स्मृतिशेष: सुदिव्य सोनू ने कार्यकर्ता से मंत्री तक का सफर कैसे किया तय? जानिए
सुदिव्य कुमार सोनू ने झामुमो के जमीनी कार्यकर्ता से विधायक और फिर कैबिनेट मंत्री तक का लंबा राजनीतिक सफर तय किया. दो चुनावी हार के बाद 2019 में पहली जीत और 2024 में लगातार दूसरी जीत ने उनके सियासी कद को नई ऊंचाई दी.
टीएनपी डेस्क (TNP DESK): सियासत में कुछ सफर जीत के साथ शुरू होते हैं, तो कुछ संघर्षों से पहचान बनाते हैं. सुदिव्य कुमार सोनू की कहानी भी ऐसे ही लंबे संघर्ष और संगठन के प्रति समर्पण की कहानी रही. करीब तीन दशक तक झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ जुड़े रहे सोनू ने पहले संगठन के जमीनी कार्यकर्ता के तौर पर अपनी जगह बनाई और फिर चुनावी राजनीति में कदम रखा. शुरुआती दो चुनावों में हार मिली, लेकिन उन्होंने न संगठन का साथ छोड़ा और न ही अपनी राजनीतिक सक्रियता कम होने दी. 2019 में गिरिडीह से पहली जीत ने उनके सियासी सफर को नई दिशा दी. 2024 में लगातार दूसरी बार विधायक बनने के बाद उन्हें हेमंत सोरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी मिली. कार्यकर्ता से विधायक और फिर मंत्री तक का यह सफर उनके राजनीतिक धैर्य और संगठन में लंबे भरोसे की कहानी बयां करता है.
2009 में पहली बार आजमाई चुनावी किस्मत
सुदिव्य कुमार सोनू ने 2009 के विधानसभा चुनाव में गिरिडीह सीट से झामुमो उम्मीदवार के तौर पर अपनी चुनावी पारी शुरू की. हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली. पांच साल बाद 2014 में उन्होंने एक बार फिर इसी सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार भी परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहा. उस चुनाव में भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी ने जीत दर्ज की थी. लगातार दो चुनावों में हार के बावजूद सोनू ने मैदान नहीं छोड़ा. संगठन के भीतर उनकी सक्रियता जारी रही और पार्टी में उनकी भूमिका लगातार मजबूत होती गई. यही संगठनात्मक पकड़ आगे चलकर उनकी चुनावी वापसी की जमीन बनी.

2019 में मिली पहली बड़ी कामयाबी
2019 का विधानसभा चुनाव सुदिव्य कुमार सोनू के राजनीतिक करियर में निर्णायक मोड़ साबित हुआ. उन्होंने गिरिडीह सीट पर भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी को शिकस्त देकर पहली बार विधानसभा में कदम रखा. इस चुनाव में सोनू को 80,871 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी को 64,987 वोट हासिल हुए. विधायक बनने के बाद उन्होंने अपने क्षेत्र में शिक्षा और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रियता दिखाई. स्थानीय रिपोर्टों में सर जेसी बोस विश्वविद्यालय की स्थापना की पहल, पीरटांड़ में सिंचाई परियोजना और मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेज से जुड़े प्रस्तावों को उनकी प्राथमिकताओं में बताया गया.
संगठन से लेकर चुनावी रणनीति तक बनाई पहचान
सुदिव्य कुमार सोनू की भूमिका सिर्फ गिरिडीह विधानसभा तक सीमित नहीं रही. झामुमो संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहने के कारण पार्टी की रणनीति में भी उन्हें अहम माना जाता था. 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी की सोशल मीडिया रणनीति को मजबूत करने में उनकी भूमिका की चर्चा हुई. इसी दौर में कल्पना सोरेन की सक्रिय राजनीति में एंट्री को लेकर भी सोनू की भूमिका सामने आई. रिपोर्टों के मुताबिक, गांडेय विधानसभा क्षेत्र से कल्पना सोरेन को चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति में भी उनका योगदान था. कल्पना सोरेन ने गांडेय उपचुनाव जीतने के बाद 2024 के विधानसभा चुनाव में भी इस सीट पर जीत कायम रखी.

2024 में फिर जीते, बने कैबिनेट मंत्री
2024 के विधानसभा चुनाव में सुदिव्य कुमार सोनू ने एक बार फिर गिरिडीह सीट पर जीत दर्ज की. इस बार उन्हें 94,042 वोट मिले, जबकि भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी को 90,204 वोट हासिल हुए. लगातार दूसरी जीत के बाद उनका राजनीतिक कद और बढ़ा. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में बनी सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया. गिरिडीह सीट से झामुमो के टिकट पर जीतकर मंत्री बनने वाले वह पहले नेता बने. मंत्री बनने के बाद सुदिव्य कुमार सोनू को सरकार में कई महत्वपूर्ण विभाग सौंपे गए. उनके पास उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति तथा खेल एवं युवा कार्य जैसे विभागों की जिम्मेदारी रही. इस तरह संगठन के एक सक्रिय कार्यकर्ता से शुरू हुआ उनका सफर पहले विधायक और फिर राज्य सरकार के महत्वपूर्ण कैबिनेट मंत्री तक पहुंचा.
सुदिव्य कुमार सोनू के राजनीतिक सफर की सबसे खास बात यह रही कि 2009 और 2014 की चुनावी हार उन्हें रोक नहीं सकी. उन्होंने झामुमो के साथ अपनी सक्रियता जारी रखी और संगठन में लगातार काम करते रहे. 2019 में पहली जीत और 2024 में लगातार दूसरी जीत ने उनकी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत किया. ऐसे में 56 वर्ष की उम्र में उनके आकस्मिक निधन के साथ झारखंड की राजनीति ने एक ऐसे नेता को खो दिया, जिसने लंबी संगठनात्मक पारी के बाद चुनावी राजनीति में अपनी जगह बनाई और फिर राज्य सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों तक पहुंचे.