JPSC-JSSC विवाद से झारखंड बंद तक, जानिए 21 जुलाई से अब तक क्या-क्या हुआ
JPSC-JSSC विवाद को लेकर BJP के झारखंड बंद का रांची में असर, कई स्कूल बंद रहे. बंद के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई.
JPSC-JSSC विवाद को लेकर BJP के झारखंड बंद का रांची में असर, कई स्कूल बंद रहे. बंद के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई.
रांची(RANCHI): झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन सोमवार, 10 अगस्त को अपने सबसे बड़े और तनावपूर्ण दौर में पहुंच गया. एक तरफ हजारों अभ्यर्थी विधानसभा घेराव के लिए सड़कों पर उतरे और कई स्तर की बैरिकेडिंग पार करते हुए विधानसभा गेट नंबर-1 तक पहुंच गए, तो दूसरी तरफ इसी दिन CID ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांगते को गिरफ्तार कर लिया. विधानसभा के बाहर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया.
21 जुलाई से शुरू हुआ विवाद, CID की कार्रवाई से बढ़ा मामला
JPSC परीक्षा विवाद की जांच में CID की कार्रवाई जुलाई में तेज हुई थी. 21 जुलाई को JPSC कार्यालय में जांच और छापेमारी के बाद तत्कालीन चेयरमैन एल. खियांगते ने पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद 23 जुलाई को CID ने उनके आवास समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की. जांच एजेंसी ने परीक्षा संचालन, दस्तावेजों और कथित अनियमितताओं से जुड़े पहलुओं की पड़ताल शुरू की. 28 जुलाई को खियांगते से लंबी पूछताछ हुई और बाद में उनसे दोबारा भी सवाल-जवाब किए गए.
जांच आगे बढ़ने के साथ JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आती गई. CID ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया. अब 10 अगस्त को एल. खियांगते की गिरफ्तारी ने जांच को उच्च स्तर तक पहुंचा दिया है. रिपोर्टों के मुताबिक, उन पर परीक्षा संचालन से जुड़ी एक कंपनी को लेकर भी गंभीर आरोपों की जांच की जा रही है.

छात्र आंदोलन ने पकड़ा जोर, 24 जिलों से पहुंचे अभ्यर्थी
परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों का आंदोलन जुलाई के आखिरी सप्ताह से लगातार तेज होता गया. छात्रों ने धरना, संविधान यात्रा, कैंडल मार्च, मशाल मार्च और फ्लैश लाइट मार्च जैसे कई कार्यक्रम किए. 5 अगस्त को सरकार ने छात्रों से बातचीत के लिए चार मंत्रियों की उच्चस्तरीय कमेटी बनाई. इसके बाद 7 और 8 अगस्त को सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई, लेकिन छात्रों की सभी प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन सकी.
9 अगस्त को सरकार ने 14वीं JPSC सिविल सेवा PT सहित कुछ परीक्षाओं को रद्द करने और जांच व भर्ती प्रक्रिया में सुधार के कदमों पर सहमति जताई. सरकार ने दावा किया कि छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगें मान ली गई हैं. हालांकि, छात्र इस दावे से सहमत नहीं हुए और उनका कहना रहा कि उनकी प्रमुख मांगें अभी बाकी हैं. खास तौर पर JSSC CGL मामले में स्वतंत्र जांच और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर गतिरोध बना रहा.

10 अगस्त: विधानसभा घेराव में टूटती गई बैरिकेडिंग
सोमवार सुबह से ही रांची में छात्रों का जुटान शुरू हो गया. अलग-अलग जिलों से पहुंचे अभ्यर्थी तिरंगा, पोस्टर और बैनर लेकर विधानसभा की ओर बढ़े. प्रशासन ने विधानसभा के आसपास कई स्तर की बैरिकेडिंग की थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने एक के बाद एक सुरक्षा घेरा पार कर लिया. छात्र विधानसभा गेट नंबर-1 के काफी करीब पहुंच गए और कुछ प्रदर्शनकारी वहीं बैठकर धरने पर भी बैठ गए.
जैसे-जैसे भीड़ आगे बढ़ती गई, पुलिस और छात्रों के बीच तनाव बढ़ता गया. पुलिस ने पहले छात्रों को समझाने और पीछे हटने की अपील की. इसके बाद वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया. प्रदर्शनकारियों के आगे बढ़ने का सिलसिला नहीं रुका तो आंसू गैस के गोले छोड़े गए और बाद में लाठीचार्ज भी किया गया. इस कार्रवाई के बाद मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई. कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल होने की खबरें भी सामने आईं.
देवेंद्र महतो और जयराम महतो आंदोलन के साथ
पूरे आंदोलन में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो प्रमुख चेहरों में रहे. लगातार बारिश में वह छात्रों की मांगों को लेकर लगातार उपवास और धरने पर बैठे रहे. उनकी प्रमुख मांगों में JSSC CGL पर कार्रवाई और JPSC मामले की स्वतंत्र जांच शामिल रही. सोमवार को विधानसभा के बाहर भी वह छात्रों के बीच मौजूद रहे और आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील करते रहे.
वहीं, डुमरी विधायक जयराम महतो भी छात्रों के समर्थन में खुलकर सामने आए. उन्होंने छात्रों के बीच पहुंचकर उनसे संयम बनाए रखने की अपील की. आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलने से मामला और बड़ा हो गया. सोमवार को जयराम महतो ने भी छात्रों के साथ खड़े होकर सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से फैसला लेने की बात कही.

विधानसभा के अंदर भी उठा JPSC-JSSC का मुद्दा
बाहर छात्र विधानसभा घेर रहे थे, वहीं अंदर मानसून सत्र की कार्यवाही चल रही थी. सदन में विधायक अरूप चटर्जी ने आंदोलनरत छात्रों के साथ सरकार की बातचीत का पूरा ब्योरा रखने की मांग की. इसके जवाब में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगों पर सहमत हो चुकी है.
सरकार ने बताया कि परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों की जांच के लिए SIT काम कर रही है. विवादित परीक्षाओं को लेकर भी कार्रवाई की बात कही गई. भर्ती प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए नई SOP तैयार करने और IIT, IIM रांची तथा XLRI जमशेदपुर जैसे संस्थानों से सुझाव लेने की बात भी सामने आई. हालांकि JSSC CGL की CBI जांच समेत कुछ मांगों पर सरकार और छात्रों के बीच मतभेद बना हुआ है.
BJP भी मैदान में, CM आवास घेराव से बढ़ा सियासी पारा
छात्र आंदोलन के बीच BJP और NDA ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. विपक्षी नेताओं ने JPSC-JSSC मामले में CBI जांच और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना साधा. सोमवार को BJP नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से मुख्यमंत्री आवास के पास भी प्रदर्शन किया गया, जिसके बाद कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया.
इस तरह 10 अगस्त को झारखंड में JPSC-JSSC विवाद सिर्फ छात्र आंदोलन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन गया. विधानसभा के बाहर छात्रों और पुलिस के बीच टकराव, अंदर सदन में सरकार का पक्ष, विपक्ष का विरोध और इसी बीच एल. खियांगते की गिरफ्तारी ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है.

अब सबसे बड़ा सवाल क्या?
10 अगस्त के घटनाक्रम के बाद छात्रों का आंदोलन खत्म नहीं हुआ है. सरकार का दावा है कि वह ज्यादातर मांगों को मान चुकी है और जांच व सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. दूसरी ओर, छात्र कुछ प्रमुख मांगों पर ठोस और स्पष्ट फैसला चाहते हैं. ऐसे में एल. खियांगते की गिरफ्तारी से CID जांच का दायरा कितना बढ़ता है और सरकार-छात्रों के बीच आगे क्या समाधान निकलता है, इस पर अब सबकी नजर है. फिलहाल इतना साफ है कि JPSC-JSSC विवाद ने झारखंड की भर्ती व्यवस्था, प्रशासन और राजनीति, तीनों को एक साथ कठघरे में खड़ा कर दिया है.ऐसे में भाजपा ने झारखंड बंद का ऐलान कर दिया है. जिसमे की काफी स्कूल्स बंद हैं रांची में.