बिहार के इस गांव में पानी पीने से दिव्यांग हो गए 75% लोग, पानी में मिला था यह "जहर"

    बिहार के इस गांव में  पानी पीने से दिव्यांग हो गए 75% लोग,  पानी में मिला था यह "जहर"

    नवादा (NWADA) : नवादा जिले के नक्सल प्रभावित इलाका रजौली अनुमंडल क्षेत्र का कचहरियाडीह एक ऐसा गांव है, जहां लोग फ्लोराइडयुक्त पानी पीने को विवश थे. गांव के लोगों की त्रासदी यह थी कि असमय लंगड़े-कुबड़े हो जा रहे थे. किशोर अवस्था से लेकर युवा अवस्था के बीच लोग ही दिव्यांगता का शिकार हो जाते थे. पैर टेढ़ा हो जाना, शरीर झुक जाना आदि रोग की जकड़न में लोग आ जाते थे. मामला सुर्खियों में आया तो जांच में पाया गया कि यहां के लोग पीने में जो पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसमें फ्लोराइड की मात्रा काफी अधिक है. इसके बाद सरकार व पीएचईडी विभाग द्वारा कुछ चापाकल लगाए गए. लेकिन कारगर नहीं हो रहा था. तब यहां ट्यूबवेल व जलमीनार की योजना को स्वीकृति दी गई. पाइप लाइन के जरिए पानी की आपूर्ति संबंधित गांवों में शुरू की गई. परिणाम बेहतर रहा. जब से लोग फ्लोराइडमुक्त जल पी रहे हैं, तब से दिव्यांगता की समस्या दूर हो गई है.

    लोग गांव शादी नहीं करना चाहते थे

    यहां के ग्रामीण बताते हैं कि वर्षों से कचहरियाडीह गांव के लोग एक कुआं से पानी लाकर पीते थे. जिसमें काफी मात्रा में फ्लोराइड था. फ्लोराइड युक्त जल पीने से लोग दिव्यांग होते चले गए. ग्रामीणों ने बताया कि जब किसी बच्चे का जन्म होता था तो वह जन्म के समय बिल्कुल ठीक रहता था, जब वह चार-पांच साल का होता तब उसका हाथ, पैर एवं कमर में ऐठन सी हो जाती थी और वह दिव्यांग बन जाता था. इतना ही नहीं इन समस्याओं के कारण कोई भी लोग यहां शादी ब्याह करना नहीं चाहता था. जिसके कारण यहां के लोगों को शादी ब्याह में काफी परेशानी होती थी. यही वजह रही कि कुछ लोग इस गांव से दूसरे गांव में विस्थापित हो गए. इस प्रकार कह सकते हैं कि यहां के लोगों के लिए फ्लोराइडयुक्त जल अभिशाप बन गया था. लेकिन जब यह मामला सरकार के संज्ञान में आया तब हरदिया डैम वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाई गई. जहां से शुद्ध जल कचहरीयाडीह के साथ अन्य गावों को भी उपलब्ध कराया जा रहा है. अब लोग पिछले 2 वर्षों से शुद्ध जल का सेवन कर रहे हैं जिससे यह समस्या अब दूर हो गई है और पूरा गांव खुशहाल हो गया है.

    अब मिलता है शुद्ध जल

    वहीं पंप ऑपरेटर राजेश कुमार बताते हैं कि प्लांट से जल शुद्धीकरण कर पानी टंकी तक पहुंचाया जाता है. जिसके बाद यहां भी प्रत्येक दिन जल का पीएच मान और क्लोरीन टेस्ट के बाद ही ग्रामीणों को जल सप्लाई दिया जाता है. जिससे अब ग्रामीणों को शुद्ध जल मिल रहा है और दिव्यांगता जैसी अभिशाप से यहां के लोग मुक्त हो गये हैं.

     


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