तीन साल में शिक्षा विभाग से जुड़े 3 मंत्रियों का निधन, जानिए कौन थे सुदीव्य सोनू जिन पर हेमंत सोरेन को था सबसे ज्यादा भरोसा?

सुदीव्य कुमार सोनू के निधन से झारखंड मुक्ति मोर्चा को बड़ा झटका लगा है. 2020 के बाद हेमंत सोरेन सरकार के चार मंत्रियों का मंत्री पद पर रहते निधन हो चुका है.

तीन साल में शिक्षा विभाग से जुड़े 3 मंत्रियों का निधन, जानिए कौन थे सुदीव्य सोनू जिन पर हेमंत सोरेन को था सबसे ज्यादा भरोसा?

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): यह दुखद संयोग है कि झारखंड में शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों का निधन 3 साल के भीतर हो गया. वैसे 2020 से अगर गिनती की जाए तो अब तक हेमंत सोरेन सरकार के चार मंत्रियों का मंत्री पद पर रहते हुए निधन हुआ है. 

टाइगर जगरनाथ महतो का निधन 6 अप्रैल 2023 को हो गया था. Covid के बाद वह बीमार पड़े और हैदराबाद में इलाज के बाद भी उन्हें नहीं बचाया जा सका. उसके बाद शिक्षा विभाग से जुड़े रामदास सोरेन का निधन 15 अगस्त 2025 को हो गया. उसके बाद सुदीव्य कुमार सोनू का निधन 6 सितंबर 2026 को गिरिडीह में हो गया. उन्हें देर रात को दिल का दौरा पड़ा. उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. 

इसके पहले 3 अक्टूबर 2020 को हाजी हुसैन अंसारी का निधन हो गया था. वैसे सुदीव्य कुमार सोनू का निधन झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए बड़ा झटका होगा. जगरनाथ महतो के निधन के बाद सोनू मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विश्वासपात्र बन गए थे .उनके पास उच्च शिक्षा के अलावे नगर विकास विभाग भी था. अभी छात्रों के आंदोलन में भी वह हाई पावर कमेटी के सदस्य थे. 

जिस तरह जगरनाथ महतो पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए संकटमोचक की भूमिका में काम करते थे. लगभग उसी भूमिका  सोनू भी आ गए थे. उनके निधन से झारखंड मुक्ति मोर्चा को बड़ा झटका लगा है. 

बता दे कि झारखंड कि राजनीति में सुदीव्य कुमार सोनू की पहचान सिर्फ गिरिडीह के विधायक अथवा मंत्री के रूप में नहीं थी. वह झारखंड मुक्ति मोर्चा के भरोसे वाले नेताओं में शामिल रहे. लगभग तीन दशक तक वह पार्टी से जुड़े रहे और चुनावी राजनीति के कई उतार-चढ़ाव देखे.

2009 और 2014 में चुनाव हारने के बाद 2019 में पहली बार गिरिडीह से विधायक बने थे. 2024 में लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की थी और उसके बाद हेमंत सरकार में कैबिनेट मंत्री बने. लगातार 2009 और 2014 में चुनाव हारने के बावजूद उन्होंने सक्रिय राजनीति नहीं छोड़ी. संगठन में उनकी भूमिका बनी रही और पार्टी के भीतर उनका प्रभाव बढ़ता गया. 

2019 में वह पहली बार चुनाव जीते. भाजपा के निर्भय कुमार शाहबादी को पराजित किया. 2019 में सोनू को 80,000 से अधिक वोट मिले थे जबकि भाजपा की उम्मीदवार को लगभग 65000 वोट मिले थे. कहा तो अभी जाता है कि जब 2024 में हेमंत सोरेन जेल चले गए तो उस समय पार्टी को संगठित रखने में भी उनकी भूमिका रही. 

2024 में हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन को सक्रिय राजनीति में लाने में भी उनकी भूमिका की चर्चा होती रही है. फिलहाल उनके पास उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला संस्कृति ,खेल एवं युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग थे.