टीएनपी डेस्क (TNP DESK): देश की राजनीति में शुक्रवार का दिन आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए भारी उथल-पुथल लेकर आया. पार्टी के भीतर अचानक आई दरार अब खुलकर सामने आ गई है. पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल राघव चड्ढा ने इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है. उनके साथ संदीप पाठक और अशोक कुमार मित्तल ने भी पार्टी छोड़ दी है, जिससे AAP में बड़ी टूट की तस्वीर साफ हो गई है.
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राघव चड्ढा ने दावा किया है कि कुल 10 में से 7 सांसद उनके साथ हैं. अगर यह दावा सही साबित होता है, तो दल-बदल कानून के दायरे से बचते हुए राज्यसभा में AAP का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है. इससे पार्टी का संसदीय ढांचा लगभग बिखरने की स्थिति में पहुंच जाएगा. यह घटनाक्रम सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने वर्षों तक मेहनत से खड़ा किया, वह अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है. उनके मुताबिक, AAP अब जनहित की बजाय निजी हितों को प्राथमिकता देने लगी है. चड्ढा ने खुद को “गलत पार्टी में सही व्यक्ति” बताते हुए यह संकेत दिया कि पार्टी के भीतर लंबे समय से असंतोष पनप रहा था.
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि जिन अन्य सांसदों के नाम सामने आ रहे हैं, उनमें हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेश गुप्ता शामिल हैं. हालांकि इन नेताओं की ओर से आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन सियासी हलचल तेज हो गई है.
इस घटनाक्रम का असर न केवल संसद में AAP की स्थिति पर पड़ेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर भी पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हो सकता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अरविंद केजरीवाल इस संकट से पार्टी को उबार पाएंगे या AAP को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा. फिलहाल, आने वाले दिनों में इस सियासी घमासान के और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं.


