सलाम इस जज्बे को: बेटी के भविष्य के लिए उफनती नदी से जंग लड़ता एक लाचार पिता।

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Digital News Desk • July 15, 2026

पश्चिम चंपारण जिले के बगहा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल छू लिया. यहां एक पिता अपनी बेटी को कंधे पर बैठाकर उफनती नदी पार कर स्कूल पहुंचाने की कोशिश करता दिखा. यह दृश्य बताता है कि आज भी कई इलाकों में बच्चों को शिक्षा के लिए कितनी बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

बगहा  : बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बगहा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल छू लिया. यहां एक पिता अपनी बेटी को कंधे पर बैठाकर उफनती नदी पार कर स्कूल पहुंचाने की कोशिश करता दिखा. यह दृश्य बताता है कि आज भी कई इलाकों में बच्चों को शिक्षा के लिए कितनी बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं

मामला रामनगर प्रखंड के दूरदराज़ दोन क्षेत्र का है. नेपाल के तराई इलाके में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण गंडक, मसान और अन्य पहाड़ी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है. वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से करीब 2.21 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद कई निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं. प्रशासन ने लोगों को नदी किनारे नहीं जाने की सलाह दी है और अलर्ट जारी किया है.

बेबस पिता नदी पार करता दिखाई देता है

इसी बीच वायरल हुए वीडियो में एक बेबस पिता अपनी जान जोखिम में डालकर बेटी को कंधे पर बैठाए तेज बहाव वाली नदी पार करता दिखाई देता है. ग्रामीणों की मदद से वह किसी तरह बच्ची को सुरक्षित स्कूल पहुंचाने में सफल होता है. यह वीडियो सिर्फ एक पिता के संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि उन बुनियादी सुविधाओं की कमी की भी सच्चाई बयां करता है, जिनका इंतजार इस इलाके के लोग आजादी के दशकों बाद भी कर रहे हैं.

रोजमर्रा का जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है

दोन क्षेत्र के दर्जनों गांव हर साल बारिश और बाढ़ के दौरान 22 नदियों से घिर जाते हैं. सड़क, पुल, बिजली, अस्पताल और बेहतर स्कूल जैसी सुविधाओं के अभाव में हजारों लोग बरसात के मौसम में मुख्यालय से कट जाते हैं. कई गांव टापू की तरह अलग-थलग पड़ जाते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई, मरीजों का इलाज और लोगों का रोजमर्रा का जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है.

सुरक्षित रास्ता और बुनियादी सुविधाएं पहुंचें

यह मार्मिक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. लोग इसे व्यवस्था की बड़ी विफलता बताते हुए सरकार से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं. एक पिता का यह संघर्ष याद दिलाता है कि शिक्षा का अधिकार तभी सार्थक होगा, जब हर बच्चे तक सुरक्षित रास्ता और बुनियादी सुविधाएं पहुंचें.