रांची (RANCHI): झारखंड में सरकारी नियुक्तियों को लेकर सामने आए कथित घोटाले ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जांच में सामने आए दस्तावेजों और आरोपों के मुताबिक, कुछ अभ्यर्थियों के नंबरों में कथित तौर पर हेरफेर कर उन्हें ऐसी सरकारी सेवाओं में जगह दिलाई गई, जहां उनकी मूल उत्तर पुस्तिकाओं के अंक चयन के लिए पर्याप्त नहीं थे. इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो और वर्तमान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर से जुड़े रिश्तेदारों के नाम भी सामने आए हैं. इसके अलावा आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष और सदस्यों के परिजनों पर भी लाभ पहुंचाए जाने के आरोप हैं.
जांच से जुड़े आरोपों के मुताबिक, कई अभ्यर्थियों के मूल अंक और बाद में दर्ज किए गए अंकों में बड़ा अंतर पाया गया. आरोप है कि कुछ कॉपियों और OMR शीट में गड़बड़ी के जरिए अभ्यर्थियों के अंक बढ़ाए गए और फिर उन्हें अलग-अलग सरकारी सेवाओं के लिए चयनित किया गया. इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उन अभ्यर्थियों की है, जिनका संबंध तत्कालीन नेताओं या आयोग के सदस्यों से बताया जा रहा है.
सुदेश महतो के भाई मुकेश महतो का नाम
पुलिस सेवा में डीएसपी पद पर नियुक्त किए गए मुकेश महतो को पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो का भाई बताया गया है. आरोपों के मुताबिक, जनरल स्टडीज पेपर-1 में उन्हें मूल रूप से 45 अंक मिले थे, जिसे बाद में 127 कर दिया गया. इसी तरह पेपर-2 में 52 अंक को बढ़ाकर 137 किए जाने का दावा किया गया है. जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि अन्य विषयों में भी अंक बढ़ाए गए, जिसके बाद मुकेश महतो का चयन पुलिस सेवा में हुआ.
मंत्री राधाकृष्ण किशोर के भाई भी घेरे में
राधा प्रेम किशोर का नाम भी इस मामले में सामने आया है. वह वर्तमान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के भाई हैं. आरोप है कि इतिहास पेपर-1 में मिले 100 अंकों को बढ़ाकर 122 किया गया. LSW पेपर-2 में 74 अंक को 78 किया गया. बताया गया है कि अलग-अलग विषयों में अंकों में कथित बदलाव के बाद उन्हें पुलिस सेवा में 26वीं रैंक मिली. आरोप है कि यदि अंक नहीं बढ़ाए जाते तो उनका चयन संभव नहीं था.
आयोग सदस्य की रिश्तेदार को भी लाभ का आरोप
राज्य प्रशासनिक सेवा में नियुक्त बिनोद राम को आयोग की तत्कालीन सदस्य शांति देवी का भाई बताया गया है. आरोप के अनुसार LSW पेपर-2 में उन्हें 92 अंक मिले थे, जिसे बढ़ाकर 107 कर दिया गया. दावा है कि वास्तविक अंकों के आधार पर उनका कुल स्कोर किसी सेवा में चयन के लिए पर्याप्त नहीं था. बाद में कुल अंक बढ़ाकर 818.33 किए गए और उन्हें राज्य प्रशासनिक सेवा में नियुक्ति मिली.
अर्जुन मुंडा के PA का नाम भी सामने आया
कानू राम नाग का नाम भी नियुक्तियों में कथित अनियमितता के मामले में सामने आया है. उन्हें राज्य प्रशासनिक सेवा में नियुक्त किया गया था और वह तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के PA रह चुके थे. आरोप है कि जनरल स्टडीज पेपर-2 में मिले 83 अंकों को बढ़ाकर 117 किया गया. LSW पेपर में 57 अंक को बढ़ाकर 131 किए जाने का दावा है. अन्य विषयों में भी कथित तौर पर अंक बढ़ाए गए और इसके बाद उन्हें राज्य प्रशासनिक सेवा के लिए सफल घोषित किया गया.
अर्जुन मुंडा के करीबी रिश्तेदार का भी जिक्र
हरिहर सिंह मुंडा की नियुक्ति भी राज्य प्रशासनिक सेवा में हुई थी. उन्हें आयोग के तत्कालीन सदस्य राधा गोविंद नागेश का भतीजा और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा का करीबी रिश्तेदार बताया गया है. आरोपों के मुताबिक, मुंडारी विषय में मिले 128 अंक को बढ़ाकर 153 कर दिया गया. जनरल स्टडीज पेपर-1 में 62 अंक को 111 किए जाने का भी दावा है. इसके अलावा अन्य विषयों में भी अंक बढ़ाए जाने की बात सामने आई है. इसके बाद उन्हें पुलिस सेवा में 72वीं रैंक मिलने का उल्लेख किया गया है.
आयोग सदस्य के बेटे की नियुक्ति पर सवाल
कुंदन कुमार सिंह को वित्त सेवा में वाणिज्यकर अधिकारी के पद पर नियुक्त किया गया था. उन्हें आयोग के तत्कालीन सदस्य गोपाल प्रसाद सिंह का पुत्र बताया गया है. मामले में आरोप है कि उनकी OMR शीट में 19 सर्किल भरे गए थे, जबकि उन्हें 88 अंक दिए गए. वहीं, ऑप्शनल पेपर की OMR शीट के उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई है. जनरल स्टडीज पेपर-1 में मिले 26 अंकों को बढ़ाकर 111 किए जाने का आरोप है. अन्य विषयों में भी अंक बढ़ाने के बाद उन्हें वित्त सेवा में 70वीं रैंक मिलने की बात कही गई है.
कॉपी पर लिखा था 'ओम साईं नाथ'
मौसमी नागेश को वित्त सेवा में वाणिज्यकर अधिकारी बनाया गया था. वह आयोग के तत्कालीन सदस्य राधा गोविंद नागेश की बेटी बताई जाती हैं. उनके मामले में एक और गंभीर दावा सामने आया है. आरोप है कि उन्होंने अपनी पहचान जाहिर करने के लिए उत्तर पुस्तिका पर हिंदी में 'ओम साईं नाथ' लिखा था. इसके अलावा PT और मुख्य परीक्षा के अंकों में भी कथित अंतर का उल्लेख जांच में किया गया है. दावे के अनुसार जनरल स्टडीज में मिले 82 अंकों को बढ़ाकर 137 और दूसरे पेपर में 76 को 119 किया गया. अन्य विषयों में भी अंक बढ़ाकर उन्हें वित्त सेवा के लिए चयनित किए जाने का आरोप है.
PT में फेल, फिर भी मुख्य परीक्षा में शामिल कराने का आरोप
इंद्रजीत सिंह को भी वाणिज्यकर अधिकारी के पद पर नियुक्त किया गया था. वह आयोग के तत्कालीन सदस्य गोपाल प्रसाद के भतीजे बताए जाते हैं. आरोप है कि PT में उनकी OMR शीट पर जनरल स्टडीज और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में 37-37 गोले भरे गए थे. इसके बावजूद वह कथित तौर पर PT में सफल घोषित हुए और मुख्य परीक्षा में शामिल हुए. बाद में अंकों में कथित हेरफेर के जरिए उन्हें वित्त सेवा में 39वीं रैंक दिए जाने का दावा किया गया है.
हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा. फिलहाल कथित अंक हेरफेर, OMR में गड़बड़ी और प्रभावशाली लोगों से जुड़े अभ्यर्थियों की नियुक्तियों ने झारखंड के पुराने भर्ती विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है.

