इसके बाद ऐसा लगता है कि झारखंड में भाजपा आक्रामक रुख अख्तियार करेगी। यह अलग बात है कि 2024 में चुनाव हारने के बाद बीजेपी झारखंड में कोई बड़ा मुद्दा खड़ा नहीं कर पाई है. छात्र आंदोलन को लेकर आगे बढ़ी भी, तो मामला खत्म हो गया. छात्रों की मांगों पर झारखंड सरकार झुक गई और आंदोलन खत्म हो गया. लेकिन अब खनिज विधेयक के खिलाफ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ही ऐलान कर दिया है कि वह बड़ा आंदोलन करेंगें। ऐसा आंदोलन होगा कि पूरा देश देखेगा। इसके लिए आज यानी गुरुवार को झामुमो की महत्वपूर्ण बैठक भी रांची में प्रस्तावित है. इस बैठक में आंदोलन की रूपरेखा तय हो सकती हैं.
भाजपा नेता बता रहे हैं कि झारखंड बीजेपी का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात की है. और झारखंड की वर्तमान हालात और छात्र आंदोलन के बाद उपजे हालात से गृह मंत्री को अवगत कराया। चर्चा तेज है कि अमित शाह ने भाजपा नेताओं को आक्रामक राजनीति करने की सलाह दी है. मुख्य एजेंडा खनिज विधेयक के खिलाफ आंदोलन की धार को कमजोर करना है. भाजपा अब यह बताएगी कि यह बिल झारखंड के विरोध में नहीं है, बल्कि राज्य और देश हित में है. अमित शाह से जो प्रमुख नेता मिले, उनमें प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ,पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, रघुवर दास, चंपई सोरेन, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राय, दीपक प्रकाश और संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह शामिल थे.
उल्लेखनीय है कि झारखंड में खनन एवं खनिज बिल को लेकर सियासी टकराव की जमीन पूरी तरह से तैयार हो गई है. छात्रों से निपटने के बाद सरकार का ध्यान अब खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 पर टिक गया है. इसको लेकर सियासी टकराव बढ़ सकता है. झामुमो, जहां इस विधेयक का सीधे विरोध कर रहा है, वहीं भाजपा इस बिल का बचाव करती दिख रही है. आज की झामुमो की बैठक में खनिज विधेयक के खिलाफ राज्य भर में आंदोलन कैसे तीखा बनाया जाए, इस पर चर्चा हो सकती है. बताया गया है कि संशोधित कानून से खनिज वाले राज्यों के अधिकार और राजस्व प्रभावित हो सकते हैं. झामुमो का मानना है कि झारखंड को हजारों करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो सकता है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने रख चुके हैं. प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को पुनर्विचार करने का आग्रह कर चुके है.
सरकार का मानना है कि राजस्व कम जाने से राज्य में शुरू कराई गई सुरक्षा योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं. उल्लेखनीय है कि नए विधेयक से झारखंड सहित खनिज उत्पादक राज्यों को बड़ा झटका लग सकता है. इस विधेयक से केंद्र सरकार ने राज्यों की शुल्क लगाने की शक्तियों को खत्म कर दिया है. झारखंड पर तो इसका व्यापक असर पड़ेगा. इस विधेयक के पारित हो जाने के बाद झारखंड सरकार अब अपने बकाये 1.36 लाख करोड़ रुपए का दावा भी नहीं कर सकेगी.
विधेयक कहता है कि कानून के लागू होने से पहले राज्य सरकारों द्वारा वसूल या जमा किया गया कर वापस नहीं करना होगा, लेकिन कर की जो भी राशि बकाया होगी, वह कानून के लागू होने के बाद वसूल नहीं की जा सकेगी. मतलब झारखंड का डिमांड खत्म हो जाएगा . सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2024 में राज्यों को खनिज अधिकारों पर सेस लगाने के अधिकार की अनुमति दी थी. इसके बाद तुरंत हेमंत सरकार ने झारखंड मिनिरल बेयरिंग लैंड सेस एक्ट 2024 लागू किया. ऐसा करने वाला झारखंड देश का पहला राज्य बना था. यह एक्ट खनन वाली भूमि पर राज्य सरकार को एक विशेष उपकर लगाने का अधिकार देता है. इस राशि का उपयोग सामाजिक सुरक्षा और जनहित के कार्यों में किया जा सकता है लेकिन अब यह अधिकतर राज्यों से खत्म कर दिया गया है. राज्य की कमाई घटेगा तो सरकार पर वित्तीय दबाव भी बढ़ेगा.
