Bihar Politics: तेज प्रताप के इस कथन से किसको मिली होगी सबसे बड़ी राहत, क्यों RSS पर हमलावर हुए लालू, पढ़िए

    Bihar Politics: तेज प्रताप के इस कथन से किसको मिली होगी सबसे बड़ी राहत, क्यों RSS पर हमलावर हुए लालू, पढ़िए

    TNP DESK- लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव बिहार की राजनीति के केंद्र में है.  वह कोई भी बात कहते हैं, तो वायरल हो जाते है.  अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश प्रसाद यादव से उनकी मुलाकात हुई थी.  उसके बाद तेज प्रताप यादव ने ट्वीट कर कहा था कि मैं अकेला नहीं हूं ,मेरे साथ और भी लोग है.  खैर, जो भी हो तेज प्रताप यादव के एक बयान से बिहार के महुआ से विधायक मुकेश रोशन को बड़ी राहत मिली होगी.  कुछ महीने पहले  उन्हें अपनी सीट गंवाने का डर सताने लगा था. 

     तेज प्रताप यादव ने महुआ सीट से चुनाव लड़ने की बात कही थी, तो उन्होंने मीडिया के सामने फूट-फूट कर रोया भी था.  इसको लेकर कुछ बयानबाजी भी हुई थी.  लेकिन अब तेज प्रताप यादव सीट बदलने की बात से इनकार किया है.  वह कह रहे हैं कि हसनपुर से ही चुनाव लड़ेंगे.  इसी क्षेत्र पर उनका फोकस रहेगा.  फिलहाल वह हसनपुर से ही विधायक है.  वैशाली जिले की महुआ विधानसभा सीट से 2015 में तेज प्रताप यादव आरजेडी की  टिकट पर जीत दर्ज की थी.  2020 में यह  सीट बदल गई और वह हसनपुर से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे.  

    महुआ से राजद ने मुकेश रोशन को टिकट दिया और वह चुनाव जीतने में कामयाब रहे.  कहा तो यही जा रहा है कि पार्टी से बाहर किए जाने के बाद तेज प्रताप यादव ने महुआ विधानसभा सीट से मोह  छोड़ दिया है. हाल के बयान में उन्होंने समस्तीपुर जिले के हसनपुर सीट से ही चुनाव लड़ने के संकेत दिए है.  जहां से वह वर्तमान में विधायक है.  जब तेज प्रताप यादव ने महुआ सीट से दावा ठोका था, तो उस समय भी पार्टी में एक ड्रामा दिखा था.  तेज प्रताप यादव का कहना है कि 6 साल के लिए वह पार्टी से बाहर जरूर किए गए हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वह घर में कैद हो जाए.  उनका अपना भी राजनीतिक जीवन है.  वह चुनाव के पहले अपने ढंग से यात्रा करेंगे और जनता के लिए काम करेंगे. 

     इधर, लालू प्रसाद यादव ने एक बार फिर संघ पर हमला बोला है.  सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा है कि- आरएसएस ने संविधान बदलने की बात कही है.  इन लोगों के मन और विचार में लोकतंत्र एवं बाबा साहेब के संविधान के प्रति इतनी घृणा क्यों है? उन्होंने लिखा है कि इनकी इतनी हिम्मत नहीं कि  संविधान और आरक्षण की तरफ आंख उठाकर देख सके.  दरअसल, आरएसएस  के महासचिव ने मांग की थी कि संविधान की प्रस्तावना से दो शब्द समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष को हटा देना चाहिए.  यह  दोनों शब्द आपातकाल के दौरान तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने जोड़ा था.  साथ ही  उन्होंने यह भी मांग की थी कि कांग्रेस को 50 साल पहले इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल के लिए माफी मांगनी चाहिए.  25 जून 1975 को घोषित आपातकाल के संबंध में उन्होंने कहा था कि उस दौरान हजारों लोगों को जेल में डाल दिया गया था.  उन पर अत्याचार किए गए थे. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो