चिप शॉर्टिज के कारण कार और मोबाईल कंपनियां परेशान, विकल्प तलाशने में जुटे कई देश

    चिप शॉर्टिज के कारण कार और मोबाईल कंपनियां परेशान, विकल्प तलाशने में जुटे कई देश

    पूरी दुनिया अभी चिप (semi-conductor) की कमी से जूझ रहा है. बड़े-बड़े कार और टेक कंपनियों का प्रोडक्शन अपने निचले स्तर पर पहुँच चुका हैं. कई कंपनियों के प्रोडक्ट लॉन्च को आगे के लिए टाला जा रहा है. कार निर्माता कंपनी टोयोटो ने अपने प्रोडक्सन को कम करने का फैसला किया है. कंपनी की ओर से बताया गया की चिप शॉर्टिज के कारण इस साल कंपनी 3 लाख कारों का कम उत्पादन करेगी. वहीं जनरल मोटर्स (GM) भी 2 लाख कारों के प्रोडक्सन में कटौती करने वाली है. अगर एक्स्पर्ट्स की माने तो 2023 आने तक कारों का दाम आसमान छूने लगेगा. 
    ऑटो इंडस्ट्री के अलावा बात करें तो चिप शॉर्टिज का असर मोबाईल या टेक्नॉलजी निर्माता कंपनियों पर भी देख जा सकता है. भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस को अपने आने वाले फोन jiophone next की लॉन्चिंग दिवाली तक के लिए आगे बढ़ानी पड़ी. पहले इसकी लॉन्चिंग 10 सितंबर को होने वाली थी लेकिन चिप शॉर्टिज की वजह से इसे दिवाली तक के लिए टाल दिया गया है. चिप शॉर्टिज की वजह से एप्पल के प्रोडक्ट के दाम का भी, बढ़ने का अंदाजा लगाया जा रहा है. 


    कोरोना के कारण चिप का उत्पादन घटा 

    पूरी दुनिया में चिप या सेमी कन्डक्टर कुछ ही देश बनाते हैं जिसको वो दुनिया के अलग-अलग देशों को निर्यात करते हैं. अमेरिका, यूरोप, ताइवान, जापान, साउथ कोरिया और चीन चिप के सबसे बड़े निर्माता देश हैं. इन्ही देशों से पूरे दुनिया मे चिप का निर्यात किया जाता है. लेकिन कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण लगभग हर देश ने लॉकडाउन लगाया या कड़ी पाबंदियाँ लगाईं. जिसकी वजह से कच्चे माल के आयात और निर्यात में भारी कमी हुई. कच्चे माल की कमी के कारण चिपों के निर्माण मे भी काफी कमी आयी. 


    इसका असर कब तक रहेगा?

    चिप शॉर्टिज की कमी 2021 के शूरआत से ही देखने को मिली थी. जो धीरे-धीरे कार निर्माताओं  के लिए सिर-दर्द बनने लगा. एक्स्पर्ट्स की माने तो बहुत से देश जैसे साउथ कोरिया, जापान और अमेरिका चिप निर्माताओं कंपनियों की मदद को आगे आए है और उसमें कई बिलियन डॉलर का इनवेस्टमेंट भी करने जा रहे हैं, जिससे चिप के प्रोडक्सन को बढ़ाया जा सके. इन सब बातों को ध्यान में रखे तो 2022 के अंत तक इस स्थिति से निकला जा सकता है. 
    चिप शॉर्टिज की कमी से कार और मोबाईल निर्माताओं कंपनियों को इसके दूसरे विकल्प तलाशने पर काम शुरू कर देना चाहिए जिससे भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटा जा सके.

    रिपोर्ट :  प्रकाश कुमार, रांची


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