एक करोड़ के इनामी नक्सली की मौत के बाद नक्सल संगठन की टूटी रीढ़, प्रवेश दा का झारखंड सहित बिहार में भी था दबदबा

    एक करोड़ के इनामी नक्सली की मौत के बाद नक्सल संगठन की टूटी रीढ़, प्रवेश दा का झारखंड सहित बिहार में भी था दबदबा

    TNP DESK- लखीसराय जिले के जंगली इलाकों पर अपनी धाक जमाकर रखने वाला नक्सल नेतृत्वकर्ता प्रवेश दा झारखंड के हजारीबाग जिले में मुठभेड़ के दौरान मारा गया.  वह 1 करोड़ का इनामी नक्सली था. बताया जाता है कि सहदेव सोरेन उर्फ प्रवेश दा नक्सल संगठन का स्पेशल एरिया कमेटी का सदस्य था. बिहार झारखंड की सीमा पर लखीसराय,जमुई, मुंगेर, गिरिडीह क्षेत्र में सक्रीय और कई बड़ी घटनाओं को प्रवेश दा एवं अविनाश के नेतृत्व में अंजाम दिया गया था. अविनाश तो पहले ही मुठभेड़ में मारा जा चुका है.

    अब सोमवार को झारखंड के हजारीबाग में नक्सली प्रवेश दा भी मुठभेड़ में मारा गया. अविनाश की मौत के बाद लखीसराय, जमुई, मुंगेर व गिरीडीह क्षेत्र की जिम्मेवारी प्रवेश दा ने संभाल रखी थी. प्रवेश दा की मौत के बाद नक्सली संगठन के रीढ़ टूट चुकी है. अब लखीसराय एवं आसपास के क्षेत्रों में नक्सलियों का नेतृत्व करने वाला कोई नहीं बचा.  बता दें कि नक्सली प्रवेश दा की गिरफ्तारी एक बार हुई थी. जहां गिरीडीह कोर्ट में पेशी के लिए ले जाने के दौरान नक्सली संगठन का सक्रिय सदस्य सिद्धू कोड़ा के नेतृत्व में पुलिस पर हमला कर उसे कोर्ट पहुंचने से पहले ही छुड़ा लिया था. तभी से प्रवेश दा फरार चल रहा था. 

    लखीसराय कजरा के कानीमोह में वर्ष 29 अगस्त 2010 में हुई एक मुठभेड़ में कवैया थानाध्यक्ष भूलन यादव की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी. दरअसल पुलिस को ट्रैप करने के लिए नक्सलियों ने जाल बिछाया और उस समय कजरा से स्थानांतरित होकर भूलन यादव कवैया थानाध्यक्ष बनाये गए थे. जिस कारण वहां के जंगलों की जानकारी अधिक होने के कारण तत्कालीन एसपी अशोक कुमार ने भूलन यादव को कार्रवाई के लिए जंगल भेजा था. वहां नक्सली पहले से घात लगाए बैठे थे. जैसे ही पुलिस पहाड़ी के नीचे गई तभी पहाड़ी के उपर से नक्सलियों ने पुलिस पर गोलिया बरसने लगी. नक्सलियों ने घेर कर भूलन यादव की हत्या कर दी और तीन अवर निरीक्षक रुपेश कुमार,अभय यादव एवं लूकस टेटे को अगवा कर बंधक बना लिया था. जिससे दो जाति में नक्सली संगठन बंट गया.

    - वर्ष 2010 में दो आदिवासी बनाम यादव में बंट गया था नक्सली संगठन

    - प्रवेश के नेतृत्व में आदिवासी तो अविनाशन कर रहा था यादव ग्रुप का नेतृत्व

    - अवर निरीक्षक लूकस टेटे की हत्या के कारण नक्सली संगठन में आया था दरार

    लखीसराय कजरा की घटना के बाद नक्सलियों ने जातिवाद की लड़ाई शुरू कर दी थी. इस घटना में नक्सलियों के चंगुल में फंसे अवर निरीक्षक अभय यादव, रुपेश कुमार सिन्हा एवं लूकस टेटे को लेकर पुलिस पर दवाब बनाने के लिए पहले किसकी हत्या की जाए इस दिशा में चर्चा चल रही थी. आदिवासी समर्थक चाहते थे कि अभय यादव की हत्या की जाए. चूंकि भूलन यादव की हत्या पहले ही हो चुकी थी. तो वहीं यादव समर्थक चाहते थे कि लूकस टेटे की हत्या की जाए. हालांकि आलाकमान से इस दिशा में कोई निर्णय नहीं आया. इस बीच पुलिस को जंगल में लूकस टेटे का शव मिला था. इसके बाद नक्सली संगठन दो गुटों में बंट गया था. प्रवेश दा आदिवासियों के साथ अलग तरीके से कार्य कर रहा था. जबकि अविनाश यादव ग्रुप को चला रहा था. कई महीनें तक नक्सली संगठन अगल-अलग ग्रुप में बंटकर चला था. उसके बाद बड़ी मशक्कत के बाद झारखंड से आई उच्च स्तरीय नक्सली संगठन की कमेटी ने दोनों को एक करवाया.

    लखीसराय के जंगलों में प्रवेश दा और अविनाश की जोड़ी का था दबदबा

    लखीसराय-जमुई-मुंगेर के सीमा क्षेत्र में एक बार फिर जब अविनाश और प्रवेश दा की जोड़ी चलने लगी तो नक्सलियों का दबदबा पुनः कायम हो गया. प्रवेश दा के छत्रछाया में सिद्धू कोड़ा का लखीसराय और जमुई क्षेत्र में आतंक फैल गया था. वहीं अविनाश के नेतृत्व में चिराग और अन्य नक्सली संगठन गिरीडीह, लखीसराय एवं जमुई में आतंक फैलाने लगा. लेकिन चिराग, सिद्धू कोड़ा फिर अविनाश का मुठभेड़ में मारे जाने से नक्सली संगठन बहुत कमजोर पड़ गया. सोमवार को नक्सली संगठन के शीर्ष सदस्य प्रवेश दा के मुठभेड़ में मारे जाने के कारण नक्सलियों की लखीसराय,जमुई तथा मुंगरे के जंगली इलाकों में आतंक खत्म सा हो गया.


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