Bihar Result: एक बार फिर सर्वे की साख दांव पर ,एनडीए -महागठबंधन का जोश क्यों है हाई, पढ़िए विस्तार से

    Bihar Result: एक बार फिर सर्वे की साख दांव पर ,एनडीए -महागठबंधन का जोश क्यों है हाई, पढ़िए विस्तार से

    धनबाद(DHANBAD): बिहार में वोटिंग परसेंटेज को लेकर जिस तरह से बहस  छिड़ी हुई है, उससे कहीं अधिक मजबूत  बहस एग्जिट पोलो की सत्यता को लेकर छिड़ी हुई है.  यह  अलग बात है कि एग्जिट पोल आने के बाद एनडीए का जोश हाई है, तो तेजस्वी यादव का भी उत्साह कम नहीं है.  तेजस्वी यादव ने फिर दोहराया है कि 18 तारीख को वह मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे.  खैर, बिहार में दो चरणों के मतदान के बाद 14 नवंबर को नतीजा का इंतजार है.  उससे पहले कई एग्जिट पोल सामने आ गए हैं, जिसमें एनडीए की सरकार बनने  का अनुमान किया गया है. 

    एनडीए को बढ़त की सभी एजेन्सिया लगा रही अनुमान 
     
    लगभग सभी प्रमुख एजेंसियों ने बिहार में एनडीए की सरकार बनाने  और महागठबंधन के पिछड़ने  का अनुमान किया है.  हालांकि ,बिहार एक ऐसा राज्य है, जो कई सालो से सभी आंकड़ों को झुठलाता रहा है.  चाहे वह 2015 का मामला हो अथवा 2020 का.  2015 और 20 20 में जिन एग्जिट पोलो ने  जिसकी भी सरकार बनने का अनुमान लगाया था, वह सब के सब धराशाई हो गए.  जानकारी के अनुसार 2015 में राजद , कांग्रेस और जदयू ने मिलकर चुनाव लड़ा था और एनडीए  में भाजपा प्रमुख पार्टी थी.  एग्जिट पोल जब आए थे, तो  एनडीए की जीत दिखाई गई थी.  जबकि जीत महागठबंधन की हुई थी. 

    2020 में भी अनुमान धराशाई हो गए थे ,इस बार क्या होता है 

     इस तरह अगर 2020 की बात करें, तो एग्जिट पोल पूरी तरह से धराशाई हो गए थे.  अधिकतर एजेंसियों ने महागठबंधन की जीत का दावा किया था, बात इतनी ही नहीं थी.  महागठबंधन के लोगों ने कई जगह तेजस्वी यादव को सीएम  बता पोस्टर   भी लगा दिए थे.  हालांकि जब नतीजे आए, उसके बाद एनडीए की सरकार बानी.  2025 में भी  एजेंसियां एनडीए को बहुमत बता रही हैं, जबकि महागठबंधन को पीछे कह रही है.  हालांकि तेजस्वी यादव ने इस सर्वे को सरकारी सर्वे बताया है और कहा है कि ऐसा कुछ नहीं होने वाला है.  वह 18 को शपथ लेंगे.  प्रशांत किशोर की पार्टी को भी  एजेंसियां लगभग खारिज कर रही है.  

    14 तारीख को पिटारे से क्या परिणाम आते है ,सबकी लगी है नजर 

    देखना है 14 तारीख को परिणाम किसके पक्ष में आता है और कौन सरकार बनाता  है.  इतना तो तय है कि बिहार में इस बार चुनाव का नरेटिव  बदल गया है.  लोग  रोजगार, विकास और पलायन की बातें किये  और कर रहे है.  हर घर में एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने का तेजस्वी यादव ने वादा किया है.  छठ में घर आए प्रवासी मजदूर भी वोट तक जमे  रहे.   प्रधानमंत्री हो या गृह मंत्री, रक्षा मंत्री हो या भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, राहुल गांधी हो अथवा प्रियंका गांधी, तेजस्वी यादव हो  या कोई और सभी  ने लगातार सभाएं की है और अपनी-अपनी बातों को जनता तक पहुंचाने की कोशिश की है.  अब जनता ने दो चरणों की वोटिंग में किसे  अपने लायक समझा है, इसके लिए 14 तारीख का इंतजार करना होगा. 
    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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