राजनीतिक गुरु के प्रत्याशी का विरोध और 'छोटे सरकार' पार्टी से बाहर, पढ़िए मोकामा टाल से बेऊर जेल और विधानसभा तक का 'अनंत' सफर
लालू राबड़ी के शासनकाल में दबाव के बावजूद नीतीश का हाथ थामा और मोकामा सीट पर कब्जा जमा लिया. नीतीश कुमार के अनंत भक्त को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में छः वर्षों के लिए बाहर कर दिया गया.
पटना: बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए शुक्रवार को मतदान समाप्त हो गया लेकिन इसे लेकर राजनीति खत्म नहीं हुई. इस बीच शनिवार को बिहार के राजनीतिक गलियारे से एक बड़ी सनसनीखेज खबर भी सामने आई जिसमें जदयू ने मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी पूर्व विधायक नीलम देवी को पार्टी से 6 वर्षों के लिए निष्काषित कर दिया. इतना ही नहीं पार्टी ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा भी विधानसभा के अध्यक्ष के पास भेज दी. हालांकि इस बात का अंदेशा लोगो को उसी वक्त हो गया था जब उन्होंने समझाइश के बावजूद जदयू के विधान परिषद उम्मीदवार नीरज कुमार का विरोध करना बंद नहीं किया उपर से उन्होंने मीडिया में नीतीश कुमार को लेकर एक बयान से हलचल मचा दिया था. परिणाम सामने है कि मतदान की प्रक्रिया खत्म होते ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने एक पत्र जारी कर अनंत सिंह और उनकी पत्नी को पार्टी से बाहर किए जाने का फरमान जारी कर दिया. अब आइए जानते हैं अनंत सिंह की वह कहानी कि कैसे उन्होंने मोकामा टाल से बेऊर जेल और विधान सभा तक का सफर किया और उनका नाम छोटे सरकार कैसे बना....
9 वर्ष की उम्र हत्या का लगा था आरोप
अनंत सिंह का जन्म 1 जुलाई 1961 को बाढ़ अनुमंडल अंतर्गत नदमा गांव में हुआ. कहा जाता है कि महज 9 वर्ष की उम्र में ही वह एक हत्या के आरोप में पकड़े गए थे और 15 वर्ष की उम्र में उन्हें दुबारा जेल जाना पड़ा था. चार भाइयों में सबसे छोटे अनंत सिंह बहुत कम उम्र में ही मोकामा इलाके में सक्रिय हो गए और हथियार के बल पर अपना बर्चस्व बना लिया. 80 और 90 के दशक में अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह की बाढ़ और मोकामा क्षेत्र के अपराध जगत में तूती बोलती थी. अनंत सिंह ने अपने भाई की विरासत को संभाला और हथियार के बल पर मोकामा इलाके में अपनी पकड़ मजबूत की. अनंत सिंह के भाई दिलीप भी मोकामा विधानसभा सीट से दो बार विधायक रह चुके थे लेकिन 2000 के चुनाव में उन्हें सुरजभान सिंह से शिकस्त खानी पड़ी थी. अनंत सिंह के एक चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके विरुद्ध करीब 3 से 4 दर्जन मामले दर्ज रहे हैं.
पावरफुल लालू को नजरअंदाज कर नीतीश को तौला था चांदी के सिक्कों से
उस वक्त लालू - राबड़ी का बिहार में शासन था और राजनीति में उनकी तूती बोलती थी बावजूद इसके अनंत सिंह ने नीतीश कुमार का हाथ पकड़ा. लालू यादव के विरोध और सत्ता के बल पर अनंत सिंह के घर पर भारी पुलिस बल भेजने, जिसमें अनंत सिंह को भारी नुकसान उठाना पड़ा था के बावजूद वह नहीं डिगे और नीतीश कुमार के साथ खड़े रहे. उस वक्त बाढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान अनंत सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान नीतीश कुमार को चांदी के सिक्के और लड्डू से तौला था फिर उनकी एक अलग ही छवि बन गई थी. अनंत सिंह इसी चुनाव में जदयू की टिकट पर विधायक भी बने और उसके बाद से अब तक लगातार जदयू, राजद तथा निर्दलीय विधायक बनते रहे. 2022 में घर से एके47 बरामदगी मामले में जब उन्हें दोषी करार दिया गया तब उनकी पत्नी नीलम देवी राजद की टिकट पर मैदान में उतरी और जीत हासिल की. बाद में मामले में रिहा होने के बाद वह 2025 के चुनाव में वापस जदयू के टिकट पर मैदान में उतरे और जीत दर्ज की.
हमेशा करते रहे जरूरतमंदों की मदद
अनंत सिंह के विधायक बनने के बाद इलाके में उनका दबदबा भी बढ़ता चला गया. इलाके में लोग उनके डर से मुंह नहीं खोलते थे. हालांकि एक बात थी कि वह जरूरतमंदों की हमेशा मदद करते आए हैं. कहा जाता है कि अनंत सिंह की ड्योढ़ी से कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटा. खास कर गरीबो की बेटी की शादी में अनंत सिंह काफी मदद करते रहे हैं. इलाके लोग बताते हैं कि अगर कोई गरीब उनके दरवाजे पर जा कर कह देता था कि दहेज की वजह से बेटी की शादी नहीं हो रही तो वह या तो लड़के को डरा कर तैयार कर देते थे या फिर दहेज की रकम देते थे. अनंत सिंह के दरवाजे पर जाने वाले हर व्यक्ति से आज भी खाना के लिए जरूर पूछा जाता है और यही कारण है कि आज भी अनंत सिंह खास मौकों पर रसगुल्ले की व्यवस्था जरूर करते हैं. यही कारण है कि वह 'छोटे सरकार' बुलाये जाने लगे.
जदयू, राजद के साथ ही निर्दलीय भी दर्ज की जीत
अनंत सिंह 2005 और 2010 में जदयू की टिकट पर विधायक बने तो 2015 में लालू - नीतीश के गठजोड़ के बाद साइडलाइन कर दिए गए लेकिन उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. इस दौरान वह सत्ताधारी दल जदयू से अलग चल रहे थे और इसी दौरान 2019 में उनके घर पुलिस की छापेमारी में एके 47 हथियार के साथ ही 26 कारतूस बरामद हुआ. अनंत सिंह जेल गए, वापस भी आए और एक बार फिर वह जदयू की टिकट पर 2020 में विधायक बन गए. 2022 में कोर्ट ने उन्हें इस मामले में दोषी करार देते हुए सजा सुना दी जिसके बाद उनकी विधायक खत्म हो गई और इस बार राजद की टिकट पर उनकी पत्नी नीलम देवी ने चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. फरवरी 2024 में नीतीश सरकार के विधानसभा में बहुमत साबित करने के दौरान उन्होंने राजद विधायक होते हुए भी एनडीए सरकार का समर्थन किया और 2025 में अनंत सिंह पत्नी समेत जदयू में शामिल हो गए. 2025 में अनंत सिंह जदयू की टिकट पर खुद मैदान में आए और एक बार फिर विधायक बने.
जानवर के शौकीन, घोड़ा - अजगर से लेकर लैंड क्रूजर तक
मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह शुरू से ही जानवरों के शौकीन रहे हैं. उन्होंने अब भी अपने आवास पर गाय और घोड़े पाल रखे हैं. एक समय था जब अनंत सिंह का दो घोड़ा बिहार ही नहीं देश भर में चर्चित था. वह रेस में जीतने वाला घोड़ा था जिसने कई रेस जीते भी. एशिया के सबसे बड़े पशु मेला सोनपुर में भी लोग अनंत सिंह का घोड़ा देखने के लिए दूर दूर से आते थे. कहा जाता है कि सोनपुर मेला में वर्ष 2007 में लालू यादव का घोड़ा बिकने के लिए आया था. अनंत सिंह ने वह घोड़ा खरीदने की ठानी. हालांकि उन्हें यह भी पता था कि लालू यादव उन्हें घोड़ा नहीं देंगे इसलिए अनंत सिंह ने एक किसान को भेज कर वह घोड़ा खरीदा था. इतना ही नहीं उसी वर्ष अनंत सिंह ने बड़े ही गर्व से एक पालतू अजगर को भी दिखाया था जिसके बाद वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत उनके ऊपर दबाव बना और उन्होंने अजगर वन विभाग को सौंप दिया था. इतना ही नहीं अनंत सिंह महंगी विदेशी गाड़ियों का भी शौक रखते हैं. वर्तमान में उनके पास करीब ढाई करोड़ की एक लैंड क्रूजर कार मौजूद है जिससे वह चलते हैं.
बेबाक अंदाज के लिए बॉलीवुड तक है धमक
मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह अपने बेबाक अंदाज के लिए भी जाने जाते हैं और उनकी इसी बेबाकी का नतीजा है कि अपने समर्थक के साथ ही विरोधी खेमे में बोलने के स्टाइल की वजह से पसंद किए जाते हैं. उनके बात करने के स्टाइल से बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद भी काफी प्रभावित हैं और उन्होंने उस स्टाइल को अपने एक फिल्म में प्रयोग भी किया है. इतना ही नहीं सोनू सूद ने एक इंटरव्यू के दौरान इस बात की चर्चा भी की तथा अनंत सिंह से फोन पर बात कर मुंबई आने का न्योता भी दिया. अभी हाल ही में बाढ़ के दौरान सोनू सूद जब बिहार आए तो अनंत सिंह से भी मुलाकात की और उनके साथ ही बाढ़ ग्रस्त इलाकों में भी गए.
नीतीश के सीएम पद से हटने के बाद चुनाव नहीं लड़ने का कर चुके हैं ऐलान
अनंत सिंह पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं और उन्होंने ऐलान किया है कि जिस दिन वह सीएम की कुर्सी छोड़ देंगे उसके बाद हम चुनाव नहीं लड़ेंगे. हालांकि अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अगर अनंत सिंह की विधानसभा की सदस्यता रद्द की जाती है तो वह दुबारा चुनाव मैदान में आते हैं या परिवार के किसी अन्य सदस्य को मैदान में उतारते हैं. इतना ही नहीं वह किस पार्टी का दामन थामते हैं, यह भी देखने वाली बात होगी. बता दें कि विधान परिषद चुनाव को लेकर अनंत सिंह ने पहले ही जन सुराज प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन करने की घोषणा की थी तथा पार्टी के द्वारा मना करने के बावजूद नामांकन से लेकर प्रचार और रोड शो करते रहे. अनंत सिंह का कहना था कि नीरज कुमार ने हमेशा उनका विरोध किया तथा हर बार चुनाव में हराने की भी कोशिश की इसलिए वह उनका समर्थन नहीं करेंगे. हालांकि उन्होंने कभी जदयू या नीतीश - निशांत का विरोध नहीं किया. अब नीरज कुमार का विरोध करने की सजा के तौर पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने उन्हें पत्नी समेत पार्टी से छः वर्ष के लिए बाहर कर दिया है.