टीएनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना की लाभुकों के लिए आज की यह खबर बहुत जरूरी है. हालही में मंईयां योजना से जुड़ी लाभुकों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है. ऐसेव मीन जाहीर है की अगर सत्यापन हुआ तो अपात्र लाभार्थियों के नाम की छटनी होगी और जो इस योजना का लाभ पाने के योग्य नहीं है उनका नाम काट दिया जाएगा. अब यह भी संभावना जताई जा रही है कि योजना से कई लाभुक महिलाओं का नाम काटा जाएगा, जिसके बाद उन्हें योजना का लाभ नहीँ मिल सकेगा. ऐसे में उन्हें हर माह मिलने वाली 2500 रुपये की राशि का लाभ नहीं मिलेगा.
कब होगा सत्यापन
11 मई से 18 मई तक ग्रामीण इलाकों की हर पंचायत और शहरी क्षेत्रों के प्रत्येक वार्ड में लाभुकों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा. इसके बाद 19 मई से 24 मई तक पंचायत और वार्ड स्तर से प्राप्त रिपोर्टों का संकलन किया जाएगा तथा अयोग्य पाए गए लाभार्थियों को नोटिस जारी किए जाएंगे. 25 मई से 27 मई के बीच मृत, अयोग्य और अनुपस्थित लाभुकों की अंतिम सूची तैयार कर पंचायत भवन और अंचल कार्यालय के सूचना पट पर सार्वजनिक की जाएगी. वहीं, प्राप्त आपत्तियों के निष्पादन के बाद 29 मई को अंतिम रिपोर्ट जिला मुख्यालय को भेजी जाएगी.
बताते चलें कि मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना कि 2500 रुपये की राशि राज्य कि उन महिलाओं को मिलती है, जिनकी उम्र 18 से 50 वर्ष क बीच है. इसके अलावा मंईयां योजना का लाभ पाने के लिए आधार कार्ड, पहचान और निवास प्रमाण, राशन कार्ड, बैंक पासबुक जो आधार से जुड़ा हुआ और चालू बैंक खाता होना चाहिए, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो, स्व-घोषणा पत्र होना अनिवार्य है. इसके अलावा आवेदक महिला झारखण्ड की निवासी होनी चाहिए, साथ ही आधार कार्ड में मोबाइल नंबर अपडेट होना चाहिए, जो बैंक खाते से भी जुड़ा हो.
मंईयां सम्मान योजना के तहत राज्य की 56 लाख लाभुक महिलाओं के खाते में हर माह 2500 रुपये की राशि भेजी जाती है. ऐसे में इस योजना की 22वीं और 23वीं किस्त को लेकर भी बड़ा अपडेट सामने आया है जहां 10 से 15 तारीख के बीच दो कीस्टोन की राशि यानि की 5000 रुपये एक साथ भेजे जाएंगे. विभाग ने इसके लिए पूरी तैयारी कर ली है और अब कभी भी मंईयां योजना की लाभुकों के खाते में पैसे भेजे जाएंगे. बताते चले की हर माह सरकार की ओर से यह राशि DBT के माध्यम से भेजी जाती है. मंईयां योजना से महिलाओं ना सिर्फ सशक्त बन रही हैं बल्कि आत्मनिर्भर और स्वावलंबी भी बनकर समाज में मिसाल पेश कर रहीं हैं.

