रांची. झारखंड में यदि किसी सरकारी अस्पताल का सबसे अधिक नाम लिया जाता है तो वह है राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS), रांची. आज यह संस्थान लाखों मरीजों की उम्मीद, हजारों मेडिकल छात्रों का भविष्य और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी माना जाता है. लेकिन आज जिस RIMS को लोग जानते हैं, उसकी शुरुआत एक साधारण मेडिकल कॉलेज के रूप में हुई थी. लगभग 66 वर्षों में इस संस्थान ने कई बदलाव देखे और आज यह पूर्वी भारत के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में अपनी पहचान बना चुका है.
1960 में हुई स्थापना
रांची में मेडिकल शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ष 1960 में राजेंद्र मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई. इसका नाम देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के सम्मान में रखा गया. उस समय यह अविभाजित बिहार के सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल कॉलेजों में शामिल था. दक्षिण बिहार के हजारों छात्रों के लिए यह उच्च चिकित्सा शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन गया.

1965 में बना RMCH
फरवरी 1965 में अस्पताल पूरी तरह कार्यशील हुआ और इसका नाम Rajendra Medical College and Hospital (RMCH) रखा गया. शुरुआत में यहां सीमित विभाग, कम बेड और सामान्य चिकित्सा सुविधाएं थीं. बावजूद इसके, रांची, पलामू, संथाल परगना, सिंहभूम और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए यहां पहुंचते थे.
झारखंड गठन के बाद बदली तस्वीर
15 नवंबर 2000 को झारखंड अलग राज्य बना. नए राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में एक आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार करना भी था. इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने RMCH को राष्ट्रीय स्तर के मेडिकल संस्थान के रूप में विकसित करने की योजना बनाई.
15 अगस्त 2002 को RMCH को अपग्रेड कर Rajendra Institute of Medical Sciences (RIMS) बनाया गया. झारखंड विधानसभा ने इसके लिए विशेष अधिनियम पारित किया और संस्थान को स्वायत्त दर्जा दिया. इस फैसले ने संस्थान के विकास की नई दिशा तय की.
RMCH और RIMS में सबसे बड़ा अंतर
RMCH एक पारंपरिक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल था. वहीं RIMS को स्वायत्त संस्थान का दर्जा मिला, जिससे प्रशासनिक निर्णय तेजी से लिए जाने लगे. नए विभाग खोले गए. आधुनिक मशीनें खरीदी गईं. विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति बढ़ी और शोध गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला.
लगातार बढ़ती सुविधाएं
RIMS बनने के बाद अस्पताल में कई आधुनिक सुविधाएं जोड़ी गईं.
- सुपर स्पेशियलिटी विभागों की शुरुआत.
- ट्रॉमा सेंटर की स्थापना.
- आधुनिक ICU और मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर.
- MRI, CT Scan, Cath Lab जैसी उन्नत जांच सुविधाएं.
- कैंसर, हृदय, किडनी और न्यूरो रोगों के इलाज की विशेष व्यवस्था.
- डेंटल कॉलेज और नर्सिंग कॉलेज का विस्तार.
- आधुनिक पैथोलॉजी और रिसर्च लैब की स्थापना.
इन सुविधाओं के कारण अब झारखंड के अलावा बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से भी बड़ी संख्या में मरीज रिम्स पहुंचते हैं.
चिकित्सा शिक्षा का प्रमुख केंद्र
आज RIMS केवल अस्पताल नहीं बल्कि एक प्रमुख मेडिकल शिक्षण संस्थान भी है. यहां MBBS, MD, MS, DM, M.Ch., BDS, Nursing और कई पैरामेडिकल पाठ्यक्रम संचालित होते हैं. वर्षों के दौरान MBBS और पोस्टग्रेजुएट सीटों में भी वृद्धि हुई है. यहां से पढ़े कई डॉक्टर देश और विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

हर दिन हजारों मरीजों का इलाज
रिम्स झारखंड का सबसे बड़ा सरकारी रेफरल अस्पताल है. प्रतिदिन हजारों मरीज OPD में पहुंचते हैं. गंभीर मरीजों के लिए आपातकालीन सेवाएं 24 घंटे उपलब्ध रहती हैं. कार्डियोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, मेडिसिन, सर्जरी, बाल रोग, स्त्री एवं प्रसूति रोग सहित लगभग सभी प्रमुख विभाग यहां संचालित हैं.
कोविड महामारी में निभाई बड़ी भूमिका
कोविड-19 महामारी के दौरान RIMS राज्य का सबसे बड़ा कोविड उपचार केंद्र बना. हजारों मरीजों का इलाज किया गया. कोविड जांच, ICU, ऑक्सीजन बेड और गंभीर मरीजों की देखभाल में संस्थान की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही. महामारी ने यह साबित किया कि झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था में RIMS की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है.
चुनौतियां आज भी बरकरार
हालांकि विकास के बावजूद कई चुनौतियां आज भी मौजूद हैं.
सबसे बड़ी समस्या मरीजों का अत्यधिक दबाव है. राज्य के लगभग हर जिले से मरीज रिम्स आते हैं. कई बार बेड की कमी, डॉक्टरों और नर्सों की कमी, लंबी कतारें और रेफरल सिस्टम पर सवाल उठते रहे हैं. समय-समय पर प्रशासनिक विवाद, खरीद प्रक्रियाओं और प्रबंधन को लेकर भी चर्चाएं होती रही हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल और अधिक मजबूत किए जाएं तो RIMS पर मरीजों का दबाव काफी कम हो सकता है.

आगे की योजना
राज्य सरकार RIMS को राष्ट्रीय स्तर के चिकित्सा संस्थान के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है. डिजिटल हेल्थ सिस्टम, आधुनिक सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं, रिसर्च सेंटर, रोबोटिक सर्जरी, बेहतर मेडिकल शिक्षा और नई तकनीकों को शामिल करने की योजनाओं पर लगातार कार्य हो रहा है.विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पर्याप्त वित्तीय निवेश, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का विस्तार जारी रहा तो आने वाले वर्षों में RIMS पूर्वी भारत के अग्रणी सरकारी चिकित्सा संस्थानों में और मजबूत स्थान बना सकता है.
1960 में एक मेडिकल कॉलेज के रूप में शुरू हुआ यह संस्थान आज झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था का सबसे बड़ा आधार बन चुका है. RMCH से RIMS बनने तक की यात्रा केवल नाम बदलने की कहानी नहीं है, बल्कि यह चिकित्सा शिक्षा, आधुनिक इलाज, शोध और स्वास्थ्य सेवाओं के निरंतर विस्तार की कहानी है. लाखों मरीजों के विश्वास और हजारों डॉक्टरों के सपनों को आकार देने वाला RIMS आज झारखंड की पहचान बन चुका है. आने वाले वर्षों में इसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण होने की उम्मीद है.

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