नक्सली संगठनों के लिए बोझ बन गया था बुढ़ा! कहीं अपनों ने तो नहीं कराई नक्सली नेता प्रशांत बोस की गिरफ्तारी!

    नक्सली संगठनों के लिए बोझ बन गया था बुढ़ा!  कहीं अपनों ने तो नहीं कराई नक्सली नेता प्रशांत बोस की गिरफ्तारी!

    सरायकेला (SARAIKELA) : बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, आंध्रप्रदेश जैसे कई राज्यों के नक्सली गतिविधियों के संचालन में थिंक टैंक की भूमिका निभा रहे और पिछले चार दशकों से नक्सली गतिविधियों के जरिए पुलिस के लिए सिरदर्द बने नक्सली नेता प्रशांत बोस की गिरफ्तारी अबूझ पहेली बनी हुई है. जिस नक्सली नेता को गिरफ्तार करने के लिए पिछले चार दशकों से विभिन्न राज्यों की एजेंसियां तथा केंद्रीय एजेंसी लगी हुई थी, वह आखिर कैसे इतनी आसानी से गिरफ्तार हो गया, यह एक बड़ा सवाल है. इस मौंजू कौंधते सवाल के बीच इस बाबत कोई विधिवत जानकारी और निश्चित निष्कर्ष तक पहुंचने वाला जवाब तो नहीं मिल पाया, लेकिन इसे लेकर कई तरह के कयास जरूर लगाए जा रहे हैं.

    प्रशांत बोस की गिरफ्तारी का क्या है राज

    पिछले चार दशकों तक कई राज्य में नक्सलियों की जड़ों को मजबूत करने तथा नक्सलियों की रणनीति को अंजाम देने में बड़ा दिमाग और बड़े रणनीतिकार प्रशांत बोस ही थे. सटीक रणनीति के माहिर प्रशांत बोस करीबन 85 वर्ष के हो चुके हैं और उनकी शारीरिक स्थिति अच्छी नहीं है. वह डायबिटीज, बीपी, पैरालाइसिस जैसी कई बीमारियों से ग्रसित भी हो चुके हैं. ऐसे में अब उन्हें कहीं आने-जाने के लिए पालकी का ही सहारा लेना पड़ता है. पिछले दिनों कुचाई में अभियान के दौरान ऐसी ही एक पालकी भी मिली थी. इसमें उनके आने-जाने से जुड़ी पुलिस को कई अहम जानकारी भी मिली. शारीरिक रूप से लाचार प्रशांत बोस के लाने ले जाने में नक्सलियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी. साथ ही उनकी सुरक्षा में नक्सलियों की एक बड़ी फौज हमेशा तैनात रहती थी. इसमें काफी खर्चा और मेहनत भी लगता था. कहीं ना कहीं नक्सली संगठनों को प्रशांत बोस की रणनीति से जितना फायदा नहीं होता था, उससे ज्यादा मशक्कत उनकी सुरक्षा और उन्हें सुविधा बहाल करने में होता था. ऐसे में प्रशांत बोस कहीं ना कहीं उनके लिए एक बोझ ही बनते जा रहे थे. लेकिन पिछले चार दशकों से नक्सलियों के हर सुख-दुख में शामिल रह कर नक्सलवाद में पूरी आस्था रखने वाले और नक्सलियों के मार्गदर्शक अपने इस बड़े नेता को सीधे तौर पर दरकिनार नहीं कर सकते थे. इससे उनके संगठन के बीच आपसी फूट पड़ने का अंदेशा था. पूरी स्थिति के बीच ऐसी चर्चा है कि कुछ अपने ही लोगों ने पुलिस के पास उनके आने-जाने की सूचना साझा की और जिसके कारण उनकी गिरफ्तारी हुई.

     पुलिस रख रही खास ख्याल

    पिछले चार दशकों तक नक्सली गतिविधियों से पुलिस का सिरदर्द बने तथा हमेशा पुलिस को चकमा देने वाले प्रशांत बोस की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उनका बेहतर ख्याल रख रही है. कई प्रकार की बीमारियों से ग्रसित होने के कारण उनके खान-पान तथा उनकी सुविधा का भी ख्याल रखा जा रहा है. गिरफ्तारी के तुरंत बाद पुलिस की टीम उन्हें बड़े पुलिस अधिकारियों की निगरानी में गोपनीय स्थान पर ले गई. विश्वस्त सूत्रों के अनुसार डायबिटीज के पीड़ित होने के कारण उन्हें कोई असुविधा ना हो इसका ख्याल रखा गया है.

    आज  पेश हो सकते हैं नक्सली नेता प्रशांत बोस

    नक्सली नेता प्रशांत बोस की गिरफ्तारी के बाद पुलिस कई दिनों तक उनके साथ पूछताछ कर सकती थी. जिससे नक्सलियों के आगामी रणनीति तथा वर्तमान में बनाई गई रणनीति के बारे में पुलिस को अहम सुराग मिल सकता था. लेकिन, उनकी गिरफ्तारी के बाद मीडिया में तेजी से जानकारी वायरल होने के बाद पुलिस को अब ज्यादा दिन तक उन्हें गुप्त रखना आसान नहीं होगा. ऐसे में पुलिस को उनकी गिरफ्तारी को सार्वजनिक करना होगा. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि उनकी गिरफ्तारी को आज पुलिस महानिदेशक द्वारा सार्वजनिक किया जा सकता है.

    रिपोर्ट : विकास कुमार, सरायकेला


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