दुमका भी रहा है अयोध्या राम मंदिर आंदोलन का साक्षी! मसानजोर से जुड़ा है राम मंदिर निर्माण का तार, पढ़ें क्यों आज विदेशी मीडिया की सुर्खियां बना है मसानजोर

    दुमका भी रहा है अयोध्या राम मंदिर आंदोलन का साक्षी! मसानजोर से जुड़ा है राम मंदिर निर्माण का तार, पढ़ें क्यों आज विदेशी मीडिया की सुर्खियां बना है मसानजोर

    दुमका(DUMKA):22 जनवरी 2024 एक ऐतिहासिक दिन होने वाला है. इस दिन अयोध्या में नवनिर्मित मंदिर में रामलला की प्रतिमा स्थापित की जाएगी. इसकी तैयारी जोर-शोर से चल रही है. पूरे देश मे उत्सवी माहौल है. बीजेपी कार्यकर्ताओं की ओर से घर घर जाकर अक्षत और निमंत्रण पत्र का वितरण किया जा रहा है, लेकिन आज हम आपको बता रहे है कि दुमका के मसानजोर का तार कैसे राम मंदिर निर्माण से जुड़ा है.

    मसानजोर से जुड़ा है राम मंदिर निर्माण का तार

    आपको बताये कि राम मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन का इतिहास काफी पुराना है, लेकिन यह गति तब पकड़ी जब बीजेपी ने इसे हवा दी और यह जन आंदोलन बना. लगभग 33 वर्ष पहले बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर रथ यात्रा निकाली थी. 25 सितंबर 1990 को सोमनाथ से निकली यह रथ यात्रा विभिन्न प्रदेशों से गुजरते हुए 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या पहुंचनी थी, उत्तर प्रदेश से रथ ने बिहार की सीमा में प्रवेश किया. 22 अक्टूबर को पटना के गांधी मैदान में सभा हुई, उसके बाद रथ समस्तीपुर के लिए रवाना हो गया.लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे. उन्होंने आडवाणी को गिरफ्तार करने का निर्णय लिया.23 अक्टूबर की समस्तीपुर में लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया गया.

    गिरफ्तारी के बाद उन्हें दुमका लाया गया और दुमका जिला मुख्यालय से महज 30 किलोमीटर दूर मसानजोर स्थित जल संसाधन विभाग के गेस्ट हाउस में नजरबंद कर उन्हें रखा गया. उनके साथ प्रमोद महाजन को भी गेस्ट हाउस में रखा गया. यह खबर देश ही नहीं विदेशी मीडिया की भी सुर्खियां बनी और देखते ही देखते मसानजोर विश्व पटल पर छा गया.

    लोगों को खुशी है कि राम मंदिर के लिए शुरू हुए आंदोलन का गवाह दुमका भी रहा है

     स्थानीय निवासी अशोक कुमार मुर्मू उन दिनों को याद कर बताते हैं कि गेस्ट हाउस के कमरा नम्बर 4 में लालकृष्ण आडवाणी और 3 में प्रमोद महाजन को रखा गया था. मसानजोर जाने वाली तमाम रास्ते को बंद कर दिया गया. कर्फ्यू का माहौल था. लोग डरे सहमे थे. सुरक्षा व्यवस्था ऐसी की परिंदा भी पर ना मार सके.अशोक बताते है कि आज भी जब पर्यटक मसानजोर डैम घूमने आते है तो प्राकृतिक दृश्यों के अवलोकन के बाद गेस्ट हाउस का दीदार करना नहीं भूलते.अब जबकि 22 जनवरी को अयोध्या के नवनिर्मित मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न होगी, तो दुमकावासियों के उत्साह चरम पर देखने को मिल रहा है. लोगों को इस बात की खुशी है कि राम मंदिर के लिए शुरू हुए आंदोलन का गबाह दुमका भी रहा है.

    रिपोर्ट-पंचम झा


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