ईको फ्रेंडली राखी पौधा का रूप लेकर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का बन जाएगा गवाह, जानिए कैसे

    ईको फ्रेंडली राखी पौधा का रूप लेकर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का बन जाएगा गवाह, जानिए कैसे

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): राखी का त्योहार आ गया है. रंग बिरंगी राखियों से बाजार भी गुलजार है. लेकिन डिजाइनर राखियों के बीच ईको फ्रेंडली राखियां भी लोगों को भा रही है. वहीं इस बार गाय के गोबर से राखी बनाई गयी है. गाय के गोबर से बनी राखी अमेरिका और मॉरीशस के बाजारों में भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. इस साल अमेरिका और मॉरीशस में रहनेवाली भारतीय बहनें अपने भाइयों की कलाई पर जैविक गाय के गोबर की बनी राखी बांधेंगी. सोशल मीडिया पर गोबर से बनी राखी चर्चा का विषय बना हुआ है. इन राखियों को जयपुर में तैयार किया गया है. करीब 60 हजार गोबर से बनी राखियों को अमेरिका और मॉरीशस भेजा गया है. 

    भारतीय संस्कृति में गाय के गोबर का काफी महत्व है. हर शुभ काम में गाय के गोबर का इस्तेमाल किया जाता है. वहीं कच्चा धागा से बना रक्षासूत्र भाई बहन के प्यार का प्रतीक होता है. ऐसे में जब पंचद्रव्य में शामिल गोबर और कच्चा धागा एक साथ मिल जाये तो उसका महत्व और बढ़ जाता है. वहीं ये राखी पूरी तरह से ईको  फ्रेंडली और ऑर्गेनिक होगी. यानि राखी के बाद भाई इस राखी को इधर-उधर उतार कर रखने के बजाय अपने घर के गमले में डाल सकते हैं. क्यूंकि गोबर से बनी राखियों में तुलसी, अश्वगंधा, समेत अन्य बीच डाले गए हैं. इसलिए राखी को इधर उधर फेंकने के स्थान पर अगर गमले में डाल दिया जाये तो ये एक पौधे का रूप ले सकता है. जो पौधा बड़ा होकर भाई बहन के पवित्र रिश्ते का गवाह बनेगा. 

    रक्षाबंधन का महत्व

    रक्षाबंधन हर साल सावन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है. इस वर्ष इस त्योहार को लेकर लोगों के बीच थोड़ा कन्फ्यूजन है. कुछ लोग 11 अगस्त को राखी का त्यौहार मना रहे हैं तो वहीं  कुछ 12 अगस्त को रक्षाबंधन का मनाएंगे.  यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते की अटूट डोर का प्रतीक माना जाता है.  इस दिन भाई अपने बहन के सभी दायित्वों को निभाने का वचन लेते हैं, तो बहन भी भगवान से अपने भाई की लम्बी उम्र की कामना करती हैं.


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