बिहार में नया अध्याय: कैसे भाजपा को "बड़े भाई" की भूमिका में आने को लम्बा इंतजार करना पड़ा, पढ़िए विश्लेषण

    बिहार में नया अध्याय: कैसे भाजपा को "बड़े भाई" की भूमिका में आने को लम्बा इंतजार करना पड़ा, पढ़िए विश्लेषण
    साल '2026 में बिहार में भाजपा अब जदयू  का बड़ा भाई बन गया है.  हालांकि भाजपा को इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ा

    TNP DESK-:  साल '2026 में बिहार में भाजपा अब जदयू  का बड़ा भाई बन गया है.  हालांकि भाजपा को इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ा.  जब जदयू  को सीट  कम आई थी, तब भी जदयू ही बिहार में बड़े भाई की भूमिका में था.  लेकिन 2025 के चुनाव में जदयू से  मात्र चार सीट अधिक भाजपा को आई ,फिर भी भाजपा ने छोटे भाई की भूमिका में रहकर नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनने दिया।  लेकिन यह बात उसी समय से लोगों को पच  नहीं रही थी और कहा जा रहा था कि कुछ ना कुछ आगे चलकर होगा।  

    नीतीश कुमार भी राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी माने जाते  हैं 

    वैसे, नीतीश कुमार भी राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी माने जाते रहे हैं.  जानकारी के अनुसार 1990 में नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव के खिलाफ एक गठबंधन तैयार किया था.  उस समय नीतीश कुमार के समता पार्टी का मजबूत आधार बिहार में माना जा रहा था.  2000 में चुनाव हुए तो नीतीश कुमार का कद बढ़ा ,अक्टूबर 2005 में जब एनडीए की सरकार बनी तो नीतीश कुमार विधायक दल के नेता बने.  इस समय जदयू के खाते में 88 सीट मिली थी, जबकि भाजपा को 55 सीट पर संतोष करना पड़ा था.  इसके बाद 2010 का विधानसभा चुनाव आया. 

    2010 में तो जदयू का प्रदर्शन शानदार रहा था 

     2010 में तो जदयू की सीट सैकड़ा पार  कर गई थी.  जदयू को 115 सीट मिली।  भाजपा को केवल  91 सीट मिली।  इसके बाद नीतीश कुमार 2014 के लोकसभा चुनाव में कुछ असहज  महसूस करने लगे.  भाजपा ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री  के उम्मीदवार की घोषणा कर दी.  उसके बाद नीतीश कुमार ने गठबंधन को तोड़ लिया।  उन्होंने राजद  और कांग्रेस से गठबंधन किया।  2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन शानदार रहा.  बिहार में जदयू को केवल लोकसभा में दो सीट मिली थी.   2015 विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार राजद  के साथ गठबंधन किया और यह  गठबंधन चुनाव जीत गया और सरकार बनी।  लेकिन 2017 में नीतीश कुमार फिर एनडीए में वापस लौटे . 
     
    2020 के विधानसभा चुनाव में क्या -क्या हुआ था
     
    2020 में जदयू और भाजपा मिलकर चुनाव लड़े , बीजेपी को 74 सीट  मिली , जबकि जदयू  को केवल 45 सीट मिली।  यह  पहला मौका था, जब नीतीश कुमार को झटका लगा था.  लेकिन इस समय भी भाजपा ने उदारता दिखाते हुए नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री बनाए रखा.  अधिक सीट  होने के बावजूद भाजपा छोटे भाई की भूमिका में रही.  यह  अलग बात है कि उसे समय एक अलग राजनीति बिहार में हुई थी.  चिराग पासवान की पार्टी ने जदयू  वाली  सीटों पर अपना उम्मीदवार उतारा, इसका सीधा नुकसान नीतीश कुमार को हुआ.  फिर 2024 का लोकसभा चुनाव आया, तो जदयू को भी 12 सीट मिली तो भाजपा को भी लोकसभा में 12 सीट  की प्राप्त हुई. 

    2025 के विधानसभा चुनाव में क्या -क्या हुआ था 
     
    फिर 2025 का विधानसभा  चुनाव आया तो भाजपा को 89 सीट मिली, जबकि जदयू  को पचासी सीट पर संतोष करना पड़ा.  यह  पहला मौका था जब जदयू और भाजपा बराबर बराबर सीटों पर चुनाव लड़े, फिर भी भाजपा ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनने पर सहमति जाता दी.  इसके बाद पर्दे के पीछे से राजनीति शुरू हुई और भाजपा को बिहार में अपना मुख्यमंत्री देने की जल्दबाजी थी.  कई तरह के उपक्रम किए गए, मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार को राजनीति में आने की चर्चा शुरू हुई, फिर यह चर्चा ढहती -डिमलाती   रही.  अब पुख्ता ढंग से निशांत कुमार राजनीति में आ रहे हैं तो नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं.  क्योंकि नीतीश कुमार ने स्वयं गुरुवार को इसकी सोशल मीडिया पर घोषणा कर दी है.  इसलिए यह बात अब लगभग तय है कि बीजेपी बिहार में बड़े भाई की भूमिका में आ गई है और उसी का कोई ना कोई मुख्यमंत्री बनेगा। 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो


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