सियासत में अपने फैसले से हमेशा चौकाती रही है बीजेपी, क्या इसबार भी किसी नये चेहरे को बनायेगी मुख्यमंत्री ?

    सियासत में अपने फैसले से हमेशा चौकाती रही है बीजेपी, क्या इसबार भी किसी नये चेहरे को बनायेगी मुख्यमंत्री ?

    टीएनपी डेस्क(Tnp desk):-भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कमल खिला दिया , इस जीत से गदगद बीजेपी को एक नई ताकत, जोश औऱ ऊर्जा मिली है. आगामी लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करने की उम्मीदें और भरोसा भी जगा. अब विजय पताका फहराने के बाद मौजूदा वक्त में सीएम की रेस  में कई नामों की चर्चा तेज है. सवाल हर जगह यही छिड़ा हुआ है कि आखिर किसे बनाया जाएगा मुख्यमंत्री, क्या कोई नये चेहरा होगा या फिर पुराने पर ही दांव लगाया जाएगा. ऐसी तमाम तरह की अटकलों से चर्चा औऱ कयासों का बाजार गर्म है.

    बिना सीएम चेहरे के चुनाव लड़ी बीजेपी

    राजस्थान , मध्यप्रदेश औऱ छत्तीसगढ़ में भाजपा ने बिना चेहरे के विधानसभा चुनाव लडा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम को आगे रखकर जनता से वोट मांगा गया. इसके चलते बात ये भी निकली की आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर ऐसा किया गया . वही दूसूरी चर्चा और गपशप हो रही है कि भारतीय जनता पार्टी प्रदेश पुराने नेतृत्व को हटाकर किसी नये चेहरे को मौका देगी. ऐसे बीजेपी पहले भी कर चुकी है. औऱ आगे भी ऐसा करेगी तो कोई आश्चर्य नहीं होगा. सवाल ये है कि आखिर बीजेपी आलाकमान, पीएम मोदी और अमित शाह के मन में क्या चल रहा है. क्या नये अनजान या नये चेहरे को राज्य का मुख्यमंत्री बनायेगी. क्योंकि पिछले कई मौके पर ऐसा कर चुकी है

    नये चेहरे को मौका देती है बीजेपी

    भारतीय जनता पार्टी ने कई मौकों पर नये नाम को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा दिया. जिसका दूर-दूर तक कहीं नामों निशान नहीं था. उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ एक उदाहरण है. हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, असम के हेमंत कुमार बिस्वा और गुजरात के भूपेन्द्र भाई पटेल उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी और झारखंड में रघुवर दास को मुख्यमंत्री बनाना इसके उदाहऱण हैं. बीजेपी के अंदर आतंरिक लोकतंत्र की जड़े मजबूत दिखती है. इसके चलते ही यहां किसी को भी कभी भी मौका मिल सकता है. जबकि, अन्य पार्टियों में ये काफी कम देखने को मिलता है. अन्य पार्टियों की तुलाना में बीजेपी अपना एक अलग वजूद बनाकर रखी है. ताकि लोगों का भरोसा बढ़े . प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बेहतर उदाहरण तो शायद ही कोई हो सकता है. जब पीएम के चेहरे के तौर पर बीजेपी की तरफ से पेश किया गया था , तो उनके पार्टी के दिग्गज नेताओं के साथ ही सियासत की समझ रखने वाले धुरंधर भी चकरा गये थे.

    राजस्थान में कौन बनेगा मुख्यमंत्री ?

    बीजेपी की हैट्रिक जमाने के बाद सीएम फैस पर सस्पेंश अभी भी बरकरार है . आखिर जिन नामों की चर्चा अभी चल रही है. चलिए उसपर थोड़ी चर्चा कर लेते हैं. जानते है कि किसका दावा और पलड़ा भारी है.

    राजस्थान - वसुंधरा राजे दो बार मुख्यमंत्री रह चुकी है औऱ वो एक जनाधार वाली नेता भी है. इस बार भी राजे का दावां मजबूत माना जा रहा है. लेकिन, वो ही मन जाए ये साफ नहीं है हालांकि, उनको फिर मौका मिलेगा या नहीं. ये अभी बना सवाल बना हुआ है. वसुंधरा के अलावा राजस्थान में बाबा बालकनाथ की चर्चा काफी तेज है. उन्होंने भी लोकसभा से अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. योगी बालकनाथ के साथ ही राज्यवर्धन सिंह राठौर, दिया कुमारी और गजेन्द्र सिंह शेखावत भी मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल है

    मध्यप्रदेश – चार बार यहां के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रह चुकी है . प्रदेश में मामाके नाम से मशहूर शिवराज पांचवी बार सीएम चुने जाए तो आश्चर्यय नहीं होगा औऱ शायद ही कोई आपत्ति भी किसी को होगी . माना जा रहा है कि शिवराज की लाडली योजना के चलते एमपी में एंटी इनकंबेशी का असर नहीं हुआ, जिसके सूत्रधार शिवराज ही थे. अगर उन्हें मौका नहीं मिलता है, तो कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर , प्रह्लाद पटेल और युवा वीडी शर्मा का नाम भी तेजी से चर्चा में आ रहा है.

    छत्तीसगढ़- रमन सिंह तीन बार यहां मुख्यमंत्री रह चुके औऱ छत्तीसगढ़ में बीजेपी के बड़े चेहरे हैं. इसबार भी उनकी चर्चा काफी शुमार हो रही है.  रमन सिंह के अलावा और जो नाम अभी सुनाई पड़े रहे हैं. उनका नाम अरुण साव , विष्णुदेव साय औऱ ओपी चौधरी का भी है.

    बीजेपी की कोशिश ऐसे चेहरे को मुख्यमंत्री बनाने की होगी. जिसके चलते 2024 लोकसभा में कोई अड़चन पैदा न हो. इसके साथ ही बेदाग छवि औऱ विवादों से दूर रहने वाले लोग पहली प्राथमिकता सूची में आयेंगे . अब इंतजार सबों को यही है कि आखिरकर पार्टी के खांचे में कौन सा नाम फिट बैठता है.


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