धनबाद (DHANBAD): धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो के खिलाफ एक और जांच की शुरुआत हुई है. यह जांच ट्रेन की महिला बोगी में चढ़ने को लेकर है. दरअसल, सांसद ढुल्लू महतो का विवादों से नाता छूट नहीं रहा है. वह चाहते तो हैं कि किसी विवाद में नहीं पड़े, लेकिन विवाद है कि उन्हें छोड़ने को तैयार ही नहीं है. दरअसल, धनबाद से मुंबई के लिए 6 अप्रैल को जिस ट्रेन का उद्घाटन हुआ था, वह ट्रेन कई विवादों को जन्म दे गई है. एक तरफ विवादों से रेल अधिकारी घिरे हुए हैं, उनकी घिग्घी बंधी हुई है, तो दूसरी ओर इस ट्रेन के उद्घाटन के मामले को लेकर सांसद ढुल्लू महतो के खिलाफ जांच भी शुरू होने की बात कही जा रही है.
सांसद के कतरास तक जाने में क्या हो गया
6 अप्रैल को धनबाद से मुंबई के बीच चलने वाली ट्रेन का सांसद ढुल्लू महतो ने हरी झंडी दिखाकर धनबाद से रवाना किया था. यह अलग बात है कि इस ट्रेन ने एक अलग विवाद खड़ा किया है, जिसकी चर्चा हम नीचे करेंगे. धनबाद से ट्रेन खुलने पर सांसद अपने समर्थको और अंगरक्षकों के साथ कतरास तक गए. ट्रेन के इंजन के ठीक पीछे महिला बोगी थी. सांसद ढुल्लू महतो इसी बोगी पर सवार हो गए. उसके बाद तो सोशल मीडिया पर सवाल खड़े किए जाने लगे. उसके बाद आरपीएफ ने इस मामले में जांच शुरू की है. कहा है कि किस परिस्थिति में वह महिला कोच में चढ़े, इसकी जांच हो रही है.
कतरास के अशोक प्रकाश लाल ने की है शिकायत
दरअसल, कतरास के ही अशोक प्रकाश लाल ने एक्स पर शिकायत की और कहा कि फोटो खिंचवाने की आपाधापी में धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो यह तक भूल गए कि वह महिलाओं के लिए आरक्षित डब्बे में सफर कर रहे हैं. क्या रेल मंत्री भारतीय रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 162 के अनुसार कोई कानूनी कार्रवाई करेंगे? इसी पोस्ट के बाद हलचल तेज हुई और जांच शुरू की गई है. 6 अप्रैल को इस ट्रेन के उद्घाटन ने रेलवे के अधिकारियों को भी उलझा दिया है .
ट्रेन के उद्घाटन कार्यक्रम कई विवादों को जन्म दे गया
वजह यह हुई कि उद्घाटन कार्यक्रम में धनबाद के मेयर और झरिया की विधायक को पहले तो आमंत्रित किया गया, फिर कार्यक्रम शुरू होने के कुछ घंटे पहले उन्हें आने से मना कर दिया गया. यहां तक की बैनर को भी बदल दिया गया और संजीव सिंह तथा रागिनी सिंह के नाम हटा दिए गए. इसके बाद तो बवाल मच गया. आरोप लगे कि सांसद ढुल्लू महतो के दबाव में रेल अधिकारियों ने ऐसा किया. हालांकि रेल अधिकारियों ने इस मामले का पटाक्षेप कराने के लिए सिंह मेंशन में जाकर संजीव सिंह और रागिनी सिंह के मुलाकात भी की. लेकिन मामला अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है. दूसरी ओर अन्य जन प्रतिनिधि भी इस बात को स्वीकार करने को तैयार नहीं है कि आखिर रेलवे को ऐसा करने की छूट किसने दी?
रिपोर्ट - धनबाद ब्यूरो
Thenewspost - Jharkhand
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