टीएनपी डेस्क: बंगाल के मुख्यमंत्री के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में एक बड़ा अपडेट सामने आया है. सीबीआई ने चौथे आरोपी को भी यूपी से गिरफ्तार किया है. पुलिस और सीबीआई की संयुक्त टीम ने सोमवार को हत्याकांड के आरोपी राजकुमार सिंह को पकड़ा है. वह उत्तर प्रदेश के बलिया का रहने वाला है. हत्याकांड में उसकी भूमिका शूटर की बताई जा रही है. जानकारी के अनुसार राजकुमार सिंह हरिद्वार से दिल्ली भागने की फिराक में था. लेकिन टीम ने उसे नेशनल हाईवे 58 के छपरा टोल प्लाजा से हिरासत में ले लिया। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री के पीए की हत्या में यह सबसे बड़ा किरदार माना जा रहा है.
इस हत्याकांड ने पूरे बंगाल को हिला कर रख दिया है
इस हत्याकांड ने पूरे बंगाल को हिला कर रख दिया है. वैसे, देशभर में इसकी चर्चा हो रही है. हत्याकांड में इस गिरफ्तारी के साथ ही चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इसके पहले तीन गिरफ्तारी हो चुकी है. उत्तर प्रदेश से यह दूसरी गिरफ्तारी है. बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सहयोगी चंद्रकांत रथ की छह मई को मध्यग्राम में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. यह घटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा के दो दिन बाद हुई थी. बंगाल सरकार के अनुरोध के बाद सीबीआई ने पश्चिम बंगाल पुलिस से हत्या मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है.
सीबीआई की आठ सदस्यीय टीम कर रही है काम
उल्लेखनीय है कि बंगाल के मुख्यमंत्री के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या मामले में सीबीआई की आठ सदस्य टीम एक्शन तेज कर दिया है. इस हत्याकांड के तार बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड से भी जुड़ा हुआ है. झारखंड के अधिकारियों को भी टीम में शामिल किया गया है. इस सनसनीखेज हत्याकांड में बिहार और उत्तर प्रदेश से गिरफ्तारी की गई है. . जानकारी के अनुसार इस मर्डर केस में जिस कार का प्रयोग हुआ है, वह कार झारखंड की बताई जा रही है. दरअसल, हत्याकांड में शामिल हत्यारे साक्ष्य छुपाने की कोशिश की , लेकिन एक टोल पर अपने यूपीआई अकाउंट से भुगतान किया और यही से पुलिस को लीड मिली। पुलिस ने बिहार और उत्तर प्रदेश में छापेमारी की और तीन शूटरों को अरेस्ट किया।
तीन के बाद यूपी से की गई है चौथे की गिरफ्तारी
फिर सोमवार को यूपी से चौथे को गिरफ्तार किया गया है. हत्याकांड में कार और बाइक का इस्तेमाल किया गया था. बाइक का नंबर भी फर्जी लगाया गया था. उस नंबर की खोज में बंगाल पुलिस धनबाद के पाथरडीह भी पहुंची थी. लेकिन पता चला कि हत्याकांड में पाथरडीह की बाइक का फर्जी नंबर इस्तेमाल किया गया था. जो व्यक्ति बाइक का मालिक था, वह पहले बंगाल में कार्यरत था. लेकिन बाद में उसका स्थानांतरण पाथरडीह हो गया था. अपराधियों ने उनकी बाइक का फर्जी नंबर का इस्तेमाल किया। एक कार का भी प्रयोग किया गया. वह कार भी झारखंड की बताई जा रही है.
क्या "सुपारी किलिंग" की ओर बढ़ रहा संदेह
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, पता चल रहा है कि हत्याकांड के तार बंगाल, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश से जुड़ते जा रहे हैं. बताया जा रहा है कि यह हत्याकांड "सुपारी किलिंग" हो सकती है. सुपारी की बड़ी रकम को लेकर भी चर्चा चल रही है. लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो रही है. कहा जा रहा है कि हत्या की साजिश एक महीना पहले से रची जा रही थी और इसके लिए "मैसेजिंग एप" का इस्तेमाल किया गया था. हालांकि इसकी कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं हो रही है. लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि इस हत्याकांड की साजिश बहुत पहले रची गई थी. इस हत्याकांड के "मास्टरमाइंड" तक पहुंचने के लिए जांच एजेंसी कोशिश कर रही है. लेकिन इतना तो तय है कि जिस ढंग से हत्याकांड को अंजाम दिया गया है, उससे ऐसा लगता है कि किसी शातिर गिरोह को सुपारी देकर यह हत्या कराई गई है.

