निगम चुनाव:पूर्व विधायक संजीव सिंह के मैदान में डटे रहने से भाजपा में खलबली,आज कुछ ऐसे होगी मनाने की अंतिम कोशिश!


धनबाद: निकाय चुनाव में पार्टियों का अनुशासन तार तार होता दिख रहा है. झारखंड की राजनीतिक पार्टियां चली थी उम्मीदवार तय करने, लेकिन इस प्रयास में पार्टियों का अनुशासन ही टूट-फूट कर बिखर गया है.
हर जगह बागी उम्मीदवार मैदान में डटे हुए हैं. शुक्रवार को नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि थी. पार्टियों को भरोसा था कि जिला स्तर पर जो व्यवस्था की गई है, उसके अनुसार बागी उम्मीदवार नामांकन वापस ले लेंगे. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.
झारखंड में वैसे तो मा न गो,मेदिनीपुर, देवघर सहित अन्य जगहों की चर्चा है, लेकिन धनबाद की चर्चा संगठन से लेकर नेताओं तक खूब हो रही है. धनबाद में निगम चुनाव का खेल कुछ उलट-पुलट सा हो गया है. कई बागी मैदान में है. उन बागियों को मनाना मुश्किल हो गया है. आज तो चुनाव चिन्ह आवंटित हो जाएगा.
इधर, बड़ी सूचना यह मिल रही है कि भाजपा के संगठन महामंत्री कर्मवीर शनिवार को धनबाद पहुंच रहे हैं. कहने को तो भाजपा कार्यालय में पार्टी समर्थित प्रत्याशी संजीव अग्रवाल के लिए पदाधिकारियो के साथ बैठक करेंगे. चुनाव जीतने का मंत्र देंगे. यह जानेंगे कि आखिर बागी उम्मीदवारों को मैदान से हटाने में जिला स्तरीय नेता क्यों सफल नहीं हुए?
लेकिन अंदर खाने जो खबरें छनकर निकल रही है, उसके अनुसार संगठन महामंत्री के आने का एकमात्र उद्देश्य बागी उम्मीदवारों से बात करना, उन्हें समझना और उन्हें मैदान से हटाना होगा. लेकिन यह काम बहुत आसान नहीं होगा.
वैसे भी, शनिवार को सभी उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया जाएगा. उसके बाद सिर्फ वह मीडिया के सामने आकर ही घोषणा कर सकेंगे कि वह चुनाव मैदान से हट गए हैं. चुनाव चिन्ह तो उनको आवंटित हो ही जाएगा. क्योंकि शुक्रवार को नाम वापस लेने की अंतिम तिथि थी. समय 3:00 बजे अपराह्न तक निर्धारित था. लेकिन धनबाद में मेयर पद के 30 उम्मीदवारों में से सिर्फ एक डॉक्टर नीलम मिश्रा ने अपनी उम्मीदवारी वापस ली. बाकी किसी ने अपनी उम्मीदवारी वापस नहीं ली.
ऐसे में धनबाद में मेयर पद के 29 उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह आवंटित किया जाएगा. यह अलग बात है कि धनबाद में भाजपा नेता पार्टी समर्थित प्रत्याशी संजीव अग्रवाल के पक्ष में काम शुरू कर दिए हैं. लेकिन कहीं ना कहीं गुटबाजी की आहट सुनाई दे रही है.
वैसे भी धनबाद के पूर्व मेयर शेखर अग्रवाल भाजपा से जुड़े हुए थे. जब पार्टी ने उन्हें समर्थित उम्मीदवार घोषित नहीं किया तो वह झामुमो में चले गए और मैदान में डटे हुए हैं .उन्हीं के पक्ष में झामुमो की नीलम मिश्रा ने उम्मीदवारी वापस ली है. यह अलग बात है कि शेखर अग्रवाल झामुमो के समर्थित उम्मीदवार हैं तो कांग्रेस ने भी धनबाद में अपना समर्थन शमशेर आलम को दिया है.
मतलब धनबाद में झामुमो और कांग्रेस चुनाव में टकराएंगे. लेकिन सबकी नजर झरिया के पूर्व भाजपा विधायक संजीव सिंह पर टिकी हुई है. भाजपा ने अभी भी आस नहीं छोड़ा है. और शायद संगठन महामंत्री संजीव सिंह सहित अन्य वागियों से बात करेंगे. उन्हें मनाने की कोशिश करेंगे. लेकिन इसका नतीजा क्या निकलेगा, यह देखने के लिए प्रतीक्षा करनी होगी.
रिपोर्ट धनबाद ब्यूरो
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