बड़ी खबर:फ्लोराइडयुक्त पानी बना काल! मुंगेर के दूधपनिया गाँव में 6 मौतें, दर्जनों लकवा पीड़ित


मुंगेर(MUNGER):मुंगेर जिला अंतर्गत खड़गपुर प्रखंड के गंगटा पंचायत स्थित दूधपनिया गाँव में फ्लोराइड और आयरन युक्त पानी ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है.वर्ष 2025 में अब तक गाँव में इस दूषित पानी के कारण कुल 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों ग्रामीण लकवा जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है.ग्रामीणों के अनुसार गाँव में पीने के लिए केवल चापानल और कुआँ ही सहारा है, जिनसे निकलने वाले पानी में आयरन और फ्लोराइड की मात्रा अत्यधिक पाई गई है. इसका दुष्प्रभाव विशेष रूप से 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में तेजी से देखा जा रहा है.हालांकि अब बच्चे और महिलाएँ भी इसकी चपेट में आ रहे है.
मुंगेर के दूधपनिया गाँव में 6 मौतें
ग्रामीणों का कहना है कि इस पानी को पीने से पहले शरीर में दर्द, पैरों और कमर में जकड़न शुरू होती है, जो धीरे-धीरे पूरे शरीर को प्रभावित कर देती है. कुछ वर्षों में मरीज लकवा ग्रस्त हो जाता है. वर्तमान में भी गाँव में कई महिला, पुरुष और युवतियाँ इस गंभीर बीमारी से जूझ रही है.लगातार हो रही मौतों के बाद दिल्ली से डॉक्टरों की एक टीम गाँव पहुँची. टीम ने पीड़ित ग्रामीणों के ब्लड और यूरिन सैंपल लिए तथा चापानल और कुआँ के पानी की जाँच की. जाँच में पानी में आयरन और फ्लोराइड की मात्रा मानक से अधिक पाई गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने ग्रामीणों को यह पानी पीने से मना किया.
जल योजना के तहत गाँव में पानी की व्यवस्था की गई है
हालाँकि बिहार सरकार की जल योजना के तहत गाँव में पानी की व्यवस्था की गई है, लेकिन ग्रामीणों को प्रति परिवार प्रतिदिन केवल तीन डब्बा पानी ही उपलब्ध कराया जा रहा है. इतनी कम मात्रा में पानी मिलने के कारण अधिकांश परिवार फिर से चापानल के दूषित पानी पर निर्भर होने को मजबूर है.बीमार ग्रामीण विनोद बेसरा ने बताया कि वे पिछले 6 वर्षों से बिस्तर पर पड़े है उनकी पत्नी और बेटी भी इसी बीमारी से पीड़ित है. उन्होंने आरोप लगाया कि न तो सरकार और न ही जिला प्रशासन उनकी सुध लेने आता है उन्होंने कहा कि क्षेत्र से उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तारापुर तक आते है, लेकिन उनके गाँव तक पहुँचने की फुर्सत नहीं है.
दर्जनों लोग इस बीमारी से परेशान है
वहीं ललिता देवी ने बताया कि उनके पिता सहित दर्जनों लोग इस बीमारी से परेशान है. जाँच और आश्वासन के अलावा कोई ठोस सुविधा नहीं दी जा रही है. लोग केवल “खानापूर्ति” कर चले जाते है.ग्रामीणों ने सरकार और जिला प्रशासन से स्थायी स्वच्छ पेयजल व्यवस्था, नियमित स्वास्थ्य जाँच और पीड़ितों को उचित मुआवज़ा देने की माँग की है.हम लोग मजबूरी में ज़हरीला पानी पी रहे हैं, सरकार अगर समय रहते ध्यान नहीं देगी तो और जानें जाएँगी.
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