएगा.


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