टीएनपी डेस्क(TNP DESK):भारतीय राजनीति में ऐसे कई नेता हुए, जिन्होंने अपने विचारों और फैसलों से देश को आगे बढ़ाया और एक दिशा तय की, लेकिन आज हम जिस खास शख्सियत की बात करने वाले हैं, वह एक कुशल राजनेता ही नहीं, बल्कि एक सहज इंसान, शानदार कवि और शानदार वक्ता थे. जब वह बोलना शुरू करते थे, तो विपक्ष में बैठे नेता भी ध्यान से सुनते थे. यही कारण है कि विचारों में असहमति रखने वाले विपक्षी नेता भी उन्हें काफी पसंद करते थे. उनकी पार्टी और उनके विचारों से असहमति रखने वाले नेता भी उनके साथ काफी सम्मान के साथ पेश आते थे. भले ही संसद में उनके विचारों और नीतियों पर विपक्ष सवाल उठाता था, लेकिन अगर निजी तौर पर बात की जाए तो हर नेता उन्हें सम्मान और प्यार देता था. उन्हें पसंद किए जाने के पीछे एक वजह यह भी थी कि वह काफी सहज भाषा का इस्तेमाल करते थे और हर बात में अपनी कविताओं और रचनाओं का इस्तेमाल करते थे, जिसकी वजह से माहौल कितना भी कठिन या गंभीर हो, वह अपनी कविताओं के माध्यम से भावनाओं से भर देते थे.आज अटल बिहारी वाजपेयी की 8वीं पुण्यतिथि है. आज उनकी पुण्यतिथि पर हम आपको बताएंगे कि कैसे उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में लोगों का दिल जीता और देश को आगे बढ़ाया, वहीं अपनी कविताओं से लोगों को आज भी प्रेरित कर रहे हैं.

अटल बिहारी वाजपेई की आज आठवीं पुण्य तिथि है
आपको बता दें कि अटल बिहारी वाजपेयी का निधन साल 2018 में 16 अगस्त के दिन हुआ था. उनके भाषणों की बात की जाए तो वह काफी अलग अंदाज में बोलते थे. उनका अंदाज संसद में बैठे सभी लोगों से अलग था. वह जब बोलते थे तो उनके शब्दों में ठहराव, भाव और एक ऐसी प्रभावशाली शैली रहती थी कि लोग प्रभावित हो जाते थे. वे अपनी कविताओं के माध्यम से कई कटाक्ष करते थे, लेकिन उनको लेकर कभी भी किसी नेता के अंदर कठोरता नहीं दिखती थी, क्योंकि उनकी भाषा काफी सरल और सहज होती थी. ऐसा बिल्कुल नहीं है कि वह अपने विरोधियों का विरोध नहीं करते थे, लेकिन वह अपने शब्दों के माध्यम से कटाक्ष करते थे, तीखी टिप्पणी करते थे, लेकिन वे अपने विचार और व्यक्ति के बीच फर्क बनाए रखते थे. यही वजह थी कि उनकी राजनीतिक बहस भी एक अलग स्तर की मानी जाती थी.

एक अच्छे नेता के साथ महान कवि थे अटल बिहारी वाजपेई
अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने राजनीतिक करियर के पहले और बाद दौर में और उसके दौरान भी कविताओं की रचना की, जिनको आज भी हम जाने-अनजाने में गुनगुनाते हैं. वहीं, जब वह अपनी कविताओं को अपने लफ्जों से बयां करते थे तो लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते थे, क्योंकि उनके बोलने का अंदाज इतना बेबाक और बिंदास था कि लोग उन्हें ध्यान से सुना करते थे. उनके अंदर सहजता, सरल स्वभाव और संवेदना थी, जिसे विपक्ष के नेताओं के साथ आम लोगों ने भी काफी खास जुड़ाव महसूस किया. प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उनके व्यक्तित्व में एक आम इंसान जैसा ही व्यवहार दिखा. वे लोगों से काफी सहज तरीके से मिलते थे और अपनी बातों को भारी-भरकम शब्दों के बजाय सरल तरीके से रखने का हुनर भी जानते थे. वहीं, मुश्किल से मुश्किल स्थिति में भी अपनी बातों को मुस्कुराते हुए ही बया करते थे, जिसकी वजह से माहौल गंभीर नहीं होता था.

विपक्षी नेता भी थे मुरीद
अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय राजनीति के एक ऐसे लोकप्रिय नेता हैं, जिनको आज भी लोग याद करके भावुक होते हैं. उनकी लोकप्रियता के पीछे एक वजह यह भी थी कि वह सिर्फ अपनी पार्टी के नेता नहीं थे. विचारों का समर्थन करते हुए, चाहे आप किसी भी पार्टी के हों, उन्होंने लंबे समय तक राजनीतिक जीवन में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की भूमिका निभाई. उन्होंने सरकार की नीतियों का जोरदार विरोध किया, लेकिन देशहित का जब भी सवाल आया तो उनकी राजनीति में राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने की छवि बनी. उनके लिए देश का हित सबसे ऊपर था. पार्टी भले ही न मानती थी, अगर विपक्ष के लोग भी देश के हित में बात करते थे तो उन्हें लगता था कि इससे देश को फायदा होगा, तो वह विपक्ष का साथ देते थे. यही वजह थी कि भारतीय राजनीति में वह एक अलग पहचान रखते थे. लेकिन जब भी उन्हें लगता था कि विरोध या फिर उनकी ही पार्टी में कुछ गलत बोला जा रहा है या किया जा रहा है, तो वह उसका विरोध करते थे.

उनकी कविताओं में दिखता था संघर्ष और उम्मीद
वहीं, अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं की बात की जाए तो उनकी अधिकांश कविताओं में जीवन के संघर्ष और उम्मीद की झलक साफ दिखाई देती थी. वहीं, कठिन से कठिन परिस्थितियों में निराश न होकर आगे बढ़ने की बात करते थे. उनकी रचनाओं में देश के प्रति प्रेम के साथ-साथ इंसान की कमजोरी और उसकी जिजीविषा को भी जगह मिलती थी. इसलिए जो लोग राजनीति में रुचि नहीं रखते थे, तो भी अटल बिहारी वाजपेयी उनके लिए प्रिय थे. वह किसी न किसी तरीके से लोगों से जुड़ाव रखते थे. अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन इस बात का उदाहरण बनकर सामने आता है कि राजनीति सिर्फ सत्ता हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह संवाद, विचार और जनसेवा का रास्ता है. देश के प्रधानमंत्री और बड़े नेताओं की सूची में ही अटल बिहारी वाजपेयी का नाम शामिल है. लोग उन्हें एक ऐसे इंसान के तौर पर याद करते हैं, जो विरोध की बात सुन सकता था, असहमति के बावजूद सम्मान बनाए रख सकता था और राजनीति के बीच भी अपने भीतर के कवि को जिंदा रख सकता था.
आज भी याद करके भावुक हो जाते हैं लोग
आज भले ही अटल बिहारी वाजपेयी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन आज भी उनकी कविताओं और रचनाओं के माध्यम से लोग उन्हें रोजाना जाने-अनजाने में जरूर याद करते हैं. सिर्फ पक्ष ही नहीं, विपक्ष के लोग भी आज अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हैं. यही खूबी अटल बिहारी वाजपेयी को भारतीय राजनीति में सबसे अलग और खास जगह देती है. वर्तमान के राजनीतिक परिदृश्य को देखा जाए तो आज एक तरफ जहां लोग विचारों की असहमति को छोड़कर व्यक्ति से असहमति और नफरत करने लगते हैं, तो ऐसे लोगों को अटल बिहारी वाजपेयी से कुछ बहुत कुछ सीखने की जरूरत है कि राजनीति केवल स्वार्थ को पूरा करने या फिर किसी का विरोध करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह विचारों की असहमति और देशहित का रास्ता है.

