राष्ट्रमंडल खेलों से पहले लवलीना बोर्गोहेन मानसिक रूप से परेशान, कोच को नहीं दी गई एंट्री

    राष्ट्रमंडल खेलों से पहले लवलीना बोर्गोहेन मानसिक रूप से परेशान, कोच को नहीं दी गई एंट्री

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): बर्मिंघम में आगामी राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने ट्विटर पर अपनी निराशा व्यक्त की है. उन्होंने लिखा है कि कैसे कुछ कारकों के कारण उनकी प्रशिक्षण प्रक्रिया में बाधा आ रही है. पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, खेल विभाग, युवा मामले और खेल मंत्रालय ने ट्वीट किया, “हमने भारतीय ओलंपिक संघ से लवलीना बोरगोहेन के कोच की मान्यता की तुरंत व्यवस्था करने का आग्रह किया है.”

    लवलीना बोरगोहेन ने कहा है कि यह बड़े अफसोस के साथ सूचित कर रही हूं कि मेरे कोचों को हटाए जाने के कारण मुझे लगातार परेशान किया जा रहा है. उन्होंने लिखा कि जिन्होंने मुझे मेरे देश के लिए ओलंपिक पदक जीतने में मदद की है उन कोचों को लगातार हटाने से, इस प्रतियोगिता के लिए मेरी ट्रेनिंग प्रभावित हो रही है.

    कोच को नहीं मिली एंट्री

    उन्होंने कहा कि मेरे कोचों में से एक द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता संध्या गुरुंगजी हैं. मेरे दोनों कोचों को अंतिम क्षण में शामिल होने से पहले, प्रशिक्षण शिविरों में भी, अनगिनत बार अनुरोध करना पड़ता है. इस समय, मेरी कोच संध्या गुरुंग कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज में भी नहीं हैं क्योंकि उन्हें अभी तक एंट्री नहीं मिली है और मेरी ट्रेनिंग प्रक्रिया रुकी हुई है. जबकि कॉमन वेल्थ गेम्स शुरू होने में सिर्फ 8 दिन बचे हैं. मेरे दूसरे कोच को भी भारत वापस भेज दिया गया है.

    मानसिक रूप से किया जा रहा प्रताड़ित

    उन्होंने आगे लिखा कि इतना अनुरोध करने के बाद भी, यह अभी भी हुआ और इससे मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया है. मुझे समझ नहीं आता कि अगर यह जारी रहा तो मैं अपने खेल पर कैसे ध्यान केंद्रित करूंगी. यही कारण है कि विश्व चैंपियनशिप में मेरा प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा और मैं नहीं चाहती कि यह राजनीति मेरे राष्ट्रमंडल खेलों के अवसरों को बर्बाद करे. मुझे उम्मीद है कि मैं इस राजनीति की बेड़ियों से मुक्त होकर अपने देश के लिए पदक ला सकती हूं.

    इसके बाद बीएफआई ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि नियम के अनुसार सहयोगी स्टाफ के रूप में केवल 33 प्रतिशत (1/3) खिलाड़ी को ही अनुमति दी जाती है. भारतीय मुक्केबाजी दल में 12 खिलाड़ी (8 पुरुष और 4 महिलाएं) हैं और नियमानुसार सपोर्ट स्टाफ की संख्या चार होगी, जिसमें ट्रैवलिंग कोच भी शामिल हैं. बीएफआई ने आगे कहा कि कोचों और सहयोगी स्टाफ के संबंध में मुक्केबाजी की आवश्यकता थोड़ी अलग है क्योंकि कई मुकाबले हैं, जो एक के बाद एक हो सकते हैं. बता दें कि ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली असमिया महिला एथलीट बोरगोहेन वर्तमान में बर्मिंघम में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी कर रही हैं.

     


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