बड़ी खबर : विनय चौबे के घरेलू नौकरों के नाम पर करोड़ों की संपत्ति, ACB के जांच में खुलासा


टीएनपी डेस्क (TNP DESK): भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जेल में बंद निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में कई हैरान करने वाले तथ्य उजागर किए हैं. जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर अवैध संपत्तियों को छिपाने के लिए न सिर्फ रिश्तेदारों, बल्कि घर में काम करने वाले निजी कर्मचारियों के नाम पर भी संपत्तियां दर्ज कराई गईं.
सूत्रों के अनुसार, एसीबी की जांच में मिले मनी ट्रेल के सबूत एक सुनियोजित भ्रष्टाचार नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं. जांच एजेंसी को ऐसे प्रमाण मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि रांची के महंगे और पॉश इलाकों में स्थित कई कीमती संपत्तियां विनय चौबे के घरेलू कर्मचारियों के नाम पर खरीदी गई हैं.
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जिन कर्मचारियों के नाम पर करोड़ों रुपये की जमीन और संपत्तियां दर्ज हैं, उनकी आय इतनी नहीं है कि वे शहर में एक साधारण फ्लैट भी खरीद सकें. इसके बावजूद उनके नाम पर महंगी जमीनें होना इस बात की ओर संकेत करता है कि अवैध धन को छिपाने और असली स्वामित्व से ध्यान हटाने के लिए यह तरीका अपनाया गया. एसीबी का मानना है कि यह मामला बेनामी लेन-देन और धन शोधन से जुड़ा हो सकता है.
अब तक की जांच में जिन लोगों के नाम पर संपत्तियां दर्ज पाई गई हैं, उनमें विनय सिंह, स्निग्धा सिंह, स्वपना संचिता, शिपिज त्रिवेदी और प्रियंका त्रिवेदी शामिल हैं. आरोप है कि विनय चौबे ने जांच एजेंसियों से बचने के लिए परिवार के सदस्यों के साथ-साथ घरेलू स्टाफ को भी संपत्तियों का कागजी मालिक बनाया.
एसीबी फिलहाल जमीन की रजिस्ट्री, म्यूटेशन दस्तावेज, बैंक लेन-देन और धन के स्रोतों की गहन जांच कर रही है. अब तक मिले साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि दस्तावेजों में भले ही संपत्ति के मालिक अन्य लोग दिखाए गए हों, लेकिन वास्तविक नियंत्रण और स्वामित्व विनय चौबे के पास ही था. जांच एजेंसी का मानना है कि यह मामला केवल आय से अधिक संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी पद के दुरुपयोग और सार्वजनिक धन को योजनाबद्ध तरीके से बेनामी संपत्तियों में लगाने से जुड़ा गंभीर प्रकरण है. एसीबी जल्द ही सभी कथित बेनामीदारों से पूछताछ करेगी और बैंक रिकॉर्ड के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि संपत्ति खरीदने के लिए धन कहां से आया.
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