TNP DESK- बंगाल में चुनाव के पहले भी मछली पर राजनीति हुई. अब आगे भी होगी। चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी के नेताओं को मछली -भात खाने का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था. ममता बनर्जी का दावा था कि बंगाल में भाजपा सरकार आने के बाद मछली खाने पर भी रोक लग जाएगी। उन्होंने इस बात को खूब प्रचारित भी किया। लेकिन मतदाताओं पर इसका बहुत असर नहीं हुआ. लेकिन अब बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी इस पर चौकस हो गए हैं.
मछली -भात की एक नई योजना होने जा रही शुरू
सूत्रों पर भरोसा करें तो बंगाल की सरकार आम जनता के लिए मछली -भात की एक नई योजना लेकर आ रही है. इस योजना के अनुसार ₹5 में मछली- भात खिलाया जाएगा। सरकारी कैंटिनो में भी मछली -भात को शामिल करने का प्रस्ताव है. सूत्रों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस के दावे को झूठ बताने के लिए मुख्यमंत्री ने सत्ता संभालते ही विशेष योजना तैयार की है. यह योजना समूचे बंगाल में चल रही है . सरकारी रियायती कैंटीन के मौजूदा नेटवर्क के जरिए यह योजना शुरू की जाएगी। यह कैंटीन दिहाड़ी मजदूर, श्रमिक परिवहन कर्मचारी, कम आए वाले परिवार और शहरी गरीबों को कम लागत पर भोजन उपलब्ध कराकर उनकी जरूरत को पूरा करने के लिए चल रही है.
बंगाल में मछली लोगों के लिए सिर्फ भोजन नहीं ,बल्कि एक पहचान है.------
उल्लेखनीय है कि बंगाल में मछली लोगों के लिए सिर्फ भोजन नहीं ,बल्कि एक पहचान है. इस बात को मुख्यमंत्री ने समझते हुए आगे कार्यक्रम शुरू करने जा रहे हैं. बता दें कि 2026 के विधानसभा चुनाव में मछली एक प्रमुख चुनावी मुद्दा था. इसके काट के लिए बीजेपी को काफी प्रयास करना पड़ा था. कई नेताओं को कैमरे के सामने मछली खानी पड़ी थी. बीजेपी नेता इसके लिए मछली खाते, मछली बाजार का दौरा करते और मछुआरों से बातचीत करते देखे गए थे. भाजपा यह बताने की कोशिश कर रही थी कि बंगाल के खानपान पर सरकार बनने के बाद भी कोई परिवर्तन नहीं आएगा। इसी काम में वह आगे बढ़ चली है.

