14 महीनों के काल में 4 मौतें! JMM ने कैसे खोए एक के बाद एक दिग्गज नेता, पढिए
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का बीती रात एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. उनकी मौत से सोरेन परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. दिशोंम गुरु के जाने के बाद सीएम के सर से मां का आँचल हटना, एक अपूर्णीय क्षति है.
टीएनपी डेस्क (TNP DESK): मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का बीती रात एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. उनकी मौत से सोरेन परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. दिशोंम गुरु के जाने के बाद सीएम के सर से मां का आँचल हटना, एक अपूर्णीय क्षति है. ऐसे में इस घटना के बाद यह कहना गलत नहीं होगा की बीते करीबन 14 महीने झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए काफी मुश्किल रहे हैं.
समझिए 14 माह का ग्राफ
14 महीनों के काल में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने वैसी दिग्गज नेताओं को खोया, जिसे पार्टी के मजबूत स्तम्भ की तरह देखा जाता था. जबकि इस दौरान पार्टी के साथ-साथ सोरेन परिवार को भी लगातार दो बड़े निजी दुखों का सामना करना पड़ा है. पहले झामुमो के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का निधन हुआ और इसके चंद दिनों बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता रामदास सोरेन भी नहीं रहे. ऐसे में करीबन एक साल बाद मंत्री और गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के निधन ने पार्टी को एक फिर झकझोर दिया था. इन दुखों से परिवार उबरा नहीं था और अब शिबू सोरेन की पत्नी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन के निधन से परिवार और पार्टी दोनों में शोक की लहर दौड़ पड़ी है.
ऐसे में एक नजर डालते हैं उन दिग्गजों पर जिन्होंने हमें अलविदा कह दिया

दिशोंम गुरु शिबू सोरेन: 4 अगस्त 2025 को झामुमो के संस्थापक और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल शिबू सोरेन का निधन हो गया. तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके शिबू सोरेन पार्टी के सबसे बड़े चेहरों में शामिल थे. उनके निधन के साथ झामुमो ने अपने संस्थापक और आंदोलन की राजनीतिक विरासत के प्रमुख स्तंभ को खो दिया.पार्टी और सोरेन परिवार अभी इस बड़े सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि महज 11 दिन बाद एक और दुखद खबर सामने आ गई.

रामदास सोरेन: 15 अगस्त 2025 को झामुमो के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन का दिल्ली में इलाज के दौरान निधन हो गया. वह 62 वर्ष के थे. 2 अगस्त को गिरने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जाया गया था. रामदास सोरेन के निधन से झामुमो को संगठन के साथ-साथ सरकार के स्तर पर भी बड़ा नुकसान हुआ. उनके निधन के बाद घाटशिला विधानसभा सीट पर उपचुनाव की स्थिति बनी.

सुदिव्य सोनू: लगभग एक साल बाद झामुमो को 6 सितंबर 2026 को एक और बड़ा झटका लगा. गिरिडीह विधायक और राज्य सरकार में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का अचानक निधन हो गया. 56 वर्षीय सोनू की तबीयत अचानक बिगड़ी थी. हेमंत सोरेन सरकार में उनके पास उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति और खेलकूद एवं युवा कार्य जैसे अहम विभाग थे. उनके निधन से राज्य सरकार के साथ झामुमो संगठन को भी बड़ा नुकसान हुआ.

रूपी सोरेन: 7 अक्टूबर 2026 को सोरेन परिवार पर एक बार फिर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. झामुमो संस्थापक शिबू सोरेन की पत्नी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का रांची में निधन हो गया. करीब 14 महीने के भीतर हेमंत सोरेन ने अपने पिता और मां दोनों को खो दिया. रूपी सोरेन भले ही सक्रिय राजनीति में किसी प्रमुख पद पर नहीं रहीं, लेकिन शिबू सोरेन के लंबे राजनीतिक सफर और परिवार के संघर्षपूर्ण दौर में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही.
शिबू के बाद रूपी का जाना बड़ा निजी आघात
शिबू सोरेन के निधन के बाद रूपी सोरेन परिवार के लिए भावनात्मक सहारे का एक महत्वपूर्ण आधार थीं. अब उनके निधन से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने माता-पिता दोनों को खोने का गहरा व्यक्तिगत दुख है. एक ओर उनके सामने राज्य और पार्टी की जिम्मेदारियां हैं, तो दूसरी ओर परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय है.