रांची. झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का विवाद अब एक बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है. जिस मामले की शुरुआत रिजल्ट और OMR में कथित गड़बड़ी के आरोपों से हुई थी, उसकी CID जांच अब कथित तौर पर करोड़ों रुपये के लेन-देन और अभ्यर्थियों को परीक्षा में सेटिंग के नाम पर फंसाने वाले सिंडिकेट तक पहुंच गई है.14 अगस्त को प्रकाशित दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, CID जांच में एक ऐसे कथित नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसका लक्ष्य 14वीं JPSC परीक्षा के जरिए करीब 100 करोड़ रुपये जुटाना था. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अभ्यर्थियों को PT पास कराने से लेकर अंतिम चयन तक के लिए अलग-अलग रकम बताई गई थी. हालांकि, इन सभी दावों को फिलहाल जांच में सामने आई जानकारी और आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए. अंतिम सच्चाई CID की जांच और अदालत की प्रक्रिया से स्पष्ट होगी.
एक अभ्यर्थी से एक करोड़ रुपये तक लेने की तैयारी
CID जांच के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, कथित सिंडिकेट में एक अभ्यर्थी के अंतिम चयन के लिए करीब एक करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया था. वहीं ST वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए करीब 80 लाख रुपये तक की रकम तय होने का दावा किया गया है.कथित नेटवर्क में बिचौलियों और एजेंटों की भी भूमिका बताई जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, एक अभ्यर्थी से सौदा कराने पर एजेंट को करीब 15 लाख रुपये कमीशन मिलने की बात सामने आई है.सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रकम एक साथ नहीं ली जानी थी. PT पास कराने के नाम पर करीब 10 लाख रुपये एडवांस, मेन्स परीक्षा तक लगभग आधी रकम और अंतिम चयन के बाद बाकी रकम लेने की कथित योजना थी.
11 अभ्यर्थियों से 1.10 करोड़ रुपये लेने का दावा
CID जांच में सामने आई सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक 11 अभ्यर्थियों से जुड़ी है. रिपोर्ट के अनुसार, कथित सिंडिकेट ने 11 अभ्यर्थियों से 1.10 करोड़ रुपये एडवांस लेने का दावा किया है. यानी परीक्षा में चयन की गारंटी के नाम पर पैसा लेने का कथित खेल परीक्षा के परिणाम आने से पहले ही शुरू हो चुका था. जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन अभ्यर्थियों को किसने जोड़ा, रकम किसके माध्यम से ली गई और पैसा आखिर किन लोगों तक पहुंचा. अगर जांच में यह आरोप प्रमाणित होता है, तो मामला सिर्फ परीक्षा में OMR या रिजल्ट की गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह एक संगठित भर्ती-सिंडिकेट का मामला बन सकता है.
मूल प्रमाणपत्र तक रखे जाने का दावा
इस कथित नेटवर्क का एक और गंभीर पहलू अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्रों से जुड़ा है. रिपोर्ट के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों के मूल प्रमाणपत्र कथित तौर पर नेटवर्क से जुड़े लोगों के पास रखे गए थे. इसे अभ्यर्थियों से किए गए सौदे में भरोसे और नियंत्रण के एक माध्यम के तौर पर इस्तेमाल किए जाने का दावा है.जैसे ही CID की जांच तेज हुई, कथित तौर पर अभ्यर्थियों ने अपने प्रमाणपत्र वापस लेने का दबाव बनाया. इसके बाद दस्तावेज वापस किए जाने की बात सामने आई. CID अब यह भी जांच रही है कि अभ्यर्थियों से लिया गया पैसा किस चैनल से आगे भेजा गया और इस पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे.
लेकिन कहानी यहां से शुरू नहीं होती 14वीं JPSC की कहानी केवल 14 अगस्त के इस खुलासे की कहानी नहीं है. पिछले डेढ़ महीने में घटनाक्रम तेजी से बदला है.
2 जुलाई 2026 को 14वीं JPSC PT का रिजल्ट जारी हुआ. इसके बाद ही कई अभ्यर्थियों ने रिजल्ट की पारदर्शिता पर सवाल उठाए. अभ्यर्थियों ने OMR, कटऑफ, प्राप्तांक और मूल्यांकन प्रक्रिया से संबंधित सवाल उठाए. कुछ अभ्यर्थियों
ने यह भी दावा किया कि अपेक्षाकृत अधिक अंक होने के बावजूद उनका चयन नहीं हुआ, जबकि कम अंक का दावा करने वाले कुछ अभ्यर्थी सफल हो गए. CID ने बाद में इन आरोपों की जांच शुरू की.यहीं से मामला धीरे-धीरे एक बड़े विवाद में बदल गया.

जुलाई में सड़क पर उतरे अभ्यर्थी
रिजल्ट को लेकर असंतोष बढ़ने के बाद अभ्यर्थियों ने JPSC कार्यालय के बाहर प्रदर्शन शुरू किया. उनकी मुख्य मांग परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच थी. आंदोलन बढ़ता गया और मामला राजनीतिक रूप से भी गर्म हो गया. विपक्ष और छात्र संगठनों ने सरकार पर दबाव बनाना शुरू किया. इसके बाद सरकार ने मामले की जांच CID को सौंप दी.
- 21 जुलाई: JPSC मुख्यालय पर CID की रेड
- 21 जुलाई को मामले में बड़ा मोड़ आया.
CID और रांची पुलिस की संयुक्त टीम ने JPSC मुख्यालय पर छापेमारी की. जांच टीम ने परीक्षा से संबंधित दस्तावेज, कंप्यूटर रिकॉर्ड, OMR से जुड़े रिकॉर्ड और डिजिटल सामग्री की जांच की. साथ ही परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी TDPL के कार्यालयों पर भी कार्रवाई की गई. वहां से हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, डायरी और अन्य दस्तावेज जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई.इसी कार्रवाई के बीच JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने पद से इस्तीफा दे दिया. बाद में उन्होंने CID के सामने अपना पक्ष रखा और परीक्षा संचालन तथा एजेंसी के चयन समेत कई मुद्दों पर पूछताछ का सामना किया.
TDPL पर क्यों आया सवाल?
CID जांच का एक अहम केंद्र परीक्षा कराने वाली एजेंसी TDPL भी बनी. जांच में यह सवाल उठा कि परीक्षा संचालन का जिम्मा एजेंसी को किस प्रक्रिया के तहत दिया गया और उसके चयन में किन नियमों का पालन हुआ. रिपोर्टों में TDPL को लेकर पहले से मौजूद विवादों और कथित ब्लैकलिस्टिंग के मुद्दे का भी उल्लेख हुआ. पूर्व चेयरमैन खियांग्ते ने पूछताछ के दौरान कहा था कि उन्हें कंपनी के ब्लैकलिस्टेड होने की जानकारी नहीं थी. इसके बाद जांच का दायरा केवल रिजल्ट और OMR तक नहीं रहा, बल्कि परीक्षा एजेंसी के चयन से लेकर परीक्षा संचालन और उससे जुड़े लोगों के नेटवर्क तक फैल गया.
पूर्व चेयरमैन से लंबी पूछताछ
28 जुलाई को CID ने पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते से पूछताछ की. रिपोर्टों के मुताबिक, उनसे परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्र, रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया और आउटसोर्स एजेंसी के चयन से संबंधित सवाल पूछे गए. बाद की कार्रवाई में मामले ने और गंभीर रूप लिया और खियांग्ते समेत कई लोगों पर CID की कार्रवाई की खबर सामने आई. जांच एजेंसी का फोकस यह पता लगाने पर रहा कि परीक्षा की पूरी प्रक्रिया में किस स्तर पर अनियमितता हुई.
1000 सफल अभ्यर्थियों की OMR भी जांच के घेरे में
CID ने जांच को और आगे बढ़ाते हुए 14वीं JPSC PT में सफल करीब 1000 अभ्यर्थियों से OMR की कॉपी मांगी. इन कॉपियों को आयोग के पास उपलब्ध मूल OMR से मिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किसी स्तर पर OMR में बदलाव या मूल्यांकन संबंधी गड़बड़ी हुई थी या नहीं. यही जांच इस पूरे मामले में बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि इससे पता चलेगा कि रिजल्ट में कथित गड़बड़ी वास्तव में OMR स्तर पर हुई थी या आरोपों की कोई दूसरी वजह थी.
गिरफ्तारी का सिलसिला भी बढ़ा
CID की कार्रवाई में JPSC और परीक्षा संचालन एजेंसी से जुड़े लोगों के अलावा कथित बिचौलियों पर भी शिकंजा कसने की बात सामने आई. रिपोर्टों के अनुसार, अब तक करीब 11 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें परीक्षा संचालन एजेंसी से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हैं. यानी जांच अब उस स्तर पर पहुंच चुकी है जहां एजेंसी को केवल यह नहीं पता करना है कि परीक्षा में क्या हुआ, बल्कि यह भी पता लगाना है कि किसने क्या किया, किसके निर्देश पर किया और इसके पीछे आर्थिक लाभ कितना था.

अगस्त में आंदोलन ने पकड़ा बड़ा रूप
इधर CID जांच चल रही थी और उधर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता गया. JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों ने लगातार प्रदर्शन किया. आंदोलन भूख हड़ताल तक पहुंचा और कई दिनों तक जारी रहा. छात्रों की प्रमुख मांगों में 14वीं JPSC PT को रद्द करना और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच शामिल थी.आंदोलन के दौरान रांची में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव भी हुआ. इससे मामला और ज्यादा राजनीतिक हो गया.
सरकार ने आखिरकार 14वीं JPSC रद्द की
लगातार बढ़ते दबाव के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की घोषणा की. सरकार ने इसके साथ दो अन्य JPSC परीक्षाओं को भी रद्द करने और TDPL द्वारा आयोजित अन्य परीक्षाओं की जांच कराने की बात कही.इस फैसले के बाद छात्रों की एक बड़ी मांग पूरी हुई, लेकिन CID जांच ने अब मामले को एक अलग दिशा दे दी है.
अब सबसे बड़ा सवाल: 100 करोड़ का नेटवर्क कितना बड़ा था?
14वीं JPSC अब रद्द हो चुकी है. लेकिन इस कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अभी जांच के सामने है. अगर CID की जांच में 100 करोड़ रुपये के कथित टारगेट का दावा प्रमाणित होता है, तो कई बड़े सवालों के जवाब तलाशने होंगे.
- क्या 11 अभ्यर्थियों से कथित 1.10 करोड़ रुपये लेना सिर्फ शुरुआत थी?
- क्या 100 करोड़ रुपये का लक्ष्य वास्तव में तय किया गया था?
- इस नेटवर्क में कितने बिचौलिये थे?
- पैसा किन खातों में पहुंचा?
- क्या परीक्षा से जुड़े किसी अंदरूनी व्यक्ति की इसमें भूमिका थी?
- क्या TDPL से जुड़े लोगों और कथित दलालों के बीच सीधा संपर्क था?
और सबसे बड़ा सवाल
क्या 14वीं JPSC में कथित गड़बड़ी सिर्फ OMR और रिजल्ट तक सीमित थी, या इसके पीछे सरकारी नौकरी के पदों को पैसे के बदले बेचने की एक बड़ी साजिश थी? इन सवालों का जवाब CID की वित्तीय जांच, डिजिटल साक्ष्य, OMR की फोरेंसिक जांच, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और अदालत में पेश होने वाले दस्तावेजों से सामने आएगा. फिलहाल 14वीं JPSC की कहानी 2 जुलाई के रिजल्ट विवाद से शुरू होकर 21 जुलाई की CID रेड, चेयरमैन के इस्तीफे, TDPL की जांच, गिरफ्तारियों, 1000 अभ्यर्थियों की OMR जांच, छात्रों के लंबे आंदोलन और अब कथित 100 करोड़ रुपये के सिंडिकेट तक पहुंच चुकी है. यह सिर्फ एक परीक्षा का विवाद नहीं रह गया है. यह झारखंड में सरकारी नौकरियों की भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर उठे सबसे गंभीर सवालों में से एक बन चुका है.
नोट: 100 करोड़ रुपये के कथित टारगेट, अभ्यर्थियों से रकम लेने और रेट तय होने संबंधी बातें जांच में सामने आई जानकारी और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं. इन्हें अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि जांच के दायरे में मौजूद आरोपों के रूप में प्रस्तुत किया किया गया है

