1 जून से बदलेंगे LPG गैस के नियम, उपभोक्ताओं ने उठाए व्यवस्था पर सवाल

1 जून से बदलेंगे LPG गैस के नियम, उपभोक्ताओं ने उठाए व्यवस्था पर सवाल

रांची(RANCHI):  केंद्र सरकार एक जून से घरेलू गैस कनेक्शन को लेकर नए नियम लागू करने की तैयारी में है. सरकार का दावा है कि इस कदम से गैस की कालाबाजारी और अनियमितताओं पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी. लेकिन जब हमने जमीनी स्तर पर मामले की पड़ताल करने की कोशिश की, तो तस्वीर कुछ और ही नजर आई. उपभोक्ता नए नियमों से ज्यादा मौजूदा व्यवस्था की खामियों से परेशान दिखे. हाल ही में जब हम राजधानी स्थित आनंद गैस एजेंसी पहुंचे, तो वहां मौजूद लोगों में सरकार के इस फैसले को लेकर खासी नाराजगी देखने को मिली. लोगों का साफ कहना था कि कनेक्शन रद्द होने या नए नियमों की चिंता तो बाद की बात है, फिलहाल उनकी सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि उन्हें समय पर गैस ही नहीं मिल रही है.

डीएससी नंबर की मा

एजेंसी के बाहर इंतजार कर रहे उपभोक्ताओं ने बताया कि गैस बुकिंग के लिए जब वे ऑनलाइन पंजीकरण करने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें डिस्ट्रीब्यूटर सर्विस सेंटर (DSC) नंबर समय पर नहीं मिल पाता. इस वजह से बुकिंग प्रक्रिया अधूरी रह जाती है और गैस सिलेंडर लेने में भारी परेशानी होती है. "घर में छोटे बच्चे हैं, बुजुर्ग हैं. रोजमर्रा का खाना बनाना तक मुश्किल हो गया है," एक महिला उपभोक्ता ने अपनी व्यथा बयां की. उपभोक्ताओं ने यह भी माना कि ऑनलाइन गैस की कीमत कोई असामान्य रूप से अधिक नहीं है और सिलेंडर लगभग 970 रुपये में उपलब्ध है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या इसकी उपलब्धता है. "कीमत से ज्यादा चिंता इस बात की है कि गैस आखिर मिले कैसे. भूखे पेट कीमत का कोई मोल नहीं होता," एक अन्य उपभोक्ता ने कहा.

 गेट बंद और डिलीवरी गायब 

स्थिति को और मुश्किल बनाने वाली बात यह है कि एजेंसी का मुख्य गेट भी अक्सर बंद रखा जाता है, जिससे उपभोक्ताओं को अपनी समस्याएं बताने और जानकारी लेने में परेशानी होती है. कई लोगों ने शिकायत की कि अगर किसी तरह बुकिंग हो भी जाए, तो होम डिलीवरी की सुविधा भी नियमित रूप से उपलब्ध नहीं है. नतीजतन, घरेलू महिलाओं और बुजुर्गों को बार-बार एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. "हमारी उम्र हो चुकी है, बार-बार यहां आना-जाना संभव नहीं. अगर सरकार नए नियम ला रही है, तो पहले यह सुनिश्चित करे कि मौजूदा व्यवस्था काम कर रही है या नहीं," एक बुजुर्ग उपभोक्ता ने गुस्से में कहा.

सवाल मौजूदा व्यवस्था पर

ऐसे में लोगों का सवाल सरकार से है कि नए नियम लागू करने से पहले क्या मौजूदा व्यवस्था को बेहतर नहीं बनाया जाना चाहिए? जब उपभोक्ता आज भी समय पर गैस, बुकिंग और डिलीवरी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो नए नियमों का लाभ उन्हें कैसे मिलेगा? विशेषज्ञों का भी मानना है कि नीति-निर्माण और क्रियान्वयन में बड़ा अंतर होता है. नए नियम लागू करना ठीक है, लेकिन इससे पहले डिस्ट्रीब्यूटर्स की जवाबदेही तय करना और बुकिंग प्रक्रिया को सरल बनाना जरूरी है. अगर डीएससी नंबर जैसी बुनियादी समस्या का समाधान नहीं होगा, तो नए नियम भी कागजी खानापूर्ति साबित होंगे. सरकार को यह समझना होगा कि आम आदमी को राहत तभी मिलेगी जब व्यवस्था जमीनी स्तर पर काम करेगी. नए नियमों से पहले पुरानी व्यवस्था को दुरुस्त करना ही समझदारी होगी.

रिपोर्ट- सौम्या