BSO से कैसे धनकुबेर बने अभय तिवारी, कुछ ही महीनों में अर्जित कर ली करोड़ों की संपत्ति, जानिए कैसे

BSO से कैसे धनकुबेर बने अभय तिवारी, कुछ ही महीनों में अर्जित कर ली करोड़ों की संपत्ति, जानिए कैसे

रांची (RANCHI): झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, अभय तिवारी का नाम इस पूरे मामले की अहम कड़ियों में सामने आ रहा है. जांच एजेंसियां एक तरफ परीक्षा प्रक्रिया में उसकी कथित भूमिका की पड़ताल कर रही हैं, तो दूसरी ओर उसकी संपत्तियों, आर्थिक गतिविधियों और रिश्तेदारों के चयन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. सूत्रों के दावों के मुताबिक, अभय तिवारी से जुड़ी संपत्तियों की कीमत करोड़ों रुपये में है और कुल संपत्ति 50 करोड़ रुपये से अधिक होने की बात कही जा रही है. हालांकि, इस आंकड़े और संपत्तियों के स्रोत की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच एजेंसियों की ओर से नहीं हुई है.

Image

अभय तिवारी की कहानी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह खुद JSSC-CGL के जरिए प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी यानी BSO के पद पर चयनित हुआ था. इससे पहले वह परीक्षा कराने वाली एजेंसी TDPL से मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर जुड़ा रहा था. 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा से TDPL का संबंध होने के कारण जांच में अभय की भूमिका पर भी सवाल उठे. CID ने जुलाई 2026 में उसे गिरफ्तार किया था. जांच के दौरान उसके कथित संपर्कों, परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी और आर्थिक लेन-देन की पड़ताल की जा रही है.

13 साल में 12 परीक्षाएं पास करने का दावा

जांच से जुड़ी रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अभय तिवारी ने करीब 13 वर्षों के दौरान लगभग 12 अलग-अलग सरकारी भर्ती परीक्षाओं में सफलता हासिल की. इनमें नेवी, BARC, CRPF हेड कांस्टेबल, IRB कांस्टेबल और नॉर्दर्न कोलफील्ड्स जैसी परीक्षाओं के अलावा JSSC PGT और CGL तथा JPSC की कई परीक्षाएं शामिल बताई गई हैं. JPSC से जुड़ी जिन परीक्षाओं में उसके सफल होने का उल्लेख सामने आया है, उनमें सहायक वन संरक्षक, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, फूड सेफ्टी ऑफिसर और 11वीं झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा शामिल हैं. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन सफलताओं में कहीं किसी तरह की अनियमितता तो नहीं हुई.

Image

जांच से जुड़ी जानकारी के अनुसार, अभय ने पूछताछ में कथित तौर पर एक ऐसे नेटवर्क की जानकारी दी, जिसमें एजेंट और बिचौलियों के जरिए अभ्यर्थियों को जोड़े जाने का आरोप है. दावा है कि इंटरव्यू में नंबर बढ़वाने के लिए प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये तक की कथित डील होती थी. अभय के कथित बयान के मुताबिक, अभ्यर्थियों को पहले एजेंटों के जरिए नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था. इसके बाद संबंधित लोगों से संपर्क कर इंटरव्यू बोर्ड में नंबर बढ़ाने की व्यवस्था किए जाने का आरोप है. कथित तौर पर अभ्यर्थी को उसके तय बोर्ड तक पहुंचाने के लिए कोड-डिकोड की प्रक्रिया का भी इस्तेमाल किया जाता था. इन दावों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी.

अब संपत्तियों पर जांच की नजर

अभय तिवारी से जुड़ी संपत्तियों को लेकर भी कई दावे सामने आए हैं. सूत्रों के मुताबिक, रांची के नामकुम थाना क्षेत्र के जोरा गांव में करोड़ों रुपये की जमीन पर एक आलीशान मकान बनाया गया है. सिंह मोड़ के पास फ्लैट और बरियातू में संपत्ति होने की बात भी कही जा रही है. सबसे ज्यादा चर्चा देवघर में तैयार किए जा रहे एक बड़े अस्पताल को लेकर है. सूत्रों का दावा है कि अस्पताल परियोजना में बड़ी रकम लगाई जा रही है. इसके अलावा रांची की एक मेडिकल एजेंसी के पास कथित तौर पर करोड़ों रुपये रखे होने की सूचना की भी जांच की जा रही है. अब CID के लिए बड़ा सवाल यह है कि इन संपत्तियों को खरीदने और निर्माण में इस्तेमाल हुई रकम का स्रोत क्या था. जांच में बैंक खातों, जमीन की रजिस्ट्री, भुगतान के रिकॉर्ड और संपत्तियों के वास्तविक मालिकाना हक की पड़ताल अहम हो सकती है.

Image

मामले में छात्रों की ओर से जारी पोस्टरों में अभय तिवारी के कई रिश्तेदारों के JSSC-CGL में BSO पद पर चयन का दावा किया गया है. इनमें उसके भाई, भाभी, साला, साली और दूर के रिश्तेदारों के नाम भी बताए गए हैं. पोस्टर में उपेंद्र मिश्रा की BSO में 51वीं, तेजनारायण पंडित की 68वीं, बापी कुमार मिश्रा की 124वीं, विक्रम पांडेय की 127वीं और सुमित कुमार तिवारी की 143वीं रैंक का दावा किया गया है. हालांकि, किसी व्यक्ति का रिश्तेदार होना या परीक्षा में सफल होना अपने आप में अपराध नहीं है. इन अभ्यर्थियों की भूमिका और चयन में किसी अनियमितता का सवाल तभी साबित होगा, जब जांच में ठोस साक्ष्य सामने आएंगे.

अब संपत्ति और परीक्षा कनेक्शन की जांच

अभय तिवारी के मामले में अब जांच केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रह गई है. CID यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि TDPL से उसके संबंध, सरकारी परीक्षाओं में उसकी सफलताओं, कथित नेटवर्क, रिश्तेदारों के चयन और उसकी संपत्तियों के बीच कोई वित्तीय या आपराधिक कनेक्शन है या नहीं. यदि जांच में कथित संपत्तियों और परीक्षा से जुड़े पैसों के बीच सीधा संबंध सामने आता है, तो मामला और गंभीर हो सकता है. फिलहाल 50 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति, अस्पताल में निवेश और अन्य आर्थिक गतिविधियों से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि बाकी है. इसलिए अभय तिवारी की कथित संपत्ति और उसके स्रोत को लेकर अंतिम तस्वीर जांच और दस्तावेजी सबूत सामने आने के बाद ही साफ होगी.

Image