पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक रांची में, विकास और विवाद दोनों पर केंद्रित रहेगी चर्चा

    पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक रांची में, विकास और विवाद दोनों पर केंद्रित रहेगी चर्चा

    रांची (RANCHI ) : झारखंड की राजधानी रांची में आज आयोजित हो रही पूर्वी क्षेत्रीय परिषद (Eastern Zonal Council) की बैठक कई अहम मुद्दों को लेकर चर्चा का केंद्र बनी हुई है. बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कर रहे हैं. इसमें झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा और सम्राट चौधरी, पश्चिम बंगाल और ओडिशा सरकार के मंत्री तथा मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी शामिल हुए हैं.

    पूर्वी क्षेत्रीय परिषद भारत सरकार की एक संवैधानिक व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य राज्यों और केंद्र के बीच आपसी समन्वय को बढ़ाना, क्षेत्रीय विकास की चुनौतियों पर साझा समाधान निकालना और अंतर-राज्यीय मुद्दों को सुलझाना होता है.

    परिषद में शामिल राज्य हैं: 

    झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा.

    कुल 18 प्रमुख एजेंडों पर होगी चर्चा

    इस बार की बैठक में कुल 18 प्रमुख एजेंडों पर विचार-विमर्श किया जाना है. जिन मुद्दों पर विशेष ध्यान रहेगा, उनमें विकास योजनाओं की प्रगति, सीमा विवाद, आंतरिक सुरक्षा, नक्सल समस्या, अंतर-राज्यीय संपर्क मार्ग, बिजली वितरण व्यवस्था, जल प्रबंधन, श्रमिकों के पलायन, और कृषि क्षेत्र में समन्वय जैसे विषय प्रमुख हैं.

    नक्सल समस्या इस बैठक का एक अहम फोकस है. झारखंड, बिहार और ओडिशा के कई जिले नक्सल प्रभावित हैं, जहां केंद्र और राज्यों द्वारा संयुक्त अभियान चलाए जा रहे हैं। बैठक में इन अभियानों की समीक्षा, संसाधनों की जरूरत और स्थानीय स्तर पर विकास को तेज़ करने की रणनीति पर चर्चा की जाएगी, जिससे युवाओं को हिंसा की ओर जाने से रोका जा सके.

    इसके अलावा, अंतर-राज्यीय सीमा विवाद, खासकर झारखंड-बिहार और झारखंड-पश्चिम बंगाल की सीमाओं को लेकर उपजने वाले प्रशासनिक टकराव और ग्रामीण समस्याओं को सुलझाने के लिए एक ठोस संवाद की उम्मीद है. बैठक में इन विवादों को शांतिपूर्वक हल करने के प्रयासों पर सहमति बनाई जा सकती है.

    प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, रेल और सड़क कनेक्टिविटी, डिजिटल कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, और शिक्षा क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण जैसे विषयों पर भी विमर्श किया जाएगा. खासतौर पर सीमावर्ती और आदिवासी क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने की दिशा में राज्य सरकारों और केंद्र के बीच तालमेल ज़रूरी है.

    बैठक में यह भी प्रयास होगा कि राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा नहीं, सहयोग का वातावरण बने.सभी राज्य अपनी-अपनी विकास प्राथमिकताओं को साझा करेंगे और सफल योजनाओं को एक-दूसरे के साथ साझा कर उनके क्रियान्वयन की दिशा में मिलकर काम करेंगे.

    पूर्वी भारत के समावेशी विकास के लिए यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है. उम्मीद की जा रही है कि यह बैठक केवल चर्चा तक सीमित न रहकर, ठोस निर्णय और योजनाओं को ज़मीन पर उतारने की दिशा में कारगर साबित होगी.

     


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