‘’पत्रकारों का नहीं कांग्रेस का करें बहिष्कार’’, बीजेपी ने तंज कसते हुए बोला कि मोहब्बत की बात करने वाले नफरत बेचते हैं

    ‘’पत्रकारों का नहीं कांग्रेस का करें बहिष्कार’’, बीजेपी ने तंज कसते हुए बोला कि मोहब्बत की बात करने वाले नफरत बेचते हैं

    टीएनपी डेस्क (Tnp desk):-लोकसभा चुनाव की सुगबुगहाट के साथ-साथ कुछ अजीबो-गरीब फैसले और फरमान के चलते भी लगता है कि दिल्ली के तख्त हासिल करने की जंग में कई रंग और बेलौस बाते देखने को मिलेंगी. भगवा पार्टी को टक्कर देने और दो-दो हाथ करने के लिए I.N.D.I.A गठबंधन बेताब तो दिखाई पड़ रहा है. लेकिन, इसके साथ ही अपने तरकश के तीर को तेज और मारक भी बना रही हैं, ताकि कोई भी वार और निशाना खाली न जाए. गुरुवार को मीडिया के कुछ चुनिंदा एंकर्स के शो के बहिष्कार करने के फैसले के बाद सियासत में भी बंवडर मच गया. इस एलान में ये था कि इंडिया में शामिल दल के प्रवक्ता या नेता उन एंकर्स के शो में भाग नहीं लेंगे. जो सत्ता से सट कर गोदी मीडिया की तरह काम कर रहे औऱ हिन्दु-मुस्लिम कर नफरत की दुकान सजाकर अपने मकसद से भटक गये हैं. इसी के देखते हुए इंडिया ने 14 एंकर्स को दरकिनार करने का एलान किया है.हालांकि, ये एंकर्स टीवी के चर्चित चेहरे हैं, जिन्हें देश के बड़ी संख्या में हिंदी पट्टी के लोग सुनते और देखते है. इस नजरअंदाजी से खुद एंकर्स तो खफा होकर तिलमिलाएं हुए हैं. और अपने-अपने विचार भी एक्स एकाउंट से साझा कर रहे हैं. इस कठीन वक्त में इन ब्लेकलिस्टेड एंकर्स को साथ एनडीए का मिल रहा है. भाजपा पूरी तौर पर बचाव में उतर गई है औऱ इंडिया पर तोहमते जड़कर, इतिहास की याद दिला रही है. बीजेपी सवाल खड़े करते हुए इंदिरा के आपातकाल, नेहरू और राजीव के जमाने के वक्त मीडिया का क्या हाल रहा, उसकी याद दिला रही है.

    क्या बोले बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा

    कांग्रेस पर तल्ख तेवर रखने वाले बीजेपी के फायरब्रांड प्रवक्ता संबित पात्रा भी इस फैसले से नाराज दिखाई पड़े. उनका कहना था कि इनके बहिष्कार से कुछ ज्यादा फायदा कांग्रेस पार्टी को नहीं होने वाला है, बल्कि, कांग्रेस पार्टी को राहुल गांधी को बायकॉट करने से बात बनेगी. वे इतना से ही नहीं रुक, उन्होंने राहुल के मोहब्बत की दुकान वाले जुमले पर भी करारा तंज कस डाला. उनका दावा था कि मोहब्बत की दुकान सजाने वाले नेता नफरत बेच रहें हैं.   

    सैफुद्दीन सोज और फारूक अब्दुल्ला का करें बहिष्कार

    संबित पत्रा का कहना था कि आईएनडीआइए को इन पत्रकारों का विरोध करने की बजाए कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज औऱ नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारुक अब्दुल्ला का बहिष्कार करना चाहिए. जो आज भी पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत करते दिखाई पड़ रहे हैं. उनका कहना था कि इन नेताओं की  टिप्पणी तब सामने आयी जब कश्मीर में हमारे सेना के अफसर देश की हिफाजत के लिए आतंकियों से लड़ते-लड़ते शहीद हो गये. भाजपा प्रवक्ता ने सैफुद्दीन सोज के उस बयान को दर्दनाक और दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया, जो केन्द्र सरकार से आतंकियों के दिमाग को समझने की नसीहत दे रहे थे.

    इंदिरा के आपताकाल की दिलायी याद

    इंडिया गठबंधन के प्रहार करते हुए संबित ने कहा कि कांग्रेस का तो मीडिया पर निशाना बनाने का इतिहास ही रहा है. उन्होंने शिद्दत से इंदिरा गांधी के आपातकाल की याद दिलायी, जिसमे पत्रकारों की कलम पर पाबंदी लगाने की कोशिश की गई थी. इसके साथ ही पंडित जवाहरलाल नेहरु के जमाने को भी याद दिलाया, जब उनकी ओर से पहला संशोधन लाया गया था. भाजपा प्रवक्ता ने राजीव गांधी के द्वारा प्रस्तावित मानहानि कानून का भी हवाला देकर कांग्रेस को जोरदार तरीके से घेरने में कसर बाकी नहीं रखी.


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