रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर चल रहे विवाद के बीच TSR Data Processing Private Limited (TDPL) एक बार फिर जांच के केंद्र में है. संदर्भित अखबार की रिपोर्ट में TDPL के उत्तर प्रदेश से लेकर झारखंड तक भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों का सिलसिलेवार उल्लेख किया गया है. वहीं, जुलाई 2026 में JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान CID की कार्रवाई ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है.
2010 में बनी कंपनी, भर्ती परीक्षाओं में बाद में बढ़ी भूमिका
रिपोर्ट के मुताबिक TSR Data Processing Private Limited यानी TDPL का गठन 3 अगस्त 2010 को हुआ था. कंपनी का CIN U72300UP2010PTC041566 बताया गया है. इसका पंजीकृत कार्यालय लखनऊ के जांकीपुरम स्थित FF-67, आदर्श कॉम्प्लेक्स, इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहा में दर्ज है.
अखबार में उपलब्ध कंपनी विवरण के अनुसार TDPL एक गैर-सरकारी और गैर-सूचीबद्ध निजी कंपनी है. रिपोर्ट में कंपनी से जुड़े निदेशकों के तौर पर राम वीर सिंह और सत्यपाल सिंह का उल्लेख है, जबकि मोहम्मद तारिक को पूर्व निदेशक बताया गया है.
यूपी में भी भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद
अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि TDPL का नाम केवल झारखंड की परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहा. उत्तर प्रदेश में भी कंपनी द्वारा कराई गई भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आए और मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंचा. रिपोर्ट के अनुसार विधानसभा और विधान परिषद की भर्ती से जुड़े मामले में 12 अप्रैल 2023 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश में भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल दर्ज हुए. कोर्ट ने भविष्य में विधानसभा और विधान परिषद के वर्ग-III पदों की भर्ती निजी एजेंसी के बजाय उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग जैसी वैधानिक संस्था से कराने की दिशा में निर्देश दिए थे. यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि इससे निजी परीक्षा एजेंसियों को सरकारी भर्ती प्रक्रिया सौंपने और उनकी जवाबदेही को लेकर व्यापक सवाल खड़े हुए.

2018 से विवादों की कड़ी
संदर्भित रिपोर्ट में TDPL से जुड़े विवादों की एक टाइमलाइन भी दी गई है.
- 2018-19: यूपी में वीडीओ भर्ती को लेकर विवाद में एजेंसी का नाम आया.
- 2020-21: यूपी विधानसभा एवं विधान परिषद भर्ती में भी कंपनी विवादों में रही.
- 2023: इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सवाल पहुंचे.
- 2024: झारखंड में परीक्षा संबंधी काम के लिए TDPL की एंट्री हुई.
- 20 मई 2025: JSSC ने TDPL को ब्लैकलिस्ट किया.
- जुलाई 2026: JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ी जांच में कंपनी फिर सवालों के घेरे में आई.
- 22 जुलाई 2026: CID ने TDPL से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की.
- झारखंड में 2024 में हुई TDPL की एंट्री.
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा झारखंड में TDPL की एंट्री से जुड़ा है. अखबार के मुताबिक झारखंड में TDPL की एंट्री वर्ष 2024 में हुई. उस समय JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष के कार्यकाल में कंपनी की सेवाओं का इस्तेमाल किया गया और मनोज कुमार तिवारी को कंपनी का अधिकृत प्रतिनिधि बताया गया.
बाद में यही नाम JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा की कथित अनियमितताओं की जांच में भी सामने आया. जांच एजेंसियों के अनुसार मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी TDPL से जुड़े रहे थे. Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार जांचकर्ता इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि उनके द्वारा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हासिल की गई सफलताओं और TDPL से उनके संबंध के बीच कोई आपराधिक कड़ी थी या नहीं. हालांकि इस संबंध में जांच अभी निर्णायक स्थिति में नहीं पहुंची है.
JPSC की 14वीं परीक्षा ने बढ़ाया विवाद
2026 में JPSC की 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के बाद विवाद तेज हुआ. इसके बाद CID ने मामले की जांच शुरू की.
जांच आगे बढ़ने के साथ JPSC से जुड़े अधिकारियों और परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी के लोगों से पूछताछ और गिरफ्तारी का सिलसिला शुरू हुआ. 24 जुलाई 2026 को CID ने TDPL के तीन कर्मचारियों हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार को गिरफ्तार किया. इससे पहले भी इस मामले में गिरफ्तारियां हो चुकी थीं.
CID की कार्रवाई के बाद इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या आठ तक पहुंचने की जानकारी सामने आई. इनमें JPSC की तत्कालीन सहायक परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, TDPL निदेशक रामवीर सिंह, मोहम्मद उस्मान, मोहम्मद इबाद और अभय कुमार तिवारी समेत अन्य लोग शामिल बताए गए.

TDPL को पहले ही ब्लैकलिस्ट कर चुका था JSSC
पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब TDPL पर पहले से सवाल उठ चुके थे और JSSC ने मई 2025 में कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया था, तो बाद में परीक्षा से जुड़े काम में उसकी भूमिका कैसे बनी रही?
Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार TDPL पर JSSC के साथ हुए समझौते की शर्तों के अनुपालन में कमी को लेकर कार्रवाई हुई थी और मई 2025 में कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया था. इसके बावजूद एक महीने बाद कंपनी को परीक्षा संबंधी काम सौंपे जाने की बात सामने आई है.
यही बिंदु अब जांच का अहम हिस्सा बन सकता है कि ब्लैकलिस्टिंग के बावजूद कंपनी को किस प्रक्रिया के तहत दोबारा परीक्षा कार्य मिला और इसके लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय हुई.
सवाल सिर्फ एक परीक्षा का नहीं
TDPL विवाद अब केवल JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा.
संदर्भित रिपोर्ट में JPSC की 10 परीक्षाओं में TDPL की भूमिका का उल्लेख किया गया है. इनमें संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा, सिविल जज, सहायक लोक अभियोजक, इंस्पेक्टर ऑफ फैक्ट्री, सहायक लोक अभियोजक, फॉरेस्टर, वायरलेस इंस्पेक्टर तथा झारखंड पात्रता परीक्षा जैसी परीक्षाओं का उल्लेख है.
ऐसे में जांच का दायरा बढ़ने पर यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या केवल 14वीं सिविल सेवा परीक्षा की प्रक्रिया की जांच पर्याप्त होगी या TDPL से जुड़ी पिछली सभी परीक्षाओं के डेटा, प्रश्नपत्र, सर्वर लॉग, अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड और परीक्षा संचालन की प्रक्रिया की भी फोरेंसिक जांच होगी?
अब जांच की दिशा सबसे अहम
24 जुलाई की कार्रवाई के बाद CID ने TDPL के तीन और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया और रांची के दो होटलों समेत कई स्थानों पर छापेमारी की. जांच एजेंसी ने पहले गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ भी की.
मामले में अब सबसे अहम सवाल यह है कि TDPL की भूमिका केवल परीक्षा संचालन तक थी या परीक्षा प्रक्रिया के किसी संवेदनशील हिस्से तक उसकी पहुंच थी?
इसके अलावा एजेंसी और आयोग के अधिकारियों के बीच निर्णय लेने की प्रक्रिया, अधिकृत प्रतिनिधियों की भूमिका, परीक्षा डेटा की सुरक्षा और ब्लैकलिस्टिंग के बाद कंपनी को दोबारा काम मिलने की परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण होगी.
फिलहाल इन आरोपों को जांच के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता. CID की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित अनियमितताओं में TDPL या उससे जुड़े व्यक्तियों की वास्तविक भूमिका क्या थी.

