TNP DESK- बिहार में राज्यसभा का चुनाव अब दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है. एनडीए और महागठबंधन की ओर से रणनीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है. एनडीए अपने पांचवें उम्मीदवार को जीतने के लिए परेशान है, तो महागठबंधन अपने उम्मीदवार की जीत निश्चित करने पर लगा हुआ है. 5 सीटों के लिए 6 उम्मीदवार मैदान में होने की वजह से मुकाबला रोचक हो गया है. महागठबंधन ने भी अपनी रणनीति तेज कर दी है. महागठबंधन के विधायक नहीं टूटे, इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है. जानकारी के अनुसार पटना के होटल पनास में महागठबंधन की बैठक हुई है. यहां राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति तय की गई है. कई विधायकों को इसी होटल में ठहराने की भी तैयारी है. सभी विधायकों को एकजुट रखने की तैयारी है. जिससे वोटिंग के समय कोई गड़बड़ी न हो सके. महागठबंधन की कोशिश है कि किसी भी विधायक का वोट तकनीकी गलती से निरस्त नहीं हो.
महागठबंधन की ओर से अमरेंद्र धारी सिंह उम्मीदवार हैं
महागठबंधन की ओर से अमरेंद्र धारी सिंह उम्मीदवार हैं, जिन्हें जीत दिलाने के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ेगी। इसमें ओवैसी की पार्टी और बसपा विधायक की भूमिका अहम मानी जा रही है. अगर इन दलों के विधायक महागठबंधन के पक्ष में मतदान करते हैं, तो चुनाव का समीकरण बदल जाएगा। ओवैसी की पार्टी के विधायक भी आज की बैठक में शामिल हुए बताये गए हैं. यदि ओवैसी और मायावती की पार्टी के विधायक महागठबंधन के पक्ष में वोट करते हैं, तो गणित बिगड़ना तय है. माना जा रहा है कांग्रेस के भी सभी विधायक पटना पहुंच चुके है, इधर, जदयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने कहा है कि एनडीए के सभी दलों के नेता निश्चिन्त हैं. एनडीए को कोई चिंता नहीं है. पांचो उम्मीदवार चुनाव जीतेंगे, उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव होने तक एनडीए के सभी विधायक पटना में ही रहेंगे और एक दूसरे से मिलना जुलना भी चलता रहेगा।
विजय चौधरी का दावा -विपक्षी खेमे में घबराहट का माहौल
विजय चौधरी ने कहा कि इस समय विपक्षी खेमे में घबराहट का माहौल है. बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही हैं, जिनके लिए यह चुनाव कराया जा रहा है. 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों का समर्थन चाहिए. मौजूदा समय में एनडीए के पास करीब 202 विधायक हैं. इस आधार पर वह आसानी से चार सीटें जीत सकता है. हालांकि पांचवीं सीट के लिए उसे कुछ अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ सकती है.दूसरी तरफ राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन के पास करीब 35 विधायक हैं, इसलिए उसे भी जीत के लिए दूसरे दलों के समर्थन की तलाश करनी होगी. यही वजह है कि चुनाव से पहले सियासी जोड़-तोड़ की चर्चा काफी तेज हो गई है.वोटिंग 16 मार्च को होगी।
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
Thenewspost - Jharkhand
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