जींस की छोटी जेब का वो सच जो आप नहीं जानते! क्या है इतिहास ? क्या सच में सिक्के रखने के लिए बनाई गई थी छोटी जेब

जींस की छोटी जेब का वो सच जो आप नहीं जानते! क्या है इतिहास ? क्या सच में सिक्के रखने के लिए बनाई गई थी छोटी जेब

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): आज के दौर में जींस हमारे पहनावे का एक बेहद अहम हिस्सा बन चुकी है. चाहे ऑफिस जाना हो, दोस्तों के साथ घूमना हो या कोई कैजुअल मीटिंग हो, जींस हर मौके के लिए परफेक्ट मानी जाती है. आपने ध्यान दिया होगा कि जींस की आगे वाली दाहिनी जेब के ठीक ऊपर एक और बहुत छोटी सी जेब (Tiny Pocket) होती है. अक्सर लोग इस छोटी सी जेब का इस्तेमाल सिक्के, बस का टिकट, चाबी या फिर पेनड्राइव जैसी छोटी-मोटी चीजें रखने के लिए करते हैं. कई लोगों को तो आज भी यही लगता है कि इसे सिक्के रखने के लिए ही बनाया गया था, इसलिए इसे आम बोलचाल में 'कॉइन पॉकेट' भी कह दिया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस छोटी सी जेब के बनने के पीछे एक बेहद दिलचस्प इतिहास है? यह जेब किसी फैशन डिजाइन या सिक्के रखने के लिए नहीं, बल्कि एक बेहद खास और जरूरी वजह से बनाई गई थी, जिसका नाता 19वीं सदी के इतिहास से जुड़ा है.

क्या सच में सिक्के रखने के लिए बनी थी यह जेब?

सबसे पहले इस भ्रम को दूर करना जरूरी है कि यह जेब सिक्के रखने के लिए बनाई गई थी. हालांकि आज हम इसमें चिल्लर या सिक्के डाल लेते हैं, लेकिन जब पहली बार जींस के डिजाइन में इस छोटी जेब को शामिल किया गया था, तब इसका मकसद बिल्कुल अलग था. दरअसल, यह कहानी साल 1873 की है, जब दुनिया की मशहूर कंपनी 'लेवी स्ट्रॉस' (Levi Strauss & Co.) ने पहली बार नीली जींस का पेटेंट हासिल किया था. उस दौर में इस छोटी जेब को 'वॉच पॉकेट' (Watch Pocket) कहा जाता था. यह वह दौर था जब हाथ में घड़ी बांधने का चलन नहीं था, बल्कि पुरुष अपनी जेब में रखने वाली गोल 'पॉकेट वॉच' (Pocket Watch) का इस्तेमाल करते थे. इसी घड़ी को सुरक्षित रखने के लिए जींस में यह खास जगह बनाई गई थी.

काउंटबॉयज और मजदूरों की जरूरत से जुड़ा इतिहास

19वीं सदी के उत्तरार्ध में अमेरिका में काउबॉयज (Cowboys) और खदानों में काम करने वाले मजदूरों का दौर था. इन लोगों के लिए समय देखना बेहद जरूरी होता था, लेकिन काम के दौरान हाथ में या सामान्य जेब में घड़ी रखने से उसके टूटने या गिरने का खतरा हमेशा बना रहता था. मजदूर जब झुककर काम करते थे या काउबॉयज जब घोड़ों पर सवारी करते थे, तो बड़ी जेबों से कीमती पॉकेट वॉच आसानी से बाहर गिरकर टूट जाती थी. इस समस्या का समाधान निकालने के लिए लेवी स्ट्रॉस के दर्जी जैकब डेविस ने जींस की मुख्य जेब के अंदर एक छोटी, तंग और गहरी जेब डिजाइन की. यह जेब इतनी चुस्त होती थी कि इसमें पॉकेट वॉच पूरी तरह फिट हो जाती थी और उबड़-खाबड़ रास्तों या भारी काम के दौरान भी अपनी जगह से टस से मस नहीं होती थी. इस तरह, यह छोटी सी जेब उस दौर के कामकाजी लोगों की एक बहुत बड़ी जरूरत को पूरा करने के लिए वजूद में आई.

रिनेट्स (Rivets) और छोटी जेब का गहरा कनेक्शन

जींस के इस इतिहास में एक और मजेदार बात इसके कोनों पर लगे तांबे के छोटे-छोटे बटन हैं, जिन्हें 'रिनेट्स' (Rivets) कहा जाता है. जब इस छोटी जेब को जींस में जोड़ा गया, तो इसके कोनों को मजबूत करने के लिए इन मेटल रिनेट्स का इस्तेमाल किया गया. दरअसल, मजदूर जब बार-बार अपनी घड़ी को इस तंग जेब से निकालते और रखते थे, तो कपड़े के फटने का डर रहता था. इन तांबे के बटनों ने जेब को इतनी मजबूती दी कि जींस सालों-साल बिना फटे चलती थी. आज भले ही पॉकेट वॉच का जमाना चला गया है और इसकी जगह हाथ की घड़ियों और स्मार्टफोन ने ले ली है, लेकिन लेवी स्ट्रॉस और अन्य ब्रांड्स ने जींस के इस क्लासिक लुक और ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखने के लिए इस छोटी जेब को आज भी गायब नहीं होने दिया है.

आज के दौर में इसका बदला हुआ इस्तेमाल

समय बदलने के साथ-साथ इस छोटी जेब का नाम और काम दोनों बदल गए हैं. पॉकेट वॉच इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई, तो लोगों ने इस जेब का इस्तेमाल अपनी सहूलियत के हिसाब से करना शुरू कर दिया. आज इसे 'कॉइन पॉकेट', 'टिकट पॉकेट' या 'मैच पॉकेट' (माचिस रखने की जगह) के नाम से भी जाना जाता है. आज के युवा इसमें अपनी गाड़ियों की चाबियां, वायरलेस ईयरबड्स, सिम कार्ड या फिर मोल्ड किए हुए नोट रख लेते हैं. जींस बनाने वाली कंपनियां इसे अब अपनी विरासत (Heritage) और ओरिजिनल डिजाइन के सम्मान के तौर पर बनाती हैं. तो अगली बार जब आप अपनी जींस की इस छोटी जेब में कोई सिक्का या चाबी डालें, तो याद रखिएगा कि आप अपने पहनावे में 150 साल से भी ज्यादा पुराना इतिहास और बेहतरीन इंजीनियरिंग का एक नमूना साथ लेकर चल रहे हैं.